Thursday, April 16, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में वाणिज्य विभाग द्वारा विदेश में पढाई और नौकरी विषय पर सेमिनार का आयोजन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at April 15, 2026 Tags: , , , ,

विदेश जाने से पहले विदेश भेजने वाली एजेंसी की अच्छे से पड़ताल कर ले: सौरभ दुग्गल 

BOL PANIPAT , 15 अप्रैल,

    एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में वाणिज्य विभाग द्वारा विदेश में पढाई और नौकरी विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें बतौर मुख्य वक्ता सौरभ दुग्गल पत्रकार एवं डाटा लीग से जुड़े जागरूक जाओ प्रशिक्षक ने हिस्सा लिया । सेमिनार में वाणिज्य, विज्ञान और कला संकाय के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया । सेमीनार में विदेश जाने के इच्छुक विद्यार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और सावधानियों कि विस्तृत जानकारी दी गई । विदेश में पढ़ाई के लिए सरकारी शिक्षा ऋण योजनाओ कि भी जानकारी विद्यार्थियों को दी । माननीय मेहमान का सवागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने किया । मंच संचालन डॉ दीपा वर्मा ने किया ।

सौरभ दुग्गल ने कहा कि आजकल हर साल विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों की संख्या बढ़ रही है । इस वृद्धि के दो मुख्य कारण हैं । पहला, छात्र अब वैश्विक अध्ययन अवसरों के बारे में अधिक जागरूक हैं । दूसरा, छात्र ऋण की मदद से विदेश में पढ़ाई करना आसान हो गया है । भारत सरकार विदेश में पढ़ाई करने के इच्छुक भारतीय छात्रों का भी समर्थन करती है । इच्छुक छात्र विदेश में पढ़ाई के लिए सरकारी ऋण योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं या बैंकों से शिक्षा ऋण की ब्याज दरों में सहायता प्राप्त कर सकते हैं । विदेश में पढ़ाई के लिए पीएम विद्या लक्ष्मी शिक्षा ऋण, डॉ. अंबेडकर केंद्रीय क्षेत्र योजना, गुजरात सरकार का शिक्षा ऋण, एनबीसीएफडीसी की शिक्षा ऋण योजना पढ़ो परदेश योजना जैसी योजनाएँ मौजूद हैं । आज के दौर में विदेश में पढ़ाई करना सिर्फ विदेशी डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं है बल्कि यह लगातार बदलते हुए विश्व में एक सुनियोजित कदम उठाने जैसा है । वीज़ा नीतियों में बदलाव, बढ़ती लागत और विकसित होते रोज़गार बाज़ार के चलते, हम अक्सर लोगों को यह कहते हुए सुनते है कि विदेश में पढ़ाई करना मुश्किल हो गया है । फिर भी, इन बदलावों के बावजूद, भारतीय छात्र रिकॉर्ड संख्या में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का विकल्प चुन रहे हैं क्योंकि वैश्विक अनुभव, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और दीर्घकालिक करियर के अवसर आज भी बेजोड़ महत्व रखते हैं । ईमाइग्रेट पोर्टल पर जाकर विदेश जाने कि प्रक्रिया, नौकरी इत्यादि के बारे में जानकारी हासिल कर सकते है । इसी तरह मदद पोर्टल पर जाकर हम विदश जाने के अपने सवालों के समाधान जान सकते है । हमें सबसे पहले, अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि को अपनी भविष्य की करियर योजनाओं के साथ संरेखित करना चाहिए । कोर्स के नामों से परे देखें, इस बात पर ध्यान दें कि कार्यक्रम कौन से कौशल प्रदान करता है और यह हमारी दीर्घकालिक योजनाओं में कैसे फिट बैठता है । हर देश में हर अध्ययन क्षेत्र के लिए समान अवसर नहीं होते हैं । इसलिए, हमें अपने कोर्स का चयन ऐसे देश के साथ करना चाहिए जहां उस क्षेत्र में मजबूत शैक्षणिक और औद्योगिक मांग हो, क्यूंकि यह हमारे सीखने और करियर के परिणामों को काफी बेहतर बना सकता है । अध्ययन के बाद काम के विकल्प हमारे अंतरराष्ट्रीय अनुभव को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । हमको यह मूल्यांकन करना चाहिए कि स्नातक होने के बाद हम कितने समय तक रुक सकते हैं, किस प्रकार की नौकरियां उपलब्ध हैं और अंतरराष्ट्रीय नौकरी बाजार में हमारी योग्यता कितनी प्रासंगिक होगी ।

डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि यदि हम विदेश में पढ़ाई करने की योजना बना रहे हैं तो इसमें उत्साह और उलझन अक्सर साथ-साथ चलते हैं । एक पल हम किसी अंतरराष्ट्रीय कैंपस में जीवन की कल्पना कर रहे होते हैं, और अगले ही पल हम सोचने लगते हैं कि शुरुआत कहाँ से करें । यही कारण है कि तैयारी बेहद ज़रूरी है । एक अच्छी शुरुआत हमकों आखिरी समय के तनाव, महंगी गलतियों और छूटे हुए अवसरों से बचा सकती है ।

डॉ दीपा वर्मा ने कहा कि हमें अपनी शैक्षणिक तैयारी का ईमानदारी से आकलन करना चाहिए । हमें अपने शैक्षणिक प्रोफाइल पर बारीकी से नज़र डालनी चाहिए  जिसमें जीपीए, स्ट्रीम की प्रासंगिकता, अध्ययन में अंतराल और हमारे पास मौजूद कोई भी कार्य अनुभव जैसे बिन्दुओं पर गौर करना चाहिए ।

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