डीएसआर विधि से धान लगाने पर 20 से 25 प्रतिशत पानी की बचत व भूमि की उपजाऊ शक्ति में इजाफा होता है: डा0 वजीर सिंह
BOL PANIPAT , 11 मई। कृषि तथा किसान कल्याण विभाग, पानीपत के उप निदेशक डा0 वजीर सिंह के आदेशानुसार हरियाणा सरकार की जल संरक्षण एवं भूमिगत जल स्तर को सुधारने की दिशा में चलाई जा रही स्कीम के अंतर्गत धान की सीधी बिजाई (डीएसआर) पर बुधवार 11 मई को पानीपत के कृषि खण्डों के विभिन्न गांवों में किसान जागरूकता शिविर का आयोजन हुआ, जिसमें कृषि विज्ञान केन्द्र, उझा के कृषि वैज्ञानिक डा0 राजबीर गर्ग, डा0 सतपाल, डा0 मोहित, डा0 राजेश, डा0 सुनील ने कृषि तथा किसान कल्याण विभाग के कृषि अधिकारियों के साथ मिलकर अपने-अपने अनुभव किसानों के साथ साझा किए।
कृषि तथा किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डा0 वजीर सिह ने बताया कि धान की सीधी बिजाई वो तरीको से होती हैं। पहले तो बिना पलेवा करे व दूसरी पलेवा करके, जब खेत बदलर आ जाये। धान के बीज उपचारित करके डीएसआर मशीन द्वारा खेत में बुवाई की जाती है। बिजाई के 72 घंटे के अंदर खरपतवार नाशक दवा का प्रयोग किया जाता है। खेत में सिंचाई 7-10 दिनो के बीच जरूरत पडने पर की जाती है। इस प्रकार से हम लगभग 20-25 प्रतिशत पानी की बचत कर सकते है। रोपित व धान की बजाए, सीधी बिजाई से ज्यादा लाभ ले सकते है। इस कड़ी में गाँव निम्बरी, उरलाना कला डाडौला, बुडशाम, भोडवाल माजरी के किसानों को धान की सीधी बिजाई के फायदे विस्तार पूर्वक बताए गए। किसानों को बताया गया कि डीएसआर विधि से धान लगाने पर 20 से 25 प्रतिशत पानी की बचत व भूमि की उपजाऊ शक्ति में इजाफा होता है। किसान को विभाग द्वारा चार हजार रुपये प्रति एकड़ इस विधि द्वारा बुवाई करने पर लाभ दिया जाता है। डीएसआर मशीन की खरीद पर चालीस हजार रुपये अनुदान राशि किसानों को दी जा रही है। इसके अलावा धान की सीधी बिजाई पानी की बचत के साथ-साथ कम लागत में ज्यादा मुनाफा और वातावरण को प्रदूषित होने से बचाती है।
मेरा पानी-मेरी विरासत: (एम.पी.एम.वी)
उप निदेशक डा0 वजीर सिंह ने भूमि की उर्वरा शक्ति बरकरार रखने के लिए व फसल चक्र अपनाने पर जोर देते हुए किसानों से आह्वान किया कि जल संरक्षण सहित भूमिगत जल स्तर को सुधारने की दिशा में हरियाणा सरकार द्वारा अहम कदम उठाते हुए धान की फसल नहीं लगाने वाले किसानों को सात हजार रुपये प्रति एकड़ दिया जा रहा है। मेरा पानी-मेरी विरासत (एमपीएमवी) योजना के तहत दिये जाने वाले अनुदान का लाभ लेने के लिए संबन्धित किसान को पोर्टल फसलडॉटहरियाणाडॉटजीओवीडॉटइन पर पंजीकरण करवाना होगा। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के पास खेती के लिए पानी पर्याप्त नही है, उन किसानो को धान की फसल से हटकर मक्की, कपास, खरीफ दाल (अरहर, मूंग, मोठ, उड़द, ग्वार, सोयाबीन ) तिलहन फसल (तिल, मूंगफली, अरंडी आदि) या बागवानी की फसल की खेती करनी चाहिए व चारा आदि कि फसल लगानी चाहिए ताकि वो ज्यादा से ज्यादा मुनाफा ले सकें।
उन्होंने कहा कि अब अनुदान सीधे उनके खाते में आएगा। जिसके लिए अब पोर्टल पर पंजीकरण शुरू हो चुका है व पहले आओ पहले पाओ कि नीति पर आधारित है जिन किसानों ने पिछले साल खरीफ (2022-23) सीजन में धान लगाया था और इस वर्ष खरीफ सीजन में अगर वे अपने खेत को खाली रखते है या अन्य फसलें लगाते है तो भी उसको अनुदान दिया जाएगा। तो भी उनको एमपीएमवी स्कीम का लाभ दिया जाएगा। एमपीएमवी पोर्टल के लिए सरकार ने विभागीय कमेटी बनाई है, जो की किसान के खेत पर जाकर फसल का निरीक्षण करेगी।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष 2023-24(खरीफ) में जिला-पानीपत के लिए एमपीएमवी स्कीम के अन्र्तगत मक्की-280 एकड़, कपास-55 एकड़, खरीफ दलहन- 380 एकड़, चारा-1850 एकड, व खरीफ तिलहन- 25 एकड़, बागवानी की कृषि- 60 एकड़, सब्जीया तथा बाग- 1550 एकड के लक्ष्य दिये है।

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