किसी भी व्यक्ति की जिंदगी को सस्ता समझना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, जिन परिवारों ने औद्योगिक दुर्घटनाओं में अपने प्रियजनों को खोया है, उनके दुख और पीड़ा को समझना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी: उपायुक्त डॉ हरीश कुमार वशिष्ठ
औद्योगिक हादसों में श्रमिकों की मौतों पर उपायुक्त सख्त, बोले- लीपापोती नहीं चलेगी, हर घटना की जवाबदेही तय होगी
श्रमिकों की जिंदगी अनमोल, सुरक्षा में लापरवाही करने वाले उद्योगों पर होगी कड़ी कार्रवाई
पिछले छह माह में हुई औद्योगिक दुर्घटनाओं का पूरा ब्योरा तलब, पांच साल में दी गई सहायता का भी मांगा रिकॉर्ड
बिना एनओसी चल रही फैक्ट्रियों पर होगी कार्रवाई, औद्योगिक हादसों में एसओपी का पालन अनिवार्य
औद्योगिक हादसों पर प्रशासन सख्त, उपायुक्त ने उद्योगपतियों और अधिकारियों से मांगा जवाब
BOL PANIPAT , 4 नवंबर। औद्योगिक क्षेत्र में पिछले छह माह के दौरान हुई श्रमिकों की मृत्यु की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने बुधवार को जिला सचिवालय के सभागार में उद्योगपतियों और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।
बैठक में उपायुक्त ने औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों और श्रम विभाग के अधिकारियों से इन दुर्घटनाओं के कारणों पर जवाब मांगा और स्पष्ट किया कि श्रमिकों की जिंदगी के साथ किसी भी स्तर पर समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उपायुक्त ने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि औद्योगिक दुर्घटनाओं के मामलों में लीपापोती से काम नहीं चलेगा। जिन औद्योगिक संस्थानों में पिछले छह माह के दौरान दुर्घटनाएं हुई हैं, उनका विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि पिछले पांच वर्षों में जिन संस्थानों में श्रमिकों की घटना घटी है उन संस्थानों ने श्रमिक परिवारों को किस प्रकार की सहायता और सहयोग दिया है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को इस संबंध में विस्तृत प्रेजेंटेशन तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि प्रत्येक घटना के कारणों, जिम्मेदारियों और अब तक की गई कार्रवाई की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की जिंदगी को सस्ता समझना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जिन परिवारों ने औद्योगिक दुर्घटनाओं में अपने प्रियजनों को खोया है, उनके दुख और पीड़ा को समझना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। यदि पीडि़त परिवार चुप हैं तो इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि उनकी पीड़ा को नजरअंदाज कर दिया जाए या कोई उनकी मजबूरी का फायदा उठाए। हर घटना की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए और पीडि़त परिवारों को न्याय मिलना चाहिए।
बैठक में औद्योगिक क्षेत्र की ओर से विनोद धमीजा ने प्रशासन को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र प्रशासन के साथ खड़ा है और भविष्य में इन घटनाओं को ध्यान में रखते हुए एक विशेष सेमिनार आयोजित किया जाएगा। इसमें श्रमिकों को मिलने वाली सुविधाओं, उनकी सुरक्षा और उद्योगों में उपलब्ध करवाई जा रही व्यवस्थाओं पर विशेष रूप से चर्चा की जाएगी। उन्होंने भी इस बात पर सहमति जताई कि जिन औद्योगिक संस्थानों में दुर्घटनाएं हुई हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन को सुझाव दिया कि सभी फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए ड्रेस कोड लागू किया जाए, ताकि कार्यस्थल पर उनकी पहचान और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।
बैठक में उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि औद्योगिक संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाए और निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए। प्रत्येक विभाग अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभाए और दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करे। इस मौके पर एसडीएम मनदीप कुमार, एसडीएम समालखा अमित कुमार, एसडीएम इसराना नवदीप नैन, नगराधीश टीनू पोसवाल, डीएसपी विकास चहल, डीडीपीओ राजेश शर्मा, श्रम विभाग से हवा सिंह, हरदीप सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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