Tuesday, May 26, 2026
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देलवाड़ा जैन मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित करने मांग.

By LALIT SHARMA , in RELIGIOUS SOCIAL , at February 3, 2026 Tags: , , , ,

-राज्यसभा सांसद डांगी ने सदन में उठाया मुद्दा, बताया अद्वितीय स्थापत्य कला

BOL PANIPAT : 3 फरवरी 2026, राज्यसभा सांसद नीरज डांगी ने देलवाड़ा जैन मंदिरों को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित करने की मांग की है। उन्होंने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान मंगलवार (3 फरवरी 2026) को यह मुद्दा उठाया। इस दौरान सांसद डांगी ने बताया कि राजस्थान के सिरोही जिले में माउंट आबू की अरावली पर्वत श्रृंखला की चोटी पर स्थित ये मंदिर भारतीय प्राचीन स्थापत्य कला, अद्वितीय संगमरमर शिल्पकला और सांस्कृतिक उत्कृष्टता के अनुपम उदाहरण हैं।

11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच हुआ था निर्माण

कांग्रेस नेता व राज्य सभा सदस्य डांगी ने सदन को देलवाड़ा जैन मंदिरों के प्राचीन इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि इनका निर्माण 11वीं से 13वीं शताब्दी के मध्य हुआ था। यहां 5 श्वेतांबर जैन मंदिर हैं, जिनमें ‘विमलवसहि’ और ‘लूणवसहि’ विशेष रूप से कलात्मक और विशिष्ट हैं। अन्य प्रमुख मंदिरों में महावीर स्वामी मंदिर, पीतलहर मंदिर और पार्श्वनाथ मंदिर शामिल हैं।

हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते है मंदिर परिसर में उपलब्ध शिलालेखों के अनुसार, वर्ष 1031 ईस्वी में 1500 शिल्पियों और 1200 श्रमिकों ने 14 वर्षों के अथक प्रयासों से इन मंदिरों का निर्माण किया था। श्वेत संगमरमर से निर्मित इन मंदिरों पर 18.53 करोड़ रुपए की लागत आई थी। इनकी छतों, गुंबदों और तोरणद्वारों पर की गई अलंकृत नक्काशी और नायाब शिल्पकला हर साल लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है।

जैन तीर्थंकरों की 57 देहरियों में है मूर्तियां स्थापित डांगी ने बताया कि मंदिर में जैन तीर्थंकरों की 57 देहरियों में मूर्तियां स्थापित हैं। इनमें भगवान ऋषभदेव के अतिरिक्त मां सरस्वती, लक्ष्मीजी, अंबाजी के साथ नृसिंह अवतार के हिरण्यकश्यप वध, श्रीकृष्ण द्वारा कालिया दमन और शेषनाग की शैय्या की मूर्तियां भी शामिल हैं। इन मंदिरों में जैन संस्कृति के साथ-साथ उस युग की लोक संस्कृति, नृत्य-नाट्य कला के अद्भुत और चित्ताकर्षक शिल्प-चित्र भी अंकित हैं।

सांसद डांगी ने शिल्प सौंदर्य की सूक्ष्मता, कोमलता और अलंकरण की विशिष्टता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि गुंबदों की छतों पर स्फटिक बिंदुओं की भांति झूमते कलात्मक पिंड, मेहराबों का बारीक अलंकरण और शिलापट्टों पर उत्कीर्ण पशु, पक्षियों, वृक्षों, लताओं तथा पुष्पों की आकृतियां अलौकिक आनंद की अनुभूति प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि यहां की वास्तुकला और शिल्प कौशल अद्वितीय हैं, जिसकी मिसाल विश्व में कहीं नहीं मिलती।

साहित्यकार डॉ दिलीप धींग ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा देलवाड़ा मंदिर पर 14 अक्टूबर 2009 को बहुरंगी स्मारक डाक टिकट पाँच रुपए के मूल्य वर्ग का जारी हुआ है । राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् के अध्यक्ष जिनेंद्र जैन ने सांसद सदस्य डांगी के इस प्रयास का स्वागत करते हुए उन्हें जैन समाज की और से धन्यवाद ज्ञापित किया।

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