किसानों को दलहनी फसलों को देना चाहिए बढ़ावा : संयुक्त निदेशक देवेंद्र सिहाग
-रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग में किसान लाए कमी : आत्मा राम गोदारा
-कृषि वैज्ञानिकों ने प्रगति शील किसानों के साथ रबी की फसल की तैयारियों को लेकर की चर्चा
-वैज्ञानिकों ने बेहतर उत्पादन के लिए नवीनतम तकनीकी उपायों से किसानों को कराया अवगत
BOL PANIPAT ,5 सितंबर।, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग(पंचकूला) हरियाणा के संयुक्त निदेशक डॉ देवेंदर सिहाग ने कृषि विज्ञान केंद्र उझा का शुक्रवार को दौरा किया, जहां उन्होंने केवीके के वैज्ञानिकों, कृषि विभाग, पानीपत के अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों के साथ रबी फसल 2025-26 की तैयारियों को लेकर गंभीरता पूर्वक चर्चा की और रबी फसल में विशेष रूप से दलहनी और तिलहनी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया ।
उन्होंने किसानों को इन फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए नवीनतम तकनीकी उपायों से अवगत कराया।
उन्होंने फसल अवशेष प्रबंधन की अहमियत पर भी प्रकाश डाला और किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को जलाने की बजाय उनका सही तरीके से प्रबंधन करें ताकि पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ आत्मा राम गोदारा ने प्राकृतिक कृषि मिशन के तहत रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग में कमी लाने के लिए किसानों को प्रेरित किया।उन्होंने डीएपी (डायमोनियम फॉस्फेट) के वैकल्पिक उपायों पर भी चर्चा की, ताकि किसानों को ज्यादा प्रभावी और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से सुरक्षित उर्वरकों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग पर बल देते हुए उन्होंने बताया कि इसका सही तरीके से इस्तेमाल न केवल भूमि की सेहत को बनाए रखेगा, बल्कि किसानों की लागत को भी कम करेगा।
इस अवसर पर उप मंडल कृषि अधिकारी डॉ देवेंदर कुहाड़ ने उर्वरक कालाबाजारी और नकली उर्वरकों के खतरे को लेकर कृषि विभाग को कड़ी कार्रवाई करने को कहा । उन्होंने किसानों को यह आश्वासन दिया कि कृषि विभाग ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाएगा । इसके साथ ही, फसल बीमा योजना के बारे में भी जानकारी दी गई, ताकि किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचने के लिए सरकारी सहायता मिल सके।
केंद्र के वरिष्ठ समन्वयक डॉ. सतपाल सिंह, , कृषि विज्ञानं केंद्र , उझा ने किसानों से आग्रह किया कि वे हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की सिफारिशों के अनुसार फसलों का उत्पादन करें और उर्वरकों का विवेकपूर्ण उपयोग करें।
बैठक में कृषक समुदाय के साथ समन्वय बढ़ाने, नई कृषि तकनीकों का प्रचार-प्रसार करने और कृषि क्षेत्र में सतत सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
डॉ देवेंदर सिहाग ने सभी को कृषि में नवीनतम बदलावों को अपनाने के लिए प्रेरित किया ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो और कृषि क्षेत्र की समृद्धि हो।

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