Monday, May 18, 2026
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एसडीपीजी कॉलेज पानीपत में तीन दिवसीय राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कार्यक्रमों का तत्वपूर्ण आगाज़.

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at February 27, 2024 Tags: , , ,

पहले दिन विज्ञान प्रदर्शनी में 35 से अधिक क्रियाशील मॉडल्स का शानदार प्रदर्शन

विज्ञान प्रदर्शनी में राजकीय महाविधालय मतलौडा और एसडी पीजी कॉलेज पानीपत ने मारी बाजी

राष्ट्र के वैज्ञानिक ही राष्ट्र के विकास को निर्धारित करते है: प्रो अश्वनी कुश चेयरमैन कंप्यूटर साइंस विभाग कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कुरुक्षेत्र

BOL PANIPAT , 27 फरवरी, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में तीन दिवसीय राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कार्यक्रमों का तत्वपूर्ण आगाज़ हुआ जिसके पहले दिन विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन किया गया जिसमे प्रदेश के विभिन्न कालेजों के विज्ञान संकाय के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और 35 से अधिक क्रियाशील मॉडल्स को प्रदर्शित किया । कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल और कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र के कंप्यूटर साइंस विभाग के हेड एवं चेयरमैन प्रोफेसर अश्वनी कुश ने दीप प्रज्वलन के साथ की । 32 वर्ष के लम्बे अध्ययन और शोध अनुभव से युक्त प्रो अश्वनी कुश अब तक 150 से अधिक शोध पत्र अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित कर चुके है । वे अमेरिका, इंग्लैंड, मलेशिया, कनाडा, सिंगापुर आदि देशों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके है । मुख्य अतिथि का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, कार्यक्रम के संयोजक प्रो राकेश कुमार सिंगला, प्रो प्रवीण आर खेरडे और डॉ मुकेश पुनिया ने किया । 27 से 29 फरवरी तक चलने वाले इस कार्यक्रम में पहले दिन विज्ञान प्रदर्शनी, दूसरे दिन पेपर रीडिंग एंड पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन और तीसरे दिन क्विज, पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता और डॉ सीवी रमन मेमोरियल विस्तार व्याख्यानों का आयोजन किया जाएगा । पुरस्कार वितरण समारोह के साथ कार्यक्रम का समापन होगा । पंजीकरण का दायित्व डॉ रेणु गुप्ता, डॉ बिंदु, प्रो हर्षिता, प्रो मुक्त, प्रो साक्षी, प्रो सुमन और प्रो दिव्या ने अदा किया । स्वागत समिति में डॉ मुकेश पुनिया, प्रो संजय चोपड़ा, प्रो मयंक अरोड़ा, प्रो पारस वर्मा, और प्रो मनीष शामिल रहे ।

आज आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी में कॉलेज के अलावा राज्य के अन्य हिस्सों से आये क्रियाशील मॉडल्स को छात्र-छात्राओं के समक्ष रखा गया और उन्हें विस्तार से समझाया गया । प्रत्येक प्रतिभागी टीम में 3 विद्यार्थी शामिल थे और मॉडल्स भौतिकी, रसायन, गणित, प्राणी शास्त्र, वनस्पति शास्त्र, कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रॉनिक्स विषयों पर आधारित रहे । विज्ञान प्रदर्शनी में प्रो राकेश कुमार सिंगला, प्रो प्रवीण आर खेरडे, डॉ प्रियंका चांदना और प्रो मयंक अरोड़ा ने जूरी की भूमिका निभाई ।     

विज्ञान प्रदर्शनी में बायो-सीवेज वाटर ट्रीटमेंट, सोलर सिटी, स्मार्ट सिटी, सोलर इरीगेशन, बायो-डाईवर्सिटी, हाइड्रो पॉवर पॉइंट, हिमोडाईलेसीस, बायो फ्यूल एथेनॉल, मानसिक रोग और इनके निदान, रिमोट सेंसिंग, प्लास्टिक एंड वेस्ट डिस्पोजल, वाटर प्यूरीफायर, ई-वेस्ट, स्मार्ट बैग, हाइब्रिड ट्रक, होम ऑटोमेशन, गेट कण्ट्रोल, व्हीकल एक्सीडेंट अलर्ट, कंप्यूटर नेटवर्क, स्मार्ट पार्किंग, डाईहेड्रल ग्रुप, स्टार टोपोलॉजी, इंटीग्रेटेड फार्मिंग, एलेक्ट्रोलिसिस ऑफ़ वाटर, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक लॉज़, अक्षय उर्जा, एन्थ्रोपोजेनिक इम्पैक्ट ऑफ़ बायोडाइवर्सिटी, वर्चुअल असिस्टेंट आदि विषयों पर क्रियाशील मॉडल्स रखे गए जिन्हें छात्र-छात्राओं ने बड़े चाव और ध्यान से देखा एवं अपनी जिज्ञासा की पूर्ति हेतू सवाल-जवाब किये ।     

प्रो अश्वनी कुश ने अपने सन्देश में कहा कि वैज्ञानिकों के काम का सामाजिक महत्व होने के बावजूद भी वे अपने शोध कार्यों की उपयोगिता के बारे में समाज को नहीं बता पाते है । इसके पीछे वैज्ञानिकों द्वारा उपयोग की जाने वाली जटिल भाषा मुख्य रूप से जिम्मेदार होती है जिसे आम लोग आसानी से समझ नहीं पाते है । परन्तु इन छात्र-छात्राओं ने इतने सारे क्रियाशील मॉडल्स के माध्यम से मुश्किल से मुश्किल सिद्धांत को भी आसानी के साथ समझाया है । इस प्रकार के मॉडल्स से हम सभी में अज्ञात को जानने की जिज्ञासा पैदा होती है । ऐसे माडल्स के माध्यम से हममे मौजूदा गहन समस्या के कारणों और प्रभावों को जानने की इच्छा उत्पन्न होती है । भावुकता से परे होकर असली कारणों को जानना तथा कुछ नया खोजने और पुरानी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं एवं विधियों को जांचने का नाम ही विज्ञान है । वैज्ञानिक प्रयोग ही हमारे ज्ञान का विस्तार करते है और इन्ही के माध्यम से मानव समाज की समस्याओं के समाधान के रास्ते हमें बताते है । तर्क और सच्ची समीक्षा से युक्त व्यक्ति ही सच्चा वैज्ञानिक होता है । विज्ञान के बिना ज्ञान और विकास में वृद्धि संभव ही नहीं है । इन मॉडल्स से उन्हें विश्वास हो गया है कि आज के विज्ञान के छात्र वाकई में भविष्य में कुछ नया कर गुजरेंगे ।

दिनेश गोयल कॉलेज प्रधान ने विज्ञान दिवस की बधाई देते हुए कहा कि विद्यार्थीयो के लिए इस प्रकार की प्रतियोगिताओं को आयोजित करने का उद्देश्य उनमे विज्ञान के प्रति लगाव को पैदा करना और वैज्ञानिक सोच एवं शोध को बढ़ावा देना है । राष्ट्र के आम नागरिकों तक विज्ञान का संदेश भी तभी पहुँच पायेगा । वैज्ञानिक सोच के बढ़ने से ही हम जिम्मेदार एवं जागरूक नागरिक तथा वैज्ञानिक बन सकते है । आज के क्रियाशील मॉडल्स को देखकर उन्हें इस बात की ख़ुशी हुई है कि आज का युवा वैज्ञानिक सोच और दृष्टिकोण से लबरेज है ।

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि इस तरह की विज्ञान प्रदर्शनियों और अन्य प्रतियोगिताओं को आयोजित करने का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को विज्ञान के जागृत प्रति करना और उनकी वैज्ञानिक प्रतिभा को सबके सामने लाना है । नए प्रयोग नई सोच को बढ़ावा देते है जिससे ही जिम्मेदार नागरिक तथा वैज्ञानिक तैयार होते है । विज्ञान हर नए अनुसंधान के साथ मानव जीवन को अधिक सरल बनाता चला जा रहा है । आज विज्ञान के बढ़ते चहुंमुखी विकास के कारण मानव दुनिया के हर क्षेत्र में सबसे आगे है । मानव ने विज्ञान की सहायता से पृथ्वी पर उपलब्ध हर चीज को अपने काबू में कर लिया है । विज्ञान की सहायता से हम ऊंचे आसमान में उड़ सकते हैं और गहरे पानी में सांस ले सकते हैं । विज्ञान के बढ़ते हुए विकास के कारण ही हम चंद्रमा से लेकर मंगल ग्रह तक पहुंच पाए हैं । प्राचीन काल में जो चीजें असंभव सी प्रतीत होती थी वह विज्ञान के बढ़ते शोध एवं ज्ञान के कारण अब साधारण सी दिखने लगी है । विभिन्न कालेजों के छात्र-छात्राओं ने ऐसे सुन्दर मॉडल्स को बनाकर अपनी वैज्ञानिक सोच को नया विस्तार दिया है और हममें भविष्य के लिए नए विचार और सोच पैदा की है ।

विज्ञान प्रदर्शनी में विभिन्न विषयों में (क्रियाशील मॉडल्स) के परिणाम –

रसायन शास्त्र

प्रथम   एसडी पीजी कॉलेज पानीपत      प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट   

द्वितीय   राजकीय महाविधालय मतलौडा   कार्बनडाई ऑक्साइड से बिजली का निर्माण  

कंप्यूटर साइंस

प्रथम   एसडी पीजी कॉलेज पानीपत     नेटवर्क के प्रकार, तरीके और संचरण   

द्वितीय                            स्टार टोपोलॉजी

भौतिकी शास्त्र

     प्रथम        एसडी पीजी कॉलेज पानीपत     ग्रीन एनर्जी- ग्रीन लाइफ  

     द्वितीय                             एको-फ्रेंडली साइंस मॉडल

     तृतीय                             डिफ्लेक्शन ऑफ़ इलेक्ट्रॉन्स ओं इलेक्ट्रिक

  एंड मैग्नेटिक फील्डस

वनस्पति शास्त्र

प्रथम    एसडी पीजी कॉलेज पानीपत   सेल्फ सस्टेनेबल कम्युनिटी एंड इंटीग्रेटेड

 साइंटिफिक एप्रोच  एसडी पीजी कॉलेज की बीएससी तृतीय वर्ष (मेडिकल) की तीन छात्राओं रूबी, विनीता और अन्नू द्वारा प्राणीशास्त्र विषय में ‘बायोटेक का 2050 में भविष्य’ थीम पर बनाए गए मॉडल को प्रथम पुरस्कार हासिल हुआ । इस मॉडल में वर्ष 2050 तक ‘जेनेटिक इंजीनियरिंग’ के माध्यम से भविष्य में होने वाली क्रांतिकारी खोजों और उपलब्धियों को साकार होते हुए दिखाया गया । जेनेटिक इंजीनियरिंग के माध्यम से हम फसलों को वांछित गुणों से अधिक लाभदायक बना सकते है । इसी तकनीक से हम एक कार्यात्मक जीन के साथ दोषपूर्ण जीन को प्रतिस्थापित करके आनुवंशिक विकारों को भी तय कर सकते हैं । ऐसा करके हम मलेरिया, डेंगू और अन्य बीमारियों के प्रसार को रोक सकते है । चिकित्सीय क्लोनिंग के माध्यम से हम प्रत्यारोपण के लिये जैविक अंगों को प्राप्त करने के लिये भ्रूण की कोशिकाओं को क्लोन भी कर सकते है । आने वाले समय में हम कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जीनोमिक डेटा के साथ वैज्ञानिक डीएनए और जैविक प्रक्रियाओं के बीच के जटिल संबंधों को बेहतर तरीके से समझ पायेंगे और बीमारियों का सफल इलाज कर सकेंगे । 3-डी प्रिंटिंग भी हमारे डीएनए के अनुरूप होम-मेडिसिन, टिश्यू और बैक्टीरिया को विकसित करने में मदद करेगी और हमें स्वस्थ रखेगी । भविष्य में मानव और अन्य प्रजातियों के जीनोमिक ब्लूप्रिंट विकसित करने की आवश्यकता होगी और इस जानकारी से कोविड-19 एवं ऐसी ही अन्य महामारीयों से बचाव और इसके टीके विकसित करने में काफी मदद मिलेगी । यह क्रियाशील मॉडल मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा जिस पर सबसे अधिक भीड़ देखी गई और जहाँ पर अधिकतम छात्र-छात्राएं अपनी जिज्ञासा को शांत करते नजर आये । ये छात्राएं इस मॉडल के आधार पर पहले भी डीजीएचई प्रायोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल कर चुकी है ।        राजकीय महाविधालय मतलौडा की बीएससी तृतीय वर्ष की छात्राओं निधि और मन्नू द्वारा बनाये गए ‘कार्बनडाई ऑक्साइड से बिजली का निर्माण’ मॉडल को रसायन शास्त्र में दूसरा स्थान मिला ।       बीएससी द्वितीय वर्ष के शिवांश और रोज़ेरा मुस्कान पवन द्वारा ‘ऑटो इरीगेशन सिस्टम’ मॉडल को भी भरपूर सराहना मिली । इस मॉडल में दिखाया गया कि कैसे हम मिट्टी की आद्रता को नाप कर आटोमेटिक तरीके से पौधों को पानी से सींच सकते है । इस विधि से हम पौधों और फसलों को बिना किसी इंसानी मदद से पानी दे सकते है और पानी की बचत भी कर सकते है ।      

‘रिमोट सेंसिंग’ मॉडल में दिखाया गया कि कैसे दूर-दराज क्षेत्रों जैसे जंगलों, वनों, पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में, जहाँ इंसान का जाना बहुत मुश्किल है, हम रिमोट सेंसिंग के माध्यम से जानकारी एकत्रित करके उसके अनुसार निर्णय ले सकते है, योजनाये बना सकते है और फिर उन योजनाओं को न सिर्फ लागू कर सकते है बल्कि उनका मूल्यांकन भी कर सकते है ।

‘स्मार्ट सिटी’ मॉडल ने भी काफी विद्यार्थियों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया । आधुनिक समय में आवासीय कालोनियां कैसी बनेगी, वहां पर कैसी-कैसी सुविधाएं होंगी सुन्दर पार्क, आधुनिक सड़कें, सोलर बिजली सिस्टम, सैनिटेशन की व्यवस्था आदि को इस मॉडल में दिखाया गया । ये हमारे भविष्य के शहर होंगे जिनकी परिकल्पना को विद्यार्थियों ने अदभूत तरीके से पेश किया ।       

एसडी कॉलेज के कंप्यूटर विभाग द्वारा बनाए गया ‘प्लास्टिक और ई-वेस्ट मैनेजमेंट’ मॉडल भी मनमोहक रहा जिसमे दर्शाया गया कि कैसे प्रत्येक वर्ष निकलने वाले लाखों मिलियन टन इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट ने धरती का सत्यानाश कर दिया है जिससे इंसान और अन्य प्राणियों का वजूद ही खतरे में पड़ गया है ।

इस अवसर पर स्टाफ सदस्यों में डॉ मुकेश पुनिया, डॉ सुरेन्द्र कुमार वर्मा, डॉ दीपिका अरोड़ा, डॉ रेखा रानी, प्रो प्रवीण कुमारी, प्रो रजनी मित्तल, प्रो नम्रता, प्रो दिव्या, प्रो इंदु पुनिया, डॉ प्रोमिला, प्रो मुक्ता, प्रो कंवलजीत, प्रो शिवी, प्रो ऋतु, प्रो भावना जिंदल, प्रो मनीष कुमार, दीपक मित्तल, चिराग सिंगला ने भी कार्यक्रम में भरपूर सहयोग दिया ।

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