Friday, July 19, 2024
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थैलेसेमिया पर जागरूकता सेमिनार में पहुंची मालती अरोड़ा

By LALIT SHARMA , in HEALTH Politics , at February 4, 2024 Tags: , , , , ,

कहा-इस बीमारी के प्रति जागरूक होने कि जरुरत

BOL PANIPAT ,4 फरवरी। पानीपत के आर्य कॉलेज में आज थैलेसीमिया पर सेमिनार का आयोजन किया गया। पानीपत थैलेसेमिया वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में फ्री हेल्थ चेकअप कैंप भी लगाया गया। सेमिनार का शुभारंभ मुख्य अतिथि भाजपा की वरिष्ठ महिला नेत्री मालती अरोड़ा, पानीपत थैलेसीमिया वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष विक्रांत महाजन वह कार्यक्रम में मौजूद डॉक्टर्स की टीम ने दीप प्रज्वलित कर किया। सेमिनार में लोगों ने डाक्टरों से सवाल-जवाब भी किए। इस दौरान मुख्य अतिथि मालती अरोड़ा को स्मृतिचिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया।
सेमिनार को संबोधित करते हुए डॉक्टर्स ने बताया कि थैलेसीमिया एक अनुवांशिक रोग है। इस रोग में लाल रक्त कण नहीं बन पाते हैं और जो बन पाते है वो कुछ समय तक ही रहते है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को बार-बार खून चढ़ाना पड़ता है। ये रोग अनुवांशिक होने के कारण पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है। यह रोग काफी कष्टदायक होता है। थैलेसीमिया के रोगियों की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ती जा रही है। वर्तमान में प्रतिवर्ष 10 हजार थैलेसीमिया के मरीज बढ़ रहे है। थैलेसीमिया दो तरह का होता है एक माइनर और दूसरा मेजर। दुनिया की कुल आबादी में 20 फीसदी लोग माइनर थैलेसीमिया से ग्रसित है। लेकिन जांच के अभाव में उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं मिल पाती है। बच्चों में रोग के लक्षण जन्म से 4 या 6 महीने में ही नजर आने लगते हैं। बच्चे की त्वचा और नाखूनों में पीलापन आने लगता है। आंखें और जीभ भी पीली पड़ने लगती है। उसके ऊपरी जबड़े में दोष आ जाता है। दांत उगने में काफी कठिनाइयां होने लगती हैं।
इस दौरान मालती अरोड़ा ने कहा की जिस प्रकार डॉक्टर्स ने हमें इस बीमारी के बारे में बताया की यह आनुवंशिक है, उसके अनुसार हमें जागरूक होने की जरूरत है। जिस प्रकार हम शादी से पूर्व लड़का-लड़की की कुंडली मिलाते है उसी प्रकार हमें शादी से पूर्व थैलेसीमिया का भी टेस्ट कराना चाहिए। जिससे पता चल सके कि कोई इस रोग से तो पीड़ित नहीं है।

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