बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए मिशन मोड में काम करें अधिकारी: उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ।
1 जनवरी 2027 तक जिले को गंभीर कुपोषण मुक्त जिला बनाने का लक्ष्य, उपायुक्त ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
कुपोषित बच्चों की पहचान से उपचार तक हर स्तर पर सुनिश्चित करें प्रभावी निगरानी
कुपोषण के खिलाफ निर्णायक अभियान चलाकर निर्धारित समय में लक्ष्य हासिल करें विभाग
BOL PANIPAT , 5 नवंबर। जिला को गंभीर तीव्र कुपोषण से मुक्त बनाने के लिए उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने 1 जनवरी 2027 तक का लक्ष्य निर्धारित करते हुए स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को मिशन मोड में कार्य करने के निर्देश दिए हैं। उपायुक्त कहा कि कि बच्चों को कुपोषण से बचाना केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी संबंधित विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रत्येक कुपोषित बच्चे की पहचान, समय पर उपचार और नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि कोई भी बच्चा उपचार से वंचित न रहे।
जिला सचिवालय सभागार में वीरवार को उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ की अध्यक्षता में राज्य सहायता मिशन तथा स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्तीय प्रबंधन संस्थान की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में गंभीर तीव्र कुपोषण और मध्यम तीव्र कुपोषण से प्रभावित बच्चों की पहचान, उपचार एवं प्रबंधन के लिए संचालित प्रायोगिक परियोजना के निष्कर्षों और उपलब्धियों की समीक्षा की गई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि क्षेत्र स्तर पर प्रत्येक बच्चे की स्थिति पर नजर रखी जाए और उपचार के बाद भी उसका नियमित निरीक्षण किया जाए। किसी भी स्तर पर विभागीय तालमेल की कमी के कारण बच्चे को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
उपायुक्त डॉ हरीश ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी आपसी समन्वय से कार्य करें। मुख्य चिकित्सा अधिकारी और चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि 1 जनवरी 2027 तक जिले को गंभीर तीव्र कुपोषण मुक्त बनाने के लक्ष्य को हर हाल में हासिल किया जाए। डॉ. वशिष्ठ ने सिविल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और क्षेत्र स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चिन्हित बच्चों को आवश्यकता के अनुसार एफ-75 और एफ-100 चिकित्सीय पोषण आहार के माध्यम से उपचार उपलब्ध करवाया जाए तथा उनकी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार की नियमित निगरानी की जाए।
उन्होंने राज्य सहायता मिशन, स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्तीय प्रबंधन संस्थान तथा सहभागी विभागों और संस्थानों के प्रतिनिधियों को उनके योगदान के लिए प्रशंसा प्रमाण पत्र भी वितरित किए। बैठक में सभी संबंधित विभागों और संस्थानों ने आपसी समन्वय से कार्य करते हुए निर्धारित समय सीमा में जिले को गंभीर तीव्र कुपोषण मुक्त जिला बनाने का सामूहिक संकल्प लिया गया।
बैठक में संस्थान की संयुक्त निदेशक डॉ. नीरू ने परियोजना की अवधारणा, उद्देश्य और क्रियान्वयन की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बच्चों में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। राज्य सहायता मिशन की क्षेत्र विशेषज्ञ डॉ. अमिता रानी ने परियोजना से जुड़े प्रमुख निष्कर्षों, उपलब्धियों और सुझावों की जानकारी दी। उन्होंने कुपोषित बच्चों की पहचान, अस्पताल में भर्ती करवाने, उपचार तथा नियमित निगरानी की व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए आगामी कार्ययोजना भी प्रस्तुत की। इस मौके पर सीएमओ विजय मलिक , मेडिकल ऑफिसर ज्योति,डॉ रिम्पी, डाइटीसीन ,एम एस डब्लू, धर्मबीर डीपीओ और सीडीपीओ मौजूद रहे।

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