हम भगवान की शरण की ओर जाएं तो भगवान अवश्य ही हमारी रक्षा करेंगे: स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज
BOL PANIPAT : श्री संत द्वारा हरि मन्दिर, निकट सेठी चौक, पानीपत के प्रांगण में नव विक्रमी सम्वत 2081 के उपलक्ष्य के अवसर पर परम पूज्य 1008 स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज (मुरथल वाले) की अध्यक्षता में सप्ताह भर चलने वाले संत समागम कार्यक्रम के पहले दिन महाराज श्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि यशोदा मैया ने एक बार प्रण लिया कि मैं आज 1000 दीपक जलाकर यमुना में प्रवाहित करूंगी। शाम के समय यशोदा मैया ने पहला दीपक यमुना में प्रवाहित किया। उसी समय भगवान कृष्ण वहां आ गए। उन्होंने उस दीपक को डगमगाते हुए यमुना की लहरों में बहते देखा भगवान कृष्ण भी उस दीपक के साथ साथ चल पड़े, जब वह दीपक डूबने लगा तो भगवान ने उस दीपक को यमुना से निकालकर किनारे पर रख दिया। उसी तरह दूसरा तीसरा चौथा दीपक माता यशोदा ने यमुना में प्रवाहित किया तो भगवान कृष्ण ने उन सभी दीपकों को उठाकर किनारे रख दिया। थोड़ी देर बाद जब माता ने बहुत से दीपकों को छोड़ दिया तो उन्होंने देखा कि भगवान कन्हैया सब दीपकों को पकड़कर किनारे रख रहे हैं। ऐसा देखकर माता यशोदा ने कन्हैया से कहा कि तू किस किस को बचाएगा। इस पर भगवान ने कहा कि मेरे पास जो चलकर आएगा उसी को ही मैं बचाऊंगा दूसरे को नहीं। स्वामी जी ने कहा कि इस प्रकार यदि हम भगवान की शरण की ओर जाएं तो भगवान अवश्य ही हमारी रक्षा करेंगे। इससे पूर्व मुख्य अतिथि पिन्टु जुनेजा, विक्की जुनेजा, यशपाल गांधी ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। भगवान दास खुराना ने भजनों से आई हुई संगत को निहाल किया। इस अवसर पर रमेश चुघ प्रधान, हरनाम चुघ, उत्तम आहूजा,ईश्वर लाल रामदेव, किशोर रामदेव, दर्शन रामदेव, कर्म सिंह रामदेव, गोल्डी बांगा, अमर वधवा, सुरेन्द्र जुनेजा, ओमी चुघ, अमन रामदेव, हरनारायण जुनेजा, शक्ति सिंह रेवड़ी, आत्म खुराना, जगदीश जुनेजा, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
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