युवाओं को इतिहास, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम की अमर गाथाओं से जोडऩे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती प्रदर्शनी: उपायुक्त डॉ विरेंदर कुमार दहिया
वंदे मातरम् के 150 गौरवशाली वर्षों पर विशेष प्रदर्शनी, देशभक्ति की भावना से सराबोर हुआ जिला सचिवालय
चित्रों, पोस्टरों और दुर्लभ दस्तावेजों के माध्यम से
ऐतिहासिक क्षणों की झलकियां प्रस्तुत करती है प्रदर्शनी
जिला सचिवालय में 14 नवंबर तक आम नागरिक के लिए खुली रहेगी प्रदर्शनी
BOL PANIPAT, 12 नवंबर। भारत माता की वंदना का प्रतीक राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम जब वातावरण में गूंजता है, तो हर भारतीय का हृदय देशभक्ति से ओत-प्रोत हो उठता है। इस राष्ट्रीय भावना को सजीव करने के उद्देश्य से जिला सचिवालय के ग्राउंड फ्लोर पर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा एक विशेष प्रदर्शनी लगाई गई है, जो वंदे मातरम् के गौरवमयी 150 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा को दर्शाती है।
उपायुक्त डॉ दहिया ने बताया कि प्रदर्शनी में लगे चित्रों, पांडुलिपियों, और ऐतिहासिक दस्तावेजों को बारीकी से देखा जा सकता है। उपायुक्त ने बताया कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की अभिव्यक्ति है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी युवाओं को अपने इतिहास, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम की अमर गाथाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने बताया कि यह प्रदर्शनी 14 नवंबर तक आम जनता के लिए खुली रहेगी। नागरिक प्रतिदिन सुबह 9 बजे से 5 बजे तक सचिवालय आकर प्रदर्शनी का अवलोकन कर सकते हैं।
डॉ. दहिया ने बताया कि प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य लोगों को वंदे मातरम् के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रभक्ति से जुड़े महत्व के बारे में जानकारी देना है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में वंदे मातरम् की मूल पांडुलिपि की प्रतिकृति, स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा गाए गए संस्करणों के ऑडियो, और इसके प्रकाशन से जुड़े ऐतिहासिक क्षणों की झलकियां प्रस्तुत की गई हैं। चित्रों, पोस्टरों और दुर्लभ दस्तावेजों के माध्यम से यह दिखाया गया है कि किस प्रकार यह गीत अंग्रेज़ी शासन के खिलाफ जनता के मन में प्रेरणा का स्रोत बना।
जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ. सुनील बसताडा ने बताया कि जिला सचिवालय में लगाई गई इस प्रदर्शनी का आकर्षण इस कदर है कि रोजाना दो दर्जन से अधिक नागरिक इसका अवलोकन कर रहे हैं। लोग बड़े उत्साह से राष्ट्रीय गीत की रचना, उसके लेखक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, तथा स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस गीत के प्रभाव से जुड़ी जानकारियां पढ़ते हैं। गौरतलब है कि इस प्रदर्शनी का अवलोकन 7 नवंबर को हरियाणा के शिक्षा मंत्री श्री महिपाल ढांडा ने किया था। प्रदर्शनी देखने पहुंचे कोच नरेंद्र मलिक, आकाश मलिक, पहलवान सिकंदर, बिजनेसमैन मुकेश कौशिक और सीएससी सुरेश ने इसे एक प्रेरणादायक अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी सांस्कृतिक पहले न केवल हमें हमारे गौरवशाली अतीत से जोड़ती हैं, बल्कि राष्ट्रप्रेम की भावना को भी मजबूत करती हैं।
स्कूली छात्र-छात्राओं ने भी प्रदर्शनी में रुचि दिखाते हुए वंदे मातरम् के ऐतिहासिक संदर्भों को गहराई से समझने की कोशिश की। मजेदार बात यह है कि प्रदर्शनी के अंत में प्रदर्शित पंक्तियां सुजलां सुफलां मलयज शीतलाम आगंतुकों के मन में भारत माता के प्रति समर्पण और गर्व की भावना को जागृत कर देती हैं। ध्यान देने योग्य बात यह है कि प्रदर्शनी वास्तव में स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम् के योगदान को पुनर्जीवित करती है और हर दर्शक को यह स्मरण कराती है कि भारत की पहचान उसकी संस्कृति, एकता और देशभक्ति में निहित है।

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