Monday, June 1, 2026
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181 के तहत 7829 महिलाओं की समस्याओं का समाधान : मंत्री कमलेश ढांडा

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at June 28, 2022 Tags: , , , , ,

BOL PANIPAT , 28 जून। हरियाणा की महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री कमलेश ढांडा ने मंगलवार को पानीपत में महिला एवं बाल विकास क्षेत्र में पिछले आठ साल में हासिल की गई उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की समीक्षा के लिए आयोजित सब जोनल बैठक में बोलते हुए कहा कि भारत के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक इतिहास में बडे बदलाव के लिए पानीपत मशहूर रहा है। वर्ष 2014 के मध्य देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसेवक के तौर पर अपना दायित्व संभाला था। उसके बाद से देश में आधी आबादी के प्रति आमजन का नजरिया बदलने की शुरूआत हुई। यह ऐसे दौर की शुरूआत थी, जिसमें महिला सषक्तिकरण से लेकर बच्चों के सम्पूर्ण विकास की दिशा में कदम उठाए जाने थे।

केंद्र में प्रधानमंत्री  के कुशल मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा तमाम पहलुओं पर ध्यान देने की जो पहल शुरू की गई थी, उसके परिणाम बीते आठ साल के दौरान हमारे सामने आए हैं। जिसके लिए उन्होंने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करतेे हुए कहा कि उसी संकल्प को मजबूती से आगे बढाने का काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव में जब देश अगले 25 सालों के लिए अपने लक्ष्य निर्धारित कर रहा है। उस समय में केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी महिला और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को लेकर लगातार बैठकें कर रही हैं। बीते चार जून से देश में अलग-अलग स्थानों पर राज्यों के समूह बनाकर जोनल और सब जोनल बैठकों के माध्यम से न केवल पूर्व की उपलब्धियों पर चर्चा हो रही है, बल्कि भविष्य की तैयारियों पर भी मंथन हो रहा है। हरियाणा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष  तौर पर शुक्रगुजार है। उनके हाथों महिला एवं बाल विकास क्षेत्र में बदलाव की मुहिम पानीपत से ही शुरू हुई थी। 22 जनवरी 2015 को मोदी ने बेटियों को कोख में मारने से बचाने के लिए बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान को शुरू किया था। आज हरियाणा ने इस अभियान में देश के सामने मिसाल पेश की है। वर्श 2011 की जनगणना के अनुसार हरियाणा में जन्म के समय लिंग अनुपात 830 था, जो आज बढकर 920 हो गया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग के साथ सामाजिक-धार्मिक संगठनों का इस बदलाव में विशेष योगदान रहा है।

उन्होंने कहा कि पीसी-पीएनडीटी और एमपीटी एक्ट का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती करते हुए हमने 1020 एफआईआर दर्ज करने का काम किया है। वर्ष 2017 से प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिला, दूध पिलाने वाली माता से लेकर नवजात बच्चे के स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी निभाते हुए पहले बच्चे को कवर करके तीन किश्त में 5000 रूपए की राशि देना शुरू किया था। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वित्तमंत्री के नाते वर्ष 2022-23 का जो बजट पेश किया, उसमें उन्होंने दूसरे बच्चे को भी इस योजना के माध्यम से कवर करने का ऐलान किया है। प्रदेश में वन स्टॉप सेंटर (सखी) के माध्यम से पीडित महिला को चिकित्सा, परामर्श, सुरक्षा, पुलिस सहायता, कानूनी सलाह से लेकर आवासीय सुविधाएं दी जा रही हैं। अब तक 20 हजार 969 केसों का निपटारा किया जा चुका है।

181 के तहत 7829 महिलाओं की समस्याओं का समाधान

महिला हेल्पलाइन 181 के माध्यम से अब तक 7 हजार 829 महिलाओं की समस्याओं का निवारण किया गया है। बच्चों के पोषण में सुधार लाने के लिए प्रधानमंत्री पोषण अभियान महत्वपूर्ण कडी साबित हो रहा है। हरियाणा ने बच्चों के साथ-साथ महिलाओं, किशोरियों के पोषण को सुधारने में केंद्रीय योजना में अच्छा काम करके दिखाया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री दूध उपहार योजना शुरू की, जिसके माध्यम से प्रदेश में 9 लाख बच्चों और 3 लाख से अधिक महिलाओं को पौष्टिक व छह प्रकार के स्वाद का दूध उपलब्ध करवाया जा रहा है।  पोषण वाटिका की बात करूं तो प्रदेश में बीते दो साल में 4200 पोषण वाटिकाएं स्थापित की जा चुकी हैं। पोशण वाटिका में औषधीय, फलदार पौधे, हरी सब्जियां उगाई जा रही हैं। इन्हें आंगनवाडी केंद्र पर आने वाली गर्भवती महिलाओं, दूध पिलाने वाली माताओं और बच्चों के परिजन को दिया जाता है, ताकि उनके पोषण स्तर में बढोतरी की जा सके। प्रदेश में बच्चों का पूरा डेटा पोषण ट्रैकर ऐप पर अपलोड किया जा रहा है। सरकार द्वारा आंगनवाडी वर्करों को स्मार्टफोन देने के लिए प्रक्रिया जल्द पूरी की जा रही है, ताकि सभी बच्चों की अपडेट जानकारी केंद्र-प्रदेश सरकार के पास उपलब्ध हो और उनके स्वास्थ्य की निगरानी की जा सके।

प्रदेश की महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री कमलेश ढांडा ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रदेश में हरिहर योजना चलाई है। इस योजना में मां-बाप द्वारा त्याग दिए गए बच्चों को कवर करते हुए उनके सामाजिक, आर्थिक, शिक्षा संरक्षण की जिम्मेदारी सरकार द्वारा ली गई है। अब तक पांच बच्चे इस योजना के तहत पात्र पाए जा चुके हैं। कोरोना महामारी के दौरान बहुत से बच्चों के अभिभावकों की मृत्यु हो गई। हरियाणा सरकार ने मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के माध्यम से ऐसे बच्चों को कवर किया और आज 93 बच्चों को उनके आवासीय, शिक्षा व अन्य जरूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी को सरकार द्वारा निभाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोराना महामारी में मां-बाप गंवा चुके बच्चों के लिए 29 मई 2021 को पीएम केयर्स फार चिल्ड्रन योजना शुरू की थी। इसमें इसी साल 30 मई को राष्ट्रीय स्तर पर हुए आयोजन के माध्यम से इन बच्चों को 10 लाख रूपए राशि का बीमा व आयुष्मान भारत योजना जैसे लाभ के दायरे में लाने का कदम उठाया गया है। प्रदेश में 79 चाइल्ड केयर संस्थान सरकारी, गैर सरकारी व निजी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे हैं। इसमें वर्र्ष 2013 से अब तक 489 बच्चों को गोद दिया गया है।  कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन षोशण से बचाव व उनकी गरिमा के साथ काम करने के अधिकार के लिए सभी सरकारी विभागों, बोर्ड, निगमों में आंतरिक षिकायत समितियों का गठन किया जा चुका है। घरेलू हिंसा महिला संरक्षण अधिनियम 2005 को सख्ती से लागू किया जा रहा है, वहीं बाल विवाह प्रतिशेध अधिनियम 2006 के तहत संरक्षण एवं प्रतिशेध अधिकारी नियुक्त किए जा चुके हैं। यही नहीं, कामकाजी महिलाओं को किफायती दर पर सुरक्षित आवास उपलब्ध करवाने के लिए आठ कामकाजी महिला आवास चलाए जा रहे हैं। इसी साल गुरूग्राम, फरीदाबाद और पंचकूला में महिला आवास बनाने की भी मंजूरी मिली है। इससे कामकाजी महिलाओं को बहुत फायदा होगा।

उन्होंने कहा कि सरकार महिला से लेकर बालक के प्रति जितना गंभीर होकर जिम्मेदारी निभा रही है, उतना पहले कभी नहीं निभाया गया। मैं निजी तौर पर मानती हूं कि देश की इस 67 प्रतिषत आबादी को संरक्षण देने की मजबूत नींव रखी जा चुकी है। अब हम सभी को मिलकर महिलाओं और बच्चों के अस्तित्व, स्वास्थ्य, शिक्षा, आर्थिक सषक्तिकरण व मान-सम्मान को बढाने का काम करना है। इससे राष्ट्र भी प्रगति पथ पर बढेगा। उन्होंने सभी से अपील की कि केंद्र-प्रदेश सरकार महिलाओं और बच्चों के उत्थान के लिए जो कदम उठा रही हैं, उसमें हम अपने-अपने स्तर पर हरसंभव योगदान दें, तभी महिलाओं और बच्चों के लिए अनुकूल माहौल तैयार हो सकेगा।

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