Tuesday, April 28, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में राष्ट्रीय गणित दिवस पर महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन को ह्रदय से किया गया याद.

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at December 22, 2024 Tags: , , , ,

-प्रो दिनेश मदान विभागाध्यक्ष गणित विभाग चौधरी बंसी लाल विश्वविधालय भिवानी ने विद्यार्थियों को बताये गणित विषय के गुण
-शून्य और अनंत की गणितीय अवधारणा गणित को दर्शन से जोड़ती है: प्रो दिनेश मदान

BOL PANIPAT , 22 दिसम्बर: एसडी पीजी कॉलेज पानीपत ने विगत कई वर्षों की तरह इस बार भी भारत के महान गणितज्ञ रामानुजन के जन्मदिवस पर गणित दिवस को श्रद्धा और प्रेरणा भाव के साथ मनाया गया । इस अवसर पर आयोजित सेमिनार में चौधरी बंसी लाल विश्वविधालय भिवानी के गणित विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो दिनेश मदान ने कला, वाणिज्य और विज्ञान संकायों के छात्र-छात्राओं को रामानुजन के जीवन और गणित के विषय के महत्व और इसकी व्यावहारिक कार्यप्रणाली के माध्यम से विभिन्न सूत्रों को बड़े ही रुचिकर और सरल तरीके से सिखाया । इस अवसर पर कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, गणित विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ मुकेश पुनिया, प्रो संजय चोपड़ा और डॉ एसके वर्मा ने कॉलेज के छात्र-छात्राओं को रामानुजन द्वारा गणित के क्षेत्र में किये गए योगदान और उन्हें गणित विषय चुनने एवं पढने के फायदे समझाए । सेमीनार में प्रो सुमन चौहान, प्रो रजनी, प्रो दिव्या और प्रो मुनीश ने भी शिरकत कर इस गणित विषय की रोचकता को जाना । विदित रहे कि भारत में गणित के क्षेत्र में पुराने समय से ही आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त, महावीर, भास्कर इत्यादि जैसी महान हस्तियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है लेकिन रामानुजन ने अत्यधिक कम उम्र में स्पष्ट प्रतिभा के संकेत दिखाए । उनके फ्रैक्शन, इनफाइनाइट सीरिज, नंबर थ्योरी, मैथमेटिकल एनालिसिस आदि के बारे में किये गए उनके योगदान को लेकर गणित सैदेव उनका ऋणी रहेगा ।
प्रो दिनेश मदान विभागाध्यक्ष गणित विभाग चौधरी बंसी लाल विश्वविधालय भिवानी ने कहा कि शून्य और अनंत की गणितीय अवधारणा गणित को दर्शन से जोडती है । गणित दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों में मानवता के विकास के लिए गणित के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करना है । देश की युवा पीढ़ी के बीच गणित विषय को सीखने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को प्रेरित करने, उत्साहित करने और विकसित करने के लिए पहल आज के ही दिन की जाती हैं । उन्होनें कहा कि भारत प्राचीनकाल से गणित के क्षेत्र में अग्रणी देश रहा है तथा दशमलव प्रणाली तथा शून्य का आविष्कार यही हुआ है । रामानुजन भी ऐसे गणितज्ञ थे जिन्होंने 3900 से अधिक प्रमेयों, साध्यों का न केवल प्रवर्तन किया अपितु इन्हें विभिन पद्धतियों से हल करके अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया । अपनी अन्तर्दृष्टि से जो प्रमेय और सूत्र उन्होंने लिखे उनमे से अधिकार सत्य साबित हुए । सबसे अधिक आश्चर्य की बात तो यह है कि रामानुजन के कुछ सूत्रों और प्रमेयों को कोई हल नहीं कर पाया और इन पर अभी तक शोध जारी है । वे खुद भी कहते थे कि गणित की दो संख्याओ अर्थात शून्य तथा अनन्त का दर्शन के क्षेत्र में बहुत ऊंचा स्थान है । वे शून्य को निर्गुण ब्रह्म मानते थे और अनन्त को उन सम्भावनाओं का पूर्ण समूह बताते थे जिनसे ब्रह्माण्ड बना है । रामानुजन सचमुच ही अदभुत, विलक्षण एवं असाधारण गणितज्ञ थे । यदि उन्हें अधिक उम्र मिलती और वे बीमार तथा धर्म से जकड़े नहीं होते तो वे अपनी विलक्षण प्रतिभा से गणित जगत को क्या कुछ दे जाते इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है । गणित जगत इस युवा गणितज्ञ को हमेशा उनकी अन्तर्प्रज्ञायुक्त विलक्षण प्रतिभा के कारण कभी भी भूल नहीं पायेगा और हर भारतीय को उन पर नाज है और रहेगा ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने वैदिक गणित विषय पर बोलते हुए कहा कि वैदिक गणित मे मौजूद सुत्रो की मदद से विभिन्न गणितीय क्रियाओ को आसान तरीके से कम वक़्त मे हल किया जाता है । जो भी छात्र प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे है उन सबके लिये वैदिक गणित द्वारा प्रश्नो को हल करने से समय की काफी बचत हो जाती है । जो लोग शिक्षा पेशे से जुडे है और गणित विषय को सिखाते है उन सभी के लिये भी वैदिक गणित द्वारा छात्रो को पढाना एक अच्छा कदम साबित हो सकता है । कई बार अभिभावक अपने बच्चो को घर पर सिखाते है और इस स्थिती मे भी वैदिक गणित द्वारा पढाना उनके बच्चो के लिये लाभदायक सिद्ध होता है । इसके अलावा जो लोग ऑनलाईन या ऑफलाईन गणित की कोचिंग देते है तो उनके लिये भी वैदिक गणित द्वारा सिखाना एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है । वैदिक गणित को कोई भी सीख सकता है और यह बहुत आसान और रुचिकर है । इस अवसर पर उन्होनें उदाहरण सहित वैदिक गणित द्वारा दिये गये प्रश्न संख्याओ का योग करना, वर्गफल निकालना, गुणा करना एवं घटाव करना उदाहरण के साथ समझाया । कुछ वैदिक सूत्रों जैसे गुणित समुच्चयः, एकन्युनेन पुर्वेण, गुणक समुच्चयः आदि पर भी उन्होनें विस्तार से चर्चा की ।
डॉ मुकेश पुनिया ने कहा कि श्रीनिवास रामानुजन को आधुनिक काल के महानतम गणित विचारकों में गिना जाता है । बेशक उन्हें गणित में कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं मिला फिर भी उन्होंने विश्लेषण एवं संख्या सिद्धांत के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिये जो आज भी उपयोग किये जाते है । श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसम्बर 1887 को मद्रास के समीप एक गांव में हुआ । उनके पिता श्रीनिवास अय्यंगर जिले की एक साडी की दुकान में साधारण क्लर्क थे जबकि उनकी माता एक गृहिणी और धार्मिक प्रवृति की महिला थी । 11 वर्ष की आयु से ही श्रीनिवास रामानुजन ने अपने ही घर पर किराये पर रह रहे दो विद्यार्थियो से गणित का अभ्यास करना शुरू किया जिसमे एसएल लोनी द्वारा लिखित ‘एडवांस ट्रिग्नोमेट्री’ की पुस्तक भी शामिल थी । जीवन भर बीमारियों से झूझते महान गणितज्ञ रामानुजन इतने प्रतिभाशाली थे कि वे अपनी अन्तर्प्रज्ञा से प्रमेयों तक क्रमबद्ध तरीकों से पहुंचने की बजाय सीधे छलांग लगाकर सर्वशुद्ध हल तक पहुंच जाया करते थे और उनकी यह दैवीय प्रतिभा अंग्रेज गणितज्ञों को जादुई एवं अविश्वसनीय लगती थी । ऐसे महान गणितज्ञ का कारुणिक तथा असामयिक निधन मात्र 32 वर्ष में हो गया । रामानुजन की करुण कहानी चूके हुए अवसरों की ऐसी कहानी है जो हमें यह बताती है कि प्रतिभाशाली विद्वानों को न सिर्फ अपने देश में बल्कि विदेशों में भी पूरी पहचान मिलती है बशर्ते इन्हें ईश्वर उम्र दराज रखे ।

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