अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले 12 पार्षदों को ज्योति शर्मा ने बताया भ्रष्टाचारी. पार्षद बोले जिला परिषद बन गई है ज्योति शर्मा की निजी कोर्ट.
BOL PANIPAT : पानीपत में जिला परिषद की चेयरपर्सन ज्योति शर्मा और पार्षदों के बीच मतभेद इतने ज्यादा हो गए कि अब ज्योति शर्मा व 12 पार्षद राजनीति की जंग में आमने-सामने आ गए हैं। दोनों ओर से आज पत्रकार वार्ता की गयी। चेयरपर्सन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले 12 पार्षदों को ज्योति शर्मा ने पत्रकार वार्ता कर भ्रष्टाचारी बताया है। जबकि उन्हीं पार्षदों ने ज्योति शर्मा पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए हैं। जिसमें पिछली सरकार में हुए कामों के बिल अब पास करवाए जाने के गंभीर आरोप जड़े हैं। राजनीतिक द्वन्द के दोनों पक्ष बीजेपी से हैं। लेकिन दोनों एक दुसरे के खिलाफ मुखर हो गए हैं।
प्रेसवार्ता में ज्योति शर्मा ने कहा कि इस बारे में कल मेरे घर चिट्ठी आने के बाद पता लगा कि विपक्ष के कुछ पार्षदों ने मेरे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दिया है। । भाजपा जिला परिषद चेयरमैन होने के नाते ये बताना चाहती हूं कि 9 फरवरी को इलेक्शन की डेट दी गई है और अविश्वास प्रस्ताव देने वालों को बहुमत साबित करना होगा क्योंकि जो अविश्वास प्रस्ताव देता है वो ही बहुमत साबित करेगा।

उन्होंने कहा कि मैंने पार्टी की नीतियों के अनुसार सभी वार्ड में एक समान कार्य करवाए हैं । पहले की जिला परिषद कार्यकारिणी एक काम को 4-4 बार करवाती थी। अब, हमारी पार्टी ने इस घोटाले को रोका है, इसलिए ये अविश्वास प्रस्ताव आया है। उनके साथ प्रेस वार्ता में उनके पति प्रदीप शर्मा, वार्ड 8 चुलकाना से पार्षद सुरेंद्र छौक्कर, वार्ड 12 से पार्षद नारायण दत्त शर्मा भी मौजूद रहे। जिला चेयरपर्सन ज्योति शर्मा ने कहा कि 24 जनवरी को मेरा कार्यकाल का एक साल पूरा होगा। मैं अविश्वास का स्वागत करती हूं। मुझे इसे स्वीकार करने में कोई हेजीटेशन नहीं है। मैं अपनी ईमानदार सरकार के लिए इस कुर्सी को कुर्बान करने के लिए तैयार हूं। जब भी संगठन उन्हें कहेगा कि वह इस पद के लायक नहीं है, वे तभी कुर्सी छोड़ देंगी। अभी 6 दिन पहले भी विकास कार्यों के लिए 3 करोड़ के टेंडर लगवाए हैं। उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव लेन वाले भ्रष्टाचारी विपक्ष के पार्षद अपना बहुमत साबित करते हैं, तो इस कुर्सी को बे-झिझक छोड़ दूंगी। मैंने आपने कार्यकाल में अभी तक बिना भेदभाव के सभी वार्डों में सम्मान काम करवाए हैं।
वार्ड 13 पार्षद काजल देशवाल के पति संदीप भटरा ने कहा कि हम पार्टी विशेष की बात नहीं कर रहे। पार्टी वालों को बताना या जताना नहीं पड़ता है। चेयरमैन ने कहा कि मुझसे भ्रष्टाचारी काम करवा रहे थे। क्या सभी 12 पार्षद भ्रष्टाचारी है। ये सभी वे पार्षद बैठे है, जिन्होंने ज्योति को चुना था। धीरे-धीरे हमें अपनी गलती का पता लगा। सभी एकजुट हुए। कोई भी भ्रष्टाचारी नहीं है। काम सिर्फ चेयरपर्सन या वार्ड 12 के पार्षद नारायण दत्त के वार्ड में हो रहे हैं। अविश्वास प्रस्ताव में 12 पार्षद साथ है।

हम सभी ने मजबूत होकर, एकजुट होकर ये प्रस्ताव दिया है। जनता के काम करवाने के लिए ये प्रस्ताव दिया है। अविश्वास प्रस्ताव लाने की स्थिति ज्योति बनाई है। मीटिंग में जो भी काम दिए, सभी ने हमेशा उसका समर्थन किया है। उन्होंने अपने निजी ठेकेदार लगाए हैं। ये नाम की चेयरमैन है, जबकि हकीकत ये है कि जिला परिषद ज्योति शर्मा की निजी कोर्ट बन गई है। हम उसके बारे में ज्यादा इसलिए नहीं बोल सकते, क्योंकि वह हमारी पार्टी की है। वह बीजेपी में अपने निजी स्वार्थ के लिए आई थी।
वो पद की गरिमा भूलकर अपने निजी स्वार्थ के लिए काम कर रही है। पूरा सदन उससे तंग आ चुका है। उसके निजी चक्रव्यूह घूम रहा है। जिससे पार्टी की छवि खराब हो रही है। अगर, वह सही होती तो उसके साथ पार्टी के नेता साथ होते। पार्टी की मोहर को उसने अपने निजी स्वार्थ के लिए प्रयोग किया है।
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान वार्ड 11 से पार्षद ममता देवी के ससुर दयाराम ने कहा कि वे बीजेपी के पुराने कार्यकर्ता हैं। बीजेपी का कार्यकर्ता होने के बाद भी हमारे काम नहीं हो रहे हैं। जब हमने ज्योति शर्मा को चेयरमैन बनाया, तो लगा था कि हमारे काम करवाएगी। लेकिन हमारे वार्ड में कुल सवा 3 लाख के ही काम हुए हैं। जबकि हमारे साथ वाले वार्ड 12 में करीब 53 लाख का काम हो गया।
दयाराम ने जातिवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि वार्ड 12 में पार्षद ब्राह्मण है, इसलिए वहां काम हुए हैं। इन्हीं सब बातों को देखते हुए हमने अविश्वास प्रस्ताव दिया है। अगर हम विपक्ष थे, तो हम उसके साथ ही थे। उन्होंने एक कहावत के साथ ज्योति शर्मा पर कटाक्ष किया कि चारा भैंस को डालेंगे तो दूध गाय कैसे देगी। अगर, चेयरपर्सन ज्योति को चुना है, तो काम भी तो वहीं करवाएगी।
वार्ड 17 से पार्षद जितेंद्र कुमार ने बताया कि उनके अंतर्गत 14 गांव आते हैं। उनके किसी एक गांव में लाइट तक नहीं लगी है। उनके पास ऐसी ऑडियो भी है, जिसमें चेयरमैन ज्योति शर्मा कमिशन तक की बात कर रहे हैं। लेकिन, हम इस बारे में ज्यादा नहीं बोलेंगे, क्योंकि ये पार्टी पर सवाल उठता है।
उन्होंने कहा कि चेयरपर्सन सिर्फ वहीं काम करती है, जिसमें मोटा मुनाफा होता है जैसे कि पत्थर लगवाना काम इसमें शामिल हैं। इसकी कीमत 70 हजार रुपए है, जबकि बिल 2 लाख रुपए तक का पास होता है। इसके अलावा, पिछली सरकार में हुए अनेकों कामों के बिल इस कार्यकाल में पास हुए हैं। इस तरह के कामों की भी लंबी ही लिस्ट है। चुने गए सभी पार्षद अपने काम के लिए बार-बार लेटर और रिमाइंडर देते हैं, लेकिन चेयरपर्सन उनका जवाब तक नहीं देते हैं।
वार्ड 1 से आकाश पोरिया ने कहा कि 4 माह से कोई मीटिंग भी नहीं हुई है। जबकि हर दो माह में हाउस मीटिंग होनी चाहिए। पार्षदों ने जो भी प्रस्ताव दिए है, उन पर काम नहीं हुआ है। क्षेत्र में साइन बोर्ड लगाने के लिए कहा, वे नहीं लगे।

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