“मंथन – एम्प्लॉयर्स राउंडटेबल” का सफल आयोजन किया गया।
BOL PANIPAT : आई.बी. स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्लेसमेंट एवं करियर गाइडेंस सेल और मेधा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में “मंथन – एम्प्लॉयर्स राउंडटेबल” का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा और उद्योग की अपेक्षाओं के बीच मौजूद अंतर को समझना और उसे कम करने की दिशा में ठोस पहल करना था।इस राउंडटेबल में विभिन्न क्षेत्रों से आठ प्रमुख नियोक्ताओं ने भाग लिया। इनमें राहुल सिंगला (डायरेक्टर, इंबाइब टेक्नोलॉजीज – आईटी), श्रुति चावला (दैनिक भास्कर – मीडिया), खुशबू चानना (टीम लीड एचआर, हे कोच), प्रिंस वर्मा (सीईओ, डिजिटल समय), संदीप संधू (वीपी, एमजी इक्विटी मॉल – मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज), सुरेंद्र शर्मा (रिलायंस निप्पॉन इंश्योरेंस), विकास चौधरी (जनरल मैनेजर, नेक्सा) और हिमांशु मक्कड़ (एमडी, डीलिफिन्टी) शामिल रहे। अतिथियो को तुलसी का पौधा देकर सम्मानित किया गया। इस महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. शशि प्रभा मलिक ने अतिथियो का स्वागत करते हुए कहा कि आज छात्रों को बदलते तकनीकी परिदृश्य, इंडस्ट्री स्किल्स और प्रैक्टिकल एक्सपोज़र की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि “मंथन” जैसे आयोजन छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि मंथन” राउंडटेबल के जरिए विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि शिक्षा और उद्योग के बीच निरंतर संवाद और सहयोग ही युवाओं को रोजगार के लिए सक्षम बनाने का सबसे प्रभावी उपाय है। इस अवसर पर
प्लेसमेंट एवं करियर गाइडेंस सेल की संयोजिका डॉ. अर्पणा गर्ग ने कहा कि इस प्रकार के मंच महाविद्यालय और नियोक्ताओं को करीब लाते हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान और उद्योग मिलकर यदि प्रयास करें तो छात्रों को न केवल रोजगार के लिए सक्षम बनाया जा सकता है, बल्कि उन्हें लंबे समय तक टिकने योग्य प्रोफेशनल भी तैयार किया जा सकता है। चर्चा के दौरान नियोक्ताओं ने खुलकर अपनी राय रखते हुए कहा कि एक फ्रेशर को हायर करने में उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि अक्सर छात्रों में कम्युनिकेशन स्किल्स, प्रैक्टिकल नॉलेज और प्रोफेशनल एटीट्यूड की कमी होती है, जिसके कारण उन्हें ट्रेनिंग पर अधिक समय और संसाधन खर्च करने पड़ते हैं और साथ ही टाइम मैनेजमेंट और टीमवर्क की समझ की भी कमी महसूस होती है।
नियोक्ताओं ने यह भी साझा किया कि वे फ्रेशर्स को हायर करते समय किन स्किल सेट्स को सबसे अधिक महत्व देते हैं। इसमें प्रमुख रूप से कम्युनिकेशन स्किल्स, समस्या समाधान की क्षमता, डिजिटल और तकनीकी ज्ञान, नई चीज़ें सीखने की ललक (Learnability), टीमवर्क और सकारात्मक दृष्टिकोण शामिल हैं। उनका मानना था कि यदि छात्रों में ये गुण मौजूद हों तो वे इंडस्ट्री में जल्दी एडजस्ट हो सकते हैं और लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। कार्यक्रम के अंतिम सत्र में यह प्रश्न रखा गया कि शिक्षा और उद्योग कैसे मिलकर इस स्किल गैप को कम कर सकते हैं। इस पर सभी डोमेन्स के नियोक्ताओं ने अपने सुझाव साझा किए। कुछ ने पेड इंटर्नशिप और प्रोजेक्ट-आधारित लर्निंग पर जोर दिया, तो कुछ ने इंडस्ट्री-एकेडमिक कोलैबोरेशन को बढ़ावा देने की बात कही। इस चर्चा से प्रतिभागियों को न केवल उद्योग जगत की विविध आवश्यकताओं की जानकारी मिली बल्कि भविष्य में सहयोग के नए रास्ते भी खुले।
इस अवसर पर महाविद्यालय कि ओर से डॉ. अर्पणा गर्ग, माधवी, स्वाति पुनिया, खुशबू, अंजलि, पूनम गुप्ता, निशा और रुचिका उपस्थित रहीं। इस कार्यक्रम को सफल बनाने मे मेधा फाउंडेशन की ओर से पियूष गुप्ता (प्रोग्राम लीड – हरियाणा एवं आगरा), शाहिद अली (प्रोग्राम मैनेजर – पानीपत), अमन श्रीवास्तव, छवि यादव, अब्दुल हसीब और नेहा यादव ने सक्रिय योगदान दिया

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