Sunday, March 3, 2024
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जुबान के धनी, दबंग छवि के मालिक, पानीपत पत्रकारिता के भीष्म पितामह थे पंडित कुलवंत

By LALIT SHARMA , in SOCIAL , at December 20, 2021 Tags: , , ,

-नेत्रदान ने बनाया कुलवंत को ओर महान, मृत्यु के बाद दो नेत्रहीनों के जीवन को कर गए रोशन

BOL PANIPAT : ”उस शख्स को बिछड़ने का सलीका भी नहीं,
जाते हुए खुद को मेरे पास छोड़ गया”
ऐसे ही एक शख्स थे पानीपत की पत्रकारिता के भीष्म पितामह पंडित कुलवंत शर्मा। जिनके द्वारा किए गए काम आज समाज को लाभान्वित कर रहे हैं। उनकी महक आज भी लोगों की सांसो में है। लोगों को जिस दौर में लोगों को पत्रकारिता का अर्थ तक भी सही तरीके से मालूम नहीं था, उस वक्त पंडित कुलवंत शर्मा शहर के चप्पे-चप्पे से समाचार संकलन करते हुए लोगों तक – समाज तक – प्रशासन तक शहर की समस्याएं उठाने के साथ उनका समाधान करवाते थे। 40 साल का लंबा अरसा कुलवंत शर्मा पानीपत पत्रकारिता के न केवल स्तंभ रहे, अपितु नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए प्रेरणा का काम भी करते रहे। 4 साल बीत गए जब उनका साया पानीपत की मीडिया से उठा। लेकिन शायद ही कोई ऐसा दिन – कोई ऐसा वक्त रहा हो जब पानीपत की मीडिया को उनकी जरूरत महसूस ना हुई हो। युवा पीढ़ी के पत्रकारों को उनके मार्गदर्शन की भी लगातार कमी महसूस होती है। दबंग पत्रकारिता की मिसाल कहे जाने वाले कुलवंत शर्मा ने अपनी मेहनत के बूते पत्रकारिता के क्षेत्र में वह मुकाम हासिल किया जो एक कामयाब पत्रकार के लिए एक सुनहरा सपना होता है। 40 साल के लंबे अरसे के दौरान उन्होंने प्रिंट मीडिया – इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और मृत्यु से कुछ समय उपरांत सोशल मीडिया तक में अपने कद्दावर नाम की छाप छोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

यह कहना कदापि गलत नहीं होगा कि पानीपत जिला के लोगों को असली पत्रकारिता के दर्शन करवाने का पूरा श्रेय पंडित कुलवंत शर्मा को जाता है। पानीपत रिफायनरी, थर्मल, एनएफएल इत्यादि की सुरक्षा की चूक, रेलगाड़ियों में अवैध रूप से सामान की बिक्री और पानीपत के कद्दावर विधायक एवं पूर्व मंत्री का स्टिंग ऑपरेशन करने जैसे अनेक ऐसे मामले आज भी लोगों के जहन में है, जिनका जिक्र आज भी काफी लोगों के मुंह से सुना जा सकता है। जिला एवं पुलिस प्रशासन की नजरों से दूर अनेक ऐसे मामले जो सीधे तौर पर जनता के लिए हानिकारक है ऐसे मुद्दों को ढूंढ कर निकालना और उन्हें प्रशासन तक पहुंचाकर अपराधियों को सजा दिलवाना पंडित कुलवंत शर्मा की जिंदगी का एकमात्र उद्देश्य रहा। जिसे उन्होंने मरते दम तक बखूबी निभाया। समाचार की गंभीरता और अपने सूत्रों पर पुख्ता विश्वास का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात हुए समझोता एक्सप्रेस ट्रेन ब्लास्ट मामले की रिपोर्टिंग के लिए जो शख्स सबसे पहले मौके पर पहुंचा वह और कोई नहीं बल्कि पंडित कुलवंत शर्मा ही थे।

स्व0 कुलवंत शर्मा के जीवन को अगर चंद शब्दों में पिरोया जाए तब केवल निष्पक्ष, निडर, सामाजिक, मिलनसार और जनहित के कार्य करवाने में सक्षम व्यक्ति उन्हें लिखा जा सकता है। 20 नवंबर 1958 को अमृतसर में जन्मे कुलवंत शर्मा ने दैनिक कमल नेत्र, करंट न्यूज़, दैनिक पब्लिक एशिया समेत अनेक हिंदी समाचार पत्रों में अपनी लेखनी की छाप छोड़ी। जिस दौर में पंजाब केसरी समाचार पत्र में किसी आम पत्रकार की एंट्री तक नहीं होती थी, उस दौर में पंजाब केसरी प्रबंधन ने कुलवंत शर्मा के कंधे पर जिले की जिम्मेवारी सौंपी थी। प्रिंट मीडिया के साथ ही कुलवंत शर्मा ने उम्र दराज होने के बावजूद भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में जिस अंदाज से अपने हुनर को पेश किया वह काबिले तारीफ है और जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। कुलवंत शर्मा ने चैनल नंबर वन, सेवन सी न्यूज़, ए टू जेड, 4 रियल न्यूज़, खबरें अभी तक, इंडिया न्यूज़ हरियाणा जैसे चैनलों पर अपनी छाप छोड़ते हुए दूसरों से बेहतरीन होने का अपना नमूना पेश किया तो साथ ही युवा वर्ग के लिए एक चैलेंज देने के साथ उनका मार्गदर्शन भी किया। लोगों में उनकी लोकप्रियता अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जो काम प्रशासन या पुलिस नहीं कर पाते थे अथवा लोगों को जिन मामलों में प्रशासन से न्याय नहीं मिल पाता था, उनकी गुहार लगाने के लिए लोग पंडित कुलवंत शर्मा के पास पहुंचते थे। इस बात में कोई अतिशयोक्ति नहीं कि जो भी व्यक्ति मदद की दरकार लेकर कुलवंत शर्मा के पास पहुंचता था उसे हर हालत में न्याय मिलता था, उसके लिए भले ही पंडित कुलवंत शर्मा को किसी भी लेवल तक उनकी आवाज को उठाना हो। ऐसे अनेक रोचक मामले याद करते हुए उनकेे शागिर्द रहे अनेकों पत्रकार जो आज शहर में बेहद बेहतरीन संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर कार्ययरत हैं वह बताते हैं कि लोगों की सहायता के लिए अनेक बार चंडीगढ़ – कालका तक पहुंच जाते थे और जिन अधिकारियों द्वारा लोगों के काम नहीं किए जाते थे अथवा अथवा परेशान किया जाता था, उनके निपटारे के लिए कई बार वरिष्ठ अधिकारियों तक से लड़ पड़ते थे।

केवल पत्रकारिता के क्षेत्र की ही नहीं है अपितु कुलवंत शर्मा ने अब अपने जीवन में जितना सामाजिक कार्य किया शायद ही स्वयं को शहर का प्रमुख समाजसेवी कहने वाले व्यक्ति ने भी किया हो। मामला कोई भी हो-किसी भी ताकतवर से ताकतवर शख्स के खिलाफ हो पंडित कुलवंत शर्मा ने सदा गरीबों और जरूरतमंदों के हक की आवाज को बुलंद करते हुए अपने बूते, प्रशासन के बूते या फिर सरकार के बूते काम को हर बार अंजाम दिलवाने में अहम भूमिका निभाई। पत्रकारों में भी उनकी लोकप्रियता बेहद खास रही। जिसके बूते कुलवंत शर्मा को हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट का तीन बार जिलाध्यक्ष बनने का मौका दिया गया। सर्वसम्मति और बिना चुनाव के तीन बार अध्यक्ष रहे पंडित कुलवंत शर्मा ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन इतनी बखूबी से किया जिसके कायल प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे। 3 साल तक लगातार हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के जिलाध्यक्ष समय-समय पर जब-जब पत्रकारों पर किसी भी प्रकार की समस्या आने पर कुलवंत शर्मा उनके आगे एक मजबूत दीवार के रूप खड़े नजर आए। जिस कारण प्रदेश के ताकतवर मंत्रियों व वरिष्ठ अधिकारियों तक से कई बार उनका टकराव भी देखने को मिला। उनकी दबंग छवि इस प्रकार की थी कि समय-समय पर लोगों के लिए उनका अपराधी तत्वों से भी उनका आमना-सामना भी हुआ। उस समय जब जिले में फाइनेंस के नाम पर लोगों के साथ ठगी के लगातार मामले सामने आ रहे थे, पंडित कुलवंत शर्मा ने लगातार खबरों के प्रकाशन और प्रसारण करके कई फाइनेंसरों के खिलाफ बड़ी कार्यवाही भी करवाई।

पंडित कुलवंत शर्मा ऐसे शख्स जिन्होंने हमेशा संघर्षशील जीवन बिताया उनके पास समस्या लेकर उम्मीद से आए हर व्यक्ति के साथ निस्वार्थ खड़े हो जाना और बड़े-से-बड़े अधिकारी तक उनकी समस्याओं को पहुंचाना और निवारण करवाना उनकी रोजमर्रा की कहानी बन गया था। पानीपत जिले का कोई ऐसा कोना-ऐसा गांव नहीं जहां कुलवंत शर्मा ने किसी-न-किसी व्यक्ति की किसी भी तरह मदद ना की हो। हमेशा लोगों के दुख-दर्द और खबरों को प्राथमिकता देते हुए कभी कुलवंत शर्मा ने अपने स्वास्थ्य की ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। संघर्षशील जीवन बिताते हुए काला पीलिया बीमारी के कारण जीवन-मृत्यु के लंबे संघर्ष के उपरांत उन्हे दिल्ली के एक निजी अस्पताल में दिनांक 21 /12/2017 को प्राण त्याग दिए थे। । मृत्यु की खबर ने पूरे प्रदेश को न केवल अचंभित कर दिया बल्कि गहरे शोक की एक लहर उनसे जुड़े हर व्यक्ति में दौड़ पड़ी। उनसे जुड़ा हर मानस गहरी चिंता में डूब गया। पूरे जिले भर में ही नहीं प्रदेश भर की ब्यूरोक्रेसी और राजनीतिक धुरंधरों में चर्चा का विषय बन गया। उनके अंतिम संस्कार में प्रदेशभर से लोगों की भारी भीड़ पानीपत में उमड़ी थी। क्या आम और क्या खास हर वर्ग के लोग उनके परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। आज भी पत्रकारिता जगत में उनकी कमी को महसूस किया जाता है और युवा पीढ़ी उनके द्वारा किए गए कार्यों का अनुसरण करते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही है।

कुलवंत शर्मा के पुत्र एडवोकेट मनोज शर्मा बताते हैं कि उनके पिता हमेशा समाज के प्रति समर्पित रहे। रात को 2 बजे भी अगर कोई व्यक्ति उन्हें फोन पर अपना दुख-दर्द बताता था तो वह भावुक हो जाते थे और रात को ही मदद के लिए दौड़ पड़ते थे। वह सच में एक ऐसे शख्स थे जिन्होंने जीते जी तो समाज को रोशनी देने का काम किया ही मृत्यु के बाद भी समाज के लिए एक ऐसी मिसाल पेश कर गए। कुलवंत शर्मा ने मृत्यु से 3 साल पहले ही अपने पुत्र मनोज शर्मा को मृत्यु के बाद अपनी नेत्र दान की लिखित में इच्छा सौंप दी थी। मनोज शर्मा ने जन सेवा दल के सेवादारों को बुलाकर अपने पिता की आंखें दान करवाई यानि बेशक कुलवंत शर्मा आज इस संसार में ना हों लेकिन उनकी आंखों से दो व्यक्तियों के अंधकार जीवन को रोशनी मिल गई जो कि आज कुदरत के बनाए इस खूबसूरत संसार का आनंद उठा रहे होंगे।

पुराने समय में भी कुलवंत शर्मा की गिनती काफी एक्टिव पत्रकारों में थी : चंद्रशेखर धरणी

चंडीगढ के वरिष्ठ पत्रकार एवं कुलवंत शर्मा के पुराने निकटतम मित्र चंद्रशेखर धरणी ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि कुलवंत शर्मा में काम के प्रति एक अलग जज्बा था। क्योंकि पुराने समय की पत्रकारिता बेहद कठिन थी। सुविधाओं का अभाव था। बावजूद इसके उस समय भी कुलवंत शर्मा की गिनती काफी एक्टिव पत्रकारों में थी। वर्तमान की पत्रकारिता पुराने समय से बिल्कुुल भिन्न है। लेकिन कुलवंत शर्मा ने पहलेेेे दिन से अंतिम समय तक अपनी अलग पहचान को कायम रखा।

कुलवंत शर्मा संघर्षशील और निडर पत्रकार थे : विनोद पांचाल

हरियाणा पत्रकार संघ के जिला प्रधान एवं वरिष्ठ पत्रकार विनोद पांचाल ने स्वर्गीय पंडित कुलवंत शर्मा बारे चर्चा करते हुए कहा कि वह एक अच्छे और संघर्षशील पत्रकार रहे हैं। हमेशा निडर होकर काम करते रहे। कभी किसी के सामने नहीं झुके और साथ ही उनमें एक अद्भुत शक्ति थी कि वह अपनी बात को बेहतर तरीके से रखने में पूरी तरह से सक्षम थे। उनके द्वारा किए गए कार्यों को पत्रकारिता जगत में आज भी याद किया जाता है। वह एक लाजवाब पत्रकार थे।

इतनी दबंग किस्म की पत्रकारिता किसी और शख्सियत में नजर नहीं आई : अनिल सैनी

हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट जिला अध्यक्ष अनिल सैनी से जब कुलवंत शर्मा बारे चर्चा हुई तो वह भावुक हो गए और उन्होंने बताया कि मुजफ्फरनगर मे सहारा समय के लिए काफी लंबे समय तक काम करने के बाद अपने जिले में काम करने की चाहत से पानीपत आया तो पत्रकारिता क्षेत्र में पहली मुलाकात ही कुलवंत शर्मा के साथ हुई।बातचीत के बाद उनसे काफी प्रभावित हुआ, क्योंकि मैं उनके लिए पूरी तरह से अनजान था, फिर भी उन्होंने पूरी सपोर्ट देने का वायदा किया। 2006 से अंतिम सांस तक मैं उनके साथ जुड़ा रहा। इतनी दबंग किस्म की पत्रकारिता किसी और शख्सियत में नजर नहीं आई। कभी किसी के सामने गलत बात पर नहीं झुके। प्रशासनिक अमले में उनकी पकड़ लाजवाब थी। वह एक अद्भुत मार्गदर्शक थे। उनसे अटूट प्यार मिला।

एक अच्छे गुरु, सच्चे साथी और कुशल मार्गदर्शक थे पंडित कुलवंत : सौरव शर्मा

चंडीगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार सौरव शर्मा ने बताया कि कुलवंत शर्मा यारों के यार थे। पत्रकारिता जगत में पत्रकार ही पत्रकार का दुश्मन है। लेकिन कुलवंत शर्मा दूसरों से भिन्न थे। सौरव शर्मा ने बताया कि लंबे समय तक उनसे जुड़ा रहा। अनेकों संकट आए लेकिन कुलवंत शर्मा दीवार के समान सामने खड़े हो गए। शासन-प्रशासन की बिना परवाह किए हमेशा समाज के हित में कार्य करते रहे। वह एक अच्छे गुरु, सच्चे साथी और कुशल मार्गदर्शक थे। कोई भी ऐसी न्यूज़ जिससे समाज का भला होता हो उसे अवश्य प्रकाशित करते थे। उनके साथ बिताया गया स्वर्णिम समय हमेशा यादों में स्थापित रहेगा।

कुलवंत शर्मा गॉड गिफ्टेड शख्सियत थे : दीपक मिगलानी

कुलवंत शर्मा के साथ लंबे समय तक पत्रकारिता कर चुके दीपक मिगलानी ने बताया कि कुलवंत शर्मा पानीपत पत्रकारिता के सिरमौर थे। किसी को दुखी नहीं देख पाते थे। समय-समय पर उन्होंने पत्रकारिता जगत में नए आयाम स्थापित किए। उनकी लेखनी अद्भुत थी। वह बेहद संघर्षशील थे। सादा जीवन-उच्च विचार वाले कुलवंत शर्मा हमेशा अपने साथियों का हौसला बढ़ाते थे। हरियाणा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के सभी सदस्य कुलवंत शर्मा के जिलाध्यक्ष के कार्यकाल के दौरान अपने को काफी मजबूत और सुरक्षित महसूस करते थे। कुलवंत शर्मा एक गॉड गिफ्टेड शख्सियत थे।

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