पानीपत के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता राममोहन राय की पुस्तक ‘ उज़्बेकिस्तान से दोस्ती ’ का विद्यार्थियों के बीच विमोचन
40 वर्ष पूर्व सोवियत संघ के तत्कालीन उज़्बेकिस्तान की यात्रा के संस्मरणों पर आधारित है 146 पृष्ठों की पुस्तक; लेखक ने बच्चों को समर्पित की अपनी कृति
BOL PANIPAT । पानीपत के वरिष्ठ अधिवक्ता, इतिहासकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता राममोहन राय द्वारा लिखित पुस्तक ‘उज़्बेकिस्तान से दोस्ती’ का विमोचन हाली अपना स्कूल के विद्यार्थियों के बीच किया गया। लगभग 40 वर्ष पूर्व तत्कालीन सोवियत संघ के अंतर्गत आने वाले उज़्बेकिस्तान की यात्रा के दौरान लेखक द्वारा संकलित अनुभवों और संस्मरणों पर आधारित यह 146 पृष्ठों की पुस्तक पाठकों को मध्य एशिया के इतिहास, समाज, संस्कृति और जनजीवन से परिचित कराने का एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है। लेखक ने अपनी इस पुस्तक को बच्चों को समर्पित किया है, ताकि नई पीढ़ी पुस्तकों और यात्रा-वृत्तांतों के माध्यम से दुनिया को जानने-समझने के लिए प्रेरित हो सके।
पुस्तक के विमोचन के अवसर पर हाली अपना स्कूल की प्रिंसिपल पूजा सैनी, सामाजिक कार्यकर्ता भानु तथा अंशिका रावत विशेष रूप से उपस्थित रहे। विद्यार्थियों के बीच पुस्तक का विमोचन करने का उद्देश्य उनमें पठन-पाठन, साहित्य, इतिहास और विभिन्न देशों की संस्कृति के प्रति रुचि विकसित करना भी रहा।
पुस्तक में राममोहन राय ने अपनी उज़्बेकिस्तान यात्रा के अनुभवों को आत्मीयता और सहज भाषा में प्रस्तुत किया है। इसमें ताशकंद, बुखारा, समरकंद, फरगना सहित उज़्बेकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों के यात्रा-वृत्तांत शामिल हैं। इन संस्मरणों के माध्यम से पाठकों को वहां के ऐतिहासिक नगरों, सांस्कृतिक परंपराओं, सामाजिक जीवन और तत्कालीन परिस्थितियों को समझने का अवसर मिलता है। लेखक ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर उन स्थानों और लोगों का परिचय देने का प्रयास किया है, जिनसे उनका यात्रा के दौरान संपर्क हुआ।
राममोहन राय की यह कृति केवल एक देश की यात्रा का विवरण नहीं है, बल्कि उस दौर की ऐतिहासिक और सामाजिक स्मृतियों को सहेजने का प्रयास भी है। चार दशक पहले की गई यात्रा के अनुभव आज के पाठकों के लिए विशेष महत्त्व रखते हैं, क्योंकि इनके माध्यम से वे उस समय के सोवियत संघ और उसके अंतर्गत आने वाले उज़्बेकिस्तान के परिवेश को एक प्रत्यक्षदर्शी यात्री की दृष्टि से समझ सकते हैं। यात्रा-वृत्तांत इतिहास को केवल तथ्यों और तारीखों के रूप में पढ़ने के बजाय उसे लोगों के जीवन, स्थानों और अनुभवों से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।
पुस्तक की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि लेखक ने इसे बच्चों को समर्पित किया है। आज के डिजिटल युग में, जब नई पीढ़ी का एक बड़ा हिस्सा मोबाइल फोन और इंटरनेट पर अधिक समय बिताता है, ऐसी पुस्तकें बच्चों को पढ़ने की आदत विकसित करने तथा अपने देश से बाहर की दुनिया के बारे में जानने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। यात्रा-साहित्य के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिलती है कि विभिन्न देशों की भाषाएं, संस्कृतियां, परंपराएं और जीवनशैलियां अलग-अलग होने के बावजूद मानवीय संवेदनाएं और आपसी मित्रता की भावना सार्वभौमिक हैं।
‘उज़्बेकिस्तान से दोस्ती ’ उन पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है, जो यात्रा-वृत्तांत पढ़ने, विश्व इतिहास को समझने तथा विभिन्न देशों के समाज और संस्कृति के बारे में जानने में रुचि रखते हैं। यह पुस्तक विद्यार्थियों, इतिहास के जिज्ञासुओं, शोधार्थियों और यात्रा-साहित्य के पाठकों के लिए एक उपयोगी संदर्भ बन सकती है।
राममोहन राय लंबे समय से सामाजिक कार्यों, गांधीवादी विचारों, शांति और सद्भाव के प्रयासों तथा इतिहास से जुड़े लेखन में सक्रिय रहे हैं। उनकी यह पुस्तक यात्राओं के माध्यम से दुनिया को समझने और विभिन्न समाजों के बीच मित्रता तथा आपसी समझ को मजबूत करने की भावना को अभिव्यक्त करती है।
हाली अपना स्कूल में विद्यार्थियों के बीच पुस्तक का विमोचन इस दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है कि साहित्य और शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों में जिज्ञासा, कल्पनाशीलता, संवेदनशीलता और व्यापक विश्व-दृष्टि विकसित करना भी है। ऐसी पुस्तकों से विद्यार्थियों को अपने आसपास की दुनिया से आगे बढ़कर दूसरे देशों के इतिहास, संस्कृति और लोगों के जीवन के बारे में जानने की प्रेरणा मिल सकती है।

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