Friday, April 17, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज में भारत संस्कृति यात्रा के अंतर्गत भव्य आयोजन 

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at January 28, 2026 Tags: , , , ,

अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त व तीन बार ग्रैमी अवार्ड के लिए नामित पंडित अजय प्रसन्ना ने बांसुरी वादन से किया मंत्र मुग्ध

राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथक नृत्यांगना संगीता चटर्जी के उत्कृष्ट नृत्य ने सब का मन मोहा

शास्त्रीय काल और संस्कृति के रंगों से सरोबार हुआ पानीपत का वातावरण

संगीत-नृत्य में है जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान : संगीता चटर्जी

देश का युवा देश की संस्कृति से जुड़े, समय की सबसे बड़ी आवश्यकता : पंडित अजय प्रसन्ना

भारत संस्कृति यात्रा शास्त्रीय संगीत-कला से युवाओं को जोड़ने का सशक्त प्रयास : पंडित प्रसोंजीत पोद्दार

BOL PANIPAT : एस.डी. (पीजी) कॉलेज पानीपत में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं हरियाणा कला परिषद के सहयोग से भारत संस्कृति यात्रा का विधिवत और सारगर्भित आगाज हुआ| हरियाणा कला परिषद की ओर से कार्यक्रम में परिषद् के निदेशक नागेंद्र शर्मा ने शिरकत की तथा हरियाणा कला परिषद की ओर से कलाकारों का स्वागत किया| कार्यक्रम में एस.डी. एजुकेशन सोसाइटी के प्रधान अनूप कुमार सोसायटी के सचिव नरेश गोयल, एस.डी कॉलेज के प्रधान दिनेश गोयल, महासचिव महेंद्र अग्रवाल, कोषाध्यक्ष विशाल गोयल तथा प्राचार्य डॉक्टर अनुपम अरोड़ा भी उपस्थित रहे| उन्होंने सभी कलाकारों को अंग वस्त्र व शाल देकर उनका स्वागत सम्मान किया| मंच संचालन प्रोफेसर अनु आहूजा ने किया| डॉक्टर संगीता गुप्ता विभाग अध्यक्ष इतिहास विभाग ने संपूर्ण कार्यक्रम का समन्वय किया| भारत संस्कृति यात्रा यह कार्यक्रम देश-विदेश में 2010 में स्थापित हिंदुस्तान आर्ट एवं म्यूजिक सोसायटी कोलकाता, पश्चिम बंगाल के प्रयास से चल रहा है| इस कड़ी में भारत संस्कृति यात्रा का अब तक यह 574 वां कार्यक्रम है| कार्यक्रम में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त निम्न कलाकारों ने प्रस्तुति दी| 

पंडित अजय प्रसन्ना 

पंडित अजय प्रसन्ना भारत के श्रेष्ठ बांसुरी वादकों में एक प्रतिष्ठित नाम है| इन्होंने बांसुरी वादन की शिक्षा अपने पिता पंडित भोलानाथ से प्राप्त की|  पंडित अजय प्रसन्ना 6 वर्ष की आयु से ही मंचों पर प्रस्तुति दे रहे हैं} पंडित अजय प्रसन्ना तीन बार विश्व के सबसे बड़े ग्रैमी अवार्ड से के लिए नामित हो चुके हैं| उन्होंने अपनी प्रस्तुति के समय के अनुसार शास्त्रीय राग सारंग को बांसुरी वादन से प्रस्तुत किया} पंडित अजय प्रसन्ना के बांसुरी वादन ने ऐसा प्रभाव उत्पन्न किया जैसे भगवान कृष्ण के बांसुरी के स्वर वातावरण में गूंज रहे हो| तबले पर इनका साथ दिया पंडित प्रोसंन्जीत पोद्दार ने|

संगीता चटर्जी 

संगीता चटर्जी लखनऊ घराने से संबंधित राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रतिष्ठित नृत्यांगना है| वह प्रसिद्ध गुरु श्रीमती वासमती मिश्रा की शिष्या है| नृत्य के साथ वह इतिहास विषय एवं पर्यटन विश्व में मास्टर्स है| उनकी दो फिल्में इंटरनेशनल डांस फेस्टिवल में चयनित हो चुकी है| संगीता चटर्जी कत्थक विद्या में तीन नृत्य प्रस्तुत किये – मां दुर्गा स्तुति, शास्त्रीय कत्थक तीन ताल और वर्षा ऋतु आगमन| संगीता चटर्जी के नृत्य ने वातावरण में समा बांध दिया| उन्होंने इन तीन नृत्यों के माध्यम से संबंधित विषयों का चेहरे के भाव, मुद्राओं के साथ भावपूर्ण वर्णन किया| कत्थक नृत्य की भावपूर्ण मुद्राओं और अभिव्यक्ति ने विद्यार्थियों को मंत्र मुग्ध कर दिया| प्रस्तुति के दौरान सभागार अनेक बार तालिया से गूंज उठा|

पंडित प्रोसंन्जीत पोद्दार

कलकत्ता से पधारे पंडित प्रोसंन्जीत पोद्दार भारत के अति वरिष्ठ एवं विशिष्ट तबला वादक है| उन्होंने पंडित अजय प्रसन्ना के साथ जुगलबंदी की और तबले की धमक व मधुर ध्वनियों से दर्शकों का मन स्पंदन किया| पंडित प्रोसंन्जीत पोद्दार पिछले 15 वर्षों से भारतीय संस्कृति यात्रा के माध्यम से स्थान स्थान पर विलुप्त होती जा रही शास्त्रीय कला परंपराओं को पुनर्जीवित करने की लक्ष्य साधना कर रहे हैं| 

पंडित आर. डी. कैले

पंडित आर. डी. कैले शास्त्रीय संगीत गायन के विशेषज्ञ है| ऑल इंडिया रेडियो में ए-ग्रेड कलाकार है| इन्होंने संगीत की शिक्षा उस्ताद लक्ष्मण दास सिंधु से प्राप्त की| देश-विदेश में अनेक मंचों पर प्रस्तुति दे चुके हैं| इन्होंने अपनी मधुर आवाज, सुरों की शुद्धता और भावपूर्ण गायन से सभागार में शास्त्रीय संगीत की अद्भुत अनुभूति कराई| 

पंडित उजिथ उदय कुमार 

पंडित उजिथ उदय कुमार प्रसिद्ध युवा तबला वादक है| दिल्ली घराने से संबंध रखते हैं| उन्हें भारत के उपराष्ट्रपति ने भारत का ध्रुव तारा उपाधि प्रदान की| उन्होंने अपने कलात्मक तबला वादक से पूरे कार्यक्रम को विशेष बना दिया|

कत्थक नृत्यांगना संगीता चटर्जी ने कहा कि नृत्य की कला में महारथ हासिल करने के लिए साधना, धैर्य और गुरु भक्ति का होना नितांत आवश्यक है| जो की आज की दौडती-भागती जिन्दगी में युवाओं में नहीं है| गुरु के बिना कुछ भी संभव नहीं है| आज के युवा को हर चीज तुरंत चाहिए फिर चाहे वह नृत्य हो या अन्य परिणाम| उन्होनें कहा की नृत्य स्वयं में एक योग है और नृत्यकार को किसी योग की जरुरत नहीं होती है| आज का युवा मोबाइल फ़ोन में अपना समय और जवानी बर्बाद कर रहा है और एक बार यह समय बीत गया तो फिर हाथ मलने के सिवाय कुछ भी हाथ नहीं आएगा| उन्होंने युवाओं को नृत्य विधा में रूचि के लिए प्रेरणा दी व मार्गदर्शन किया| उन्होनें अपने सन्देश में कहा की ईश्वर को प्राप्त करने का सबसे सरल और सीधा मार्ग नृत्य से होकर गुजरता है| शास्त्रीय कथक भारत की संस्कृति से जुड़ा हुआ है| ग़ज़ल, तराना और संगीत के फ्यूज़न पर आधारित कत्थक आज के युवाओं को कथक के प्रति आकर्षित करने के लिए किया गया है ताकि कल को वे भी इस नृत्य कला के महत्त्व को दिल में उतार सके| कथक उत्तर भारत की एक नृत्य शैली है| प्राचीन शैली होते हुए इसका महाभारत से एवं मध्य काल में कृष्ण कथा से रिश्ता मिलता है|

पंडित अजय प्रसन्ना ने दर्शकों से बातचीत में कहा कि प्रत्येक मानव को ईश्वर ने संगीत नृत्य कला संबंधी कुछ न कुछ क्षमता प्रदान की है| हम अपनी जीवन की दौड़ धूप में और रुचि के अभाव में अपनी क्षमताओं से अनभिज्ञ रहते हैं| इस प्रकार के कार्यक्रम की प्रस्तुतियों के माध्यम से युवाओं को प्रेरणा देना उनमें उनकी रुचि व क्षमता अनुसार कला से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं| जिसकी अत्यंत आवश्यकता है| 

पंडित प्रोसंन्जीत पोद्दार ने कहा कि वर्तमान में अब भारत सरकार एवं राज्य सरकारें भारतीय कला संस्कृति के क्षेत्र में विशेष सहयोग कर रही है| हमारा समाज अपनी संस्कृति से जुड़े यह राष्ट्र के उज्जवल भविष्य के लिए जरूरी है| 

हरियाणा कला परिषद के निदेशक डॉ. नागेंद्र शर्मा जी ने कहा कि प्रत्येक युवा को अपनी संस्कृति के अनुरूप व रीति रिवाजों का पूरा ज्ञान होना चाहिए| उन्हें पूर्ण भाव, आस्था, ऊर्जा और उत्साह से अपने पर्वों को मनाना चाहिए| उन्हें अपने पर्व और परंपराओं की जानकारी के लिए अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी व अन्य बुजुर्गों के साथ समय व्यतीत करना चाहिए| उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने जन्म दिवस व अन्य विशेष अवसर पर पाश्चात्य तौर तरीकों से नहीं बनना चाहिए| डॉक्टर नागेंद्र शर्मा ने हरियाणा कला परिषद के माध्यम से हरियाणा में भारत की शास्त्रीय कलाओं के प्रति समाज व  युवा में रुचि व जागृति हो, ऐसे प्रयासों के लिए प्रतिबद्धता को दोहराया|

इस अवसर पर श्री एस.डी. एजुकेशन सोसायटी के प्रधान अनूप कुमार  ने कहा की नृत्य का सीधा सम्बन्ध ईश्वर से है और यह हमारी आत्मा को परमात्मा से मिलाने का सबसे श्रेष्ठ साधन है| इस सबके बावजूद भारत की इस समृद्ध परंपरा का लुप्त होना हमारे लिए चिंता का विषय है| परन्तु आज के महागुरुओं के प्रदर्शन को देखकर उन्हें इस बात का विशवास हो चला है की ऐसे कलाकारों के होते हुए हमें ज्यादा भी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है| इनके नृत्य ने साबित किया है की ये कलाकार सच्चे रूप में भारत की संस्कृति के ध्वजारोही है| 

इस अवसर पर श्री एस.डी. एजुकेशन सोसायटी के सचिव नरेश गोयल ने कहा की हमारी संस्कृति में नृत्यकला का प्रादुर्भाव मंदिरों में ही हुआ है| इसका विकास एक उपासना माध्यम के रूप में हुआ है| नृत्य के माध्यम से ही ईश्‍वर प्राप्ति संभव है| नृत्य की विविध मुद्राओं से नवरस (श्रृंगार, वीर, हास्य, करुण, रौद्र, भयानक, वीभत्स, अद्भूत और शांति) की ही नहीं, अपितु आध्यात्मिक शक्ति, चैतन्य, आनंद और शांति की अनुभूति भी होती है| नृत्य में डूबा कलाकार किस दुनिया में होता है इसे आम आदमी तो समझ भी नहीं सकता है| वर्तमान में मोबाइल में डूबे युवा क्या जाने आध्यात्म और परमात्मा के उदगारों को| इन्हें अगर महसूस करना है तो हमें पश्चिम के पीछे भागना छोड़कर वापिस अपने ज्ञान और कला में लौटना होगा| कला से जुड़े इंसान के लिए फिर कोई कार्य असाध्य नहीं है|

अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकारों का स्वागत करते हुए एसडी पीजी कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल ने कहा की पाश्चात्य गीत हो चाहे शास्त्रीय- हर प्रकार के संगीत में संतूर का प्रयोग होता है| उन्होनें कहा की नृत्य एवं वाद्य यंत्रों का बेजोड संगम उन्हें अपने सम्पूर्ण जीवन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन लगा है| औद्योगिक नगरी होने के बावजूद जिस स्तर के कार्यक्रम को आयोजित करने का गवाह यह शहर बना है वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल है| इन कलाकारों के अथक प्रयासो और हुनर की जितनी तारीफ़ की जाए वह कम है| भारतीय संस्कृति अब सुरक्षित हाथों में है|

इस अवसर पर कॉलेज के सभी टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ सदस्यों के साथ-साथ शहर के कला और नृत्य प्रेमियों ने उच्च कोटि के प्रदर्शन का भरपूर आनंद लिया| 

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