पर्यावरण संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता, हर विभाग तय समय में पूरा करे दायित्व: उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ
यमुना प्रदूषण नियंत्रण को लेकर प्रशासन सख्त, ड्रेनवार कार्ययोजना पर तेज हुई निगरानी
ड्रेन नंबर 2, 6 और 8 का साईंटिफिक डाटा तैयार करने के निर्देश, हर गतिविधि की होगी मॉनिटरिंग
यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन सक्रिय, एसटीपी और सीईटीपी पर हुई विस्तृत समीक्षा
BOL PANIPAT , 30 जून। यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने ड्रेनवार कार्ययोजना के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में अपनी गतिविधियां और तेज कर दी हैं। मंगलवार को मंडलायुक्त करनाल की अध्यक्षता में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने भाग लेते हुए जिले में चल रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
वीडियो कॉन्फ्रेंस के उपरांत उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करते हुए कहा कि यमुना नदी को प्रदूषण से मुक्त रखना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने आश्वस्त किया कि मंडलायुक्त द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का जिम्मेदारी, गंभीरता और समयबद्ध तरीके से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। उपायुक्त ने बताया कि इस विषय को लेकर वे स्वयं संबंधित क्षेत्रों का निरीक्षण कर चुके हैं तथा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए जा चुके हैं, ताकि कार्ययोजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
उपायुक्त ने अधिकारियों को विशेष रूप से ड्रेन नंबर-2, ड्रेन नंबर-6 और ड्रेन नंबर-8 का विस्तृत एवं वैज्ञानिक डाटा तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन ड्रेनों में जल प्रवाह (फ्लो) की वास्तविक स्थिति का आकलन कर प्रमाणिक डाटा तैयार किया जाए, जिससे भविष्य की कार्ययोजना अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बन सके। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समय सीमा में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।
बैठक में हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईडीसी) के सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) की वर्तमान स्थिति पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इसके अलावा उपायुक्त ने इसराना क्षेत्र में एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) स्थापित करने के लिए उपयुक्त भूमि की तलाश शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में सीवेज के वैज्ञानिक उपचार के माध्यम से यमुना में प्रदूषण के प्रवाह को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।
उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि, यमुना केवल एक नदी नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है। इसके संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रत्येक विभाग को पूरी जिम्मेदारी, पारदर्शिता और समन्वय के साथ कार्य करना होगा। प्रशासन ड्रेनवार कार्ययोजना के प्रत्येक बिंदु की नियमित निगरानी करेगा और निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करना सुनिश्चित करेगा। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त अंकित चौकसे, एसडीएम इसराना नवदीप नैन, नगराधीश टीनू पोसवाल, जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता करण बहल, सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता सुरेश सैनी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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