सेवा सिमरन के साथ-साथ जीवन में विनम्रता का होना भी आवश्यक : स्वामी ज्ञानानंद जी
BOL PANIPAT : (12 फरवरी) श्री प्रेम मन्दिर पानीपत का 102वाँ वार्षिक सम्मेलन परम पूज्य श्री श्री 1008 श्री मदन मोहन जी हरमिलापी महाराज परमाध्यक्ष श्री हरमिलाप मिशन हरिद्वार की अध्यक्षता में एवं श्री प्रेम मन्दिर पानीपत की परमाध्यक्षा परम पूज्या श्री श्री 108 श्री कान्ता देवी जी महाराज के आशीर्वाद संपन्न हुआ। आज प्रातः श्री रामचरितमानस के पाठ के विश्राम के साथ हवन किया गया। सत्संग में राधेश्याम रामायणी जी ने जप महिमा बताते हुए कहा कि राम से बड़ा राम का नाम। परम पूज्य काका हरिओम जी ने सेवा सत्संग की महिमा में इस बात पर विशेष जोर दिया कि केवल सुनने या पढ़ने तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि उसको जीवन में उतारने से लाभ होता है। रोगी को केवल डाक्टर की सलाह से लाभ नहीं होता जब तक वह दवाई का ढंग से सेवन नहीं करता। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी ने कहा कि सेवा सिमरन के साथ-साथ जीवन में विनम्रता का होना भी आवश्यक है। यदि अभिमान आ गया तो सब कुछ निष्फल है। जगद्गुरू शंकराचार्य जी ने कहा कि परम पूज्य मदन मोहन जी मौन रहकर भी बहुत कुछ कह देते हैं। उनकी नम्रता व सादा जीवन शैली ही एक बहुत बड़ा सन्देश व उपदेश है। पानीपत शहर के विधायक श्री प्रमोद विज ने अपने पारिवारिक तथा धर्म के प्रति आस्था का परिचय दिया। उन्होंने अपने विचार रखते हुए सन्तों से प्रार्थन की कि सेवो कार्य में कभी भी किसी प्रकार का अभिमान न आए। आपके मार्गदर्शन में हम समाज के कार्य करते रहें। आए हुए सभी संतों का पानीपत पधारने पर धन्यवाद किया गया।
सत्संग उपरान्त विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया जिसमें बाहर से आये भक्तों के साथ पानीपत की जनता ने भी प्रसाद प्राप्त कर आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया। श्री प्रेम मन्दिर (लैय्या) ट्रस्ट पानीपत ने सभी संस्थाओं के सहयोग पर आभार व्यक्त किया। ट्रस्ट द्वारा पुलिस अधीक्षक शशांक सावन एवं बिजली विभाग के सहयोग के लिए प्रशंसा की गई। इस अवसर पर हरीश बजाज, चरणजीत रत्रा, परमवीर ढींगड़ा, उत्तम चन्द भागवत, गौतम, प्रवीन सेठी, शाम लाल, शाम सुन्दर बवेजा, राजीव बजाज, जगदीश लाल, शशी लूथरा, अशोक हरमिलापी, रमेश कुमार माटा, सचिन मिगलानी, गौतम दुआ, सोनू भारती, चन्द्रभान वर्मा, रमेश कुमार असीजा आदि उपस्थित थे।

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