पराली प्रबंधन को लेकर प्रशासन अलर्ट, फसल अवशेष जलाने पर एफआईआर, चालान और रेड एंट्री की कार्रवाई
पराली संरक्षण बल रखेगा खेतों पर नजर, देर शाम और रात में भी होगी विशेष निगरानी: उपायुक्त डॉ हरीश कुमार वशिष्ठ
पराली बनेगी किसान की पूंजी, प्रबंधन के लिए मशीनों की तैनाती से लेकर जागरूकता तक व्यापक कार्ययोजना
BOL PANIPAT , 24 सितंबर। धान की पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने और फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन को लेकर प्रदेश सरकार ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इसी कड़ी में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने वीरवार को प्रदेशभर के उपायुक्तों और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर पराली प्रबंधन अभियान की प्रगति की समीक्षा की तथा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
बैठक में उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने पानीपत जिले में पराली प्रबंधन को लेकर की जा रही तैयारियों और अब तक की कार्रवाई की स्थिति मुख्य सचिव के समक्ष रखी। उन्होंने बताया कि जिले में प्रत्येक किसान तक पहुंच बनाने और पराली जलाने की घटनाओं की प्रभावी निगरानी के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। मोबाइल एप के माध्यम से भी किसानों की निगरानी, फसल अवशेष प्रबंधन की जानकारी और खेतों में आग लगने की सूचना दर्ज करने की व्यवस्था की गई है।
उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य किसानों को पराली जलाने से रोकने के साथ-साथ उन्हें फसल अवशेषों के वैज्ञानिक और लाभकारी प्रबंधन के विकल्प उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नोडल अधिकारी अपने क्षेत्र में किसानों के साथ निरंतर संपर्क में रहेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि फसल अवशेषों का इन-सीटू, एक्स-सीटू अथवा चारे के रूप में उचित प्रबंधन हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को मशीनरी, तकनीकी जानकारी और सरकारी प्रोत्साहन का लाभ समय पर उपलब्ध करवाया जाए।
उपायुक्त ने कहा कि पराली प्रबंधन केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता, पानी के संरक्षण और किसान की आर्थिक समृद्धि से भी जुड़ा है। इसलिए प्रशासन का प्रयास रहेगा कि किसान पराली को समस्या न मानकर उसका उचित उपयोग करने की दिशा में आगे बढ़ें। इसके लिए गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ स्कूलों और महाविद्यालयों में भी जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
उपायुक्त ने बताया कि जिले में पराली संरक्षण बल का गठन किया गया है, जिसमें कृषि, पुलिस, राजस्व, पंचायत, पशुपालन सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। यह बल जिला, खंड और गांव स्तर पर पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी करेगा तथा सूचना मिलते ही आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। देर शाम और रात के समय पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए विशेष निगरानी और गश्त भी की जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्यापित रूप से पराली जलाने की प्रत्येक घटना में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में एफआईआर, चालान तथा संबंधित किसान के भूमि अभिलेख में रेड एंट्री की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्रवाई के साथ-साथ किसानों को नियमों और पराली प्रबंधन के लाभों की जानकारी भी दी जाए।
बैठक में मशीनरी के प्रभावी उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया। धान की कटाई के कार्यक्रम के अनुसार विभिन्न खंडों में बेलर, रेक और अन्य कृषि मशीनरी की तैनाती की जा रही है, ताकि किसानों को पराली प्रबंधन में किसी प्रकार की परेशानी न हो। राज्य सरकार द्वारा पराली प्रबंधन के लिए मशीनों के उपयोग पर प्रति एकड़ 1200 रुपये का प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है। उपायुक्त ने बताया कि जहां कटाई पहले शुरू हुई है वहां मशीनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि प्रशासन, किसानों और संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों से जिले में पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जाएगी। किसानों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वे पराली को आग लगाने के बजाय उपलब्ध मशीनरी और वैज्ञानिक प्रबंधन विधियों का उपयोग करें तथा पर्यावरण संरक्षण में प्रशासन का सहयोग करें।
उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाना प्रशासन की प्राथमिकता है, लेकिन हमारा उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि किसानों को पराली के बेहतर प्रबंधन के लिए हर संभव सुविधा और तकनीकी सहयोग उपलब्ध करवाना भी है। जिले में 246 नोडल अधिकारियों की तैनाती कर गांव स्तर तक निगरानी व्यवस्था मजबूत की गई है। फसल कटाई के अनुसार कृषि मशीनरी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है और किसानों को पराली प्रबंधन के लिए सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इस मौके पर कृषि विभाग के उपनिदेशक बलवंत सारण, सहायक कृषि अभियंता सुधीर, जिला पुलिस से आरओ भूपेंद्र सिंह चहल सहित संबंधित विभागों के अधि अधिकारी मौजूद रहे।

Comments