Thursday, October 15, 2026
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मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए ठोस आधार जरूरी, झूठी शिकायत करने वालों पर होगी कार्रवाई: उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at October 15, 2026 Tags: , , , , , ,

मतदाता सूची में नाम हटाने की आपत्तियों पर निर्वाचन आयोग सख्त, फॉर्म-7 की संख्या निर्धारित

दावे-आपत्तियों के दौरान एक मतदाता अधिकतम 10 और नियमित अद्यतन में महीने में 5 फॉर्म-7 ही कर सकेगा प्रस्तुत

मतदाता सूची की शुद्धता से नहीं होगा समझौता, फॉर्म-7 आवेदनों का होगा नियमानुसार सत्यापन

BOL PANIPAT , 15 अक्टूबर। उपायुक्त एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने भारत निर्वाचन आयोग का हवाला देते हुए बताया कि भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियों में नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने अथवा मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले फॉर्म-7 आवेदनों की संख्या निर्धारित कर दी है। इस निर्णय का उद्देश्य बिना ठोस आधार के बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज कराने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना और मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाना है।

उपायुक्त ने आयोग का हवाला देते हुए बताया कि निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, दावे एवं आपत्तियों की अवधि के दौरान एक मतदाता अधिकतम 10 फॉर्म-7 आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। वहीं, मतदाता सूचियों के निरंतर अद्यतन की अवधि के दौरान एक मतदाता द्वारा प्रति माह अधिकतम 5 फॉर्म-7 आवेदन प्रस्तुत किए जा सकेंगे। यह सीमा ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से प्रस्तुत किए जाने वाले आवेदनों पर लागू होगी।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि पंजीकरण निर्वाचक नियम, 1960 के नियम 13(2) के अनुसार फॉर्म-7 आवेदन केवल वही व्यक्ति प्रस्तुत कर सकता है, जिसका नाम संबंधित विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज हो। आवेदन में सभी आवश्यक विवरण भरना और निर्धारित स्थान पर आवेदक के स्वयं हस्ताक्षर करना अनिवार्य है। हस्ताक्षर की मुहर को मूल हस्ताक्षर का विकल्प नहीं माना जाएगा।

डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने निर्वाचक पंजीयन अधिकारियों (ईआरओ) को निर्देश दिए हैं कि फॉर्म-7 आवेदनों की जांच के दौरान आवेदक की वास्तविकता और मतदाता सूची में उपलब्ध विवरणों का सत्यापन सुनिश्चित किया जाए। यदि किसी व्यक्ति द्वारा पांच से अधिक मामलों में आपत्तियां दर्ज कराई जाती हैं, तो संबंधित प्रावधानों के अनुसार व्यक्तिगत सत्यापन किया जाना चाहिए।

उपायुक्त ने बताया कि दावे एवं आपत्तियों से संबंधित आवेदन, चाहे वे डाक के माध्यम से प्राप्त हुए हों या किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत किए गए हों, यदि सामूहिक रूप से प्रस्तुत किए जाते हैं, तो उन्हें नियमानुसार स्वीकार नहीं किया जाएगा।
  उपायुक्त ने बताया कि जहां आवश्यक हो, निर्वाचक पंजीयन अधिकारी आपत्तिकर्ता को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत सुनवाई करेंगे और प्रत्येक फॉर्म-7 आवेदन में दर्ज आपत्ति की वैधता की जांच करेंगे। जिस व्यक्ति के नाम पर आपत्ति दर्ज कराई गई है, उसे भी आदेश पारित करने से पहले अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि यदि कोई शिकायत झूठी या मनगढ़ंत पाई जाती है और आवेदक ने जानबूझकर फॉर्म-7 में गलत बयान या घोषणा की है, तो उसके विरुद्ध जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग ने सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन दिशा-निर्देशों की जानकारी संबंधित निर्वाचक पंजीयन अधिकारियों (ईआरओ), सहायक निर्वाचक पंजीयन अधिकारियों (एईआरओ) और अन्य क्षेत्रीय अधिकारियों तक पहुंचाई जाए तथा इनका प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

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