विक्रमी सम्वतसर 2083 के लिए पर्व एवं त्योहार सूची तैयार करने हेतु ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन किया गया.
BOL PANIPAT : इण्स्ट्रियल एरिया स्थित स्व. मदन डुडेजा के प्रतिष्ठान पर श्री सनातन धर्म संगठन (रजि.) पानीपत की ओर से विक्रमी सम्वतसर 2083 के लिए पर्व एवं त्योहार सूची तैयार करने हेतु ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें शहर के प्रतिष्ठित एवं विद्वान ब्राह्मणों ने भाग लिया।
सम्मेलन की शुरूआत हनुमान चालीसा के पाठ से हुई। ज्योतिषाचार्य पं. धर्मदत्त शास्त्री को सम्मेलन का अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि जिस प्रकार रथ के अगले दो पहिए चलते हैं उन्हीं की बनाई रेखाओं पर पिछले 2 पहिए अनुसरण करते हैं। इसी प्रकार जिस प्रकार विद्वान पर्व एवं सूची का निर्धारण करते हैं उसी पर ही समाज चलता है। अतः पर्व एवं त्योहारों का निर्णय एक गंभीर तथा परिश्रमजन्य कार्य है। तत्पश्चात डा. महेन्द्र शर्मा ने कहा कि हमारे देश में क्षेत्र के अनुसार 83 पंचांग प्रचलित हैं और पूरे भारत में 1660 के करीब त्योहार विभिन्न स्थानों पर मनाए जाते हैं। इस बार क्षेत्रीय पांचांग में श्रावण मास में आने वाला सावन जोत ‘असेसा पर्व पानीपत’ को पहली बार शामिल किया गया है। यह वारूणी पूजा के आधार पर इस तिथि का निर्धारण किया गया है। उन्होंने कहा कि हनुमत सभाओं एवं जन्माष्टमी पर्व पर बच्चों को यथायोग्य अंशदान देकर प्रोत्साहित करें ताकि बच्चे भारतीय संस्कृति से जुड़े रहें। इसलिए पर्व सूची को एकरूपता देना आवश्यक है। उन्होंने कहा 19 मार्च को आरंभ होने वाले विक्रमी सम्वतसर 2083 सम्वत का नाम- रौद्र, राजा -बृहस्पति, मंत्री-मंगल, वास-माली के घर, वाहन-चातक और रोहिणी का वास समुद्र में होगा। सम्मेलन में पर्व एवं त्योहारों की सभी तिथियों पर गहन मंथन हुआ और अंत में सर्वसम्मति से सूची पर सभी ने अपनी सहमति व अनुमोदन किया। श्री सनातन धर्म संगठन के प्रधान कृष्ण रेवड़ी ने इस अवसर पर कहा कि राष्ट्र की आध्यात्मिक अखण्डता के लिए पर्व सूचि का अक्षरशः पालन किया जायेगा। युधिष्ठिर शर्मा जी ने कहा ब्राह्मणों को पर्व सूची के अनुसार ही पर्व मनाने का आवाहन किया। विजय वशिष्ठ ने कहा कि पंचांग सिद्धान्त अनुसार चलते हैं। व्यवहार और सिद्धान्त में अंतर होने पर भी भी ब्राह्मण पंचांग यानि सिद्धान्त से अलग नहीं हो सकता। इस अवसर पर प्रधान कृष्ण रेवड़ी, वेद शर्मा, अमित डुडेजा, युद्धवीर रेवड़ी, मुरारि चुघ, डा. रमेश चुघ, राम नारायण रावल, सतनाम दास मिगलानी, ब्रह्मर्षि जी महाराज, वेद प्रकाश गोस्वामी, अशोक नारंग, सुरेन्द्र पुष्करणा, विजय वशिष्ठ, निरंजन पाराशर, सतीश शर्मा, प्रेम शर्मा, पं. कालीचरण, रमेश शास्त्री, केवल कृष्ण, वेद प्रकाश शास्त्री, सत्यप्रकाश जोशी, आदि उपस्थित थे।
विक्रमी सम्वत 2083 के मुख्य पर्व एवं त्योहार
नव संवत्सर 2083 एवं चैत्र नवरात्र प्रारम्भ 19 मार्च 2026
श्री दुर्गाष्टमी 26 मार्च 2026
श्री राम जन्मोत्सव 27 मार्च 2026
श्री हनुमान जयंती (दक्षिण भारत) 2 अप्रैल 2026
वैशाखी पर्व खालसा जयंती 14 अप्रैल 2026
श्री भगवान परशुराम जयंती 19 अप्रैल 2026
ज्येष्ठ पुरुषोत्तम मास 17 मई से 15 जून
गंगा दशहरा 25 मई 2026
निर्जला एकादशी व्रत 25 जून 2026
श्री भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई 2026
गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई 2026
श्रावण शिवरात्रि 11 अगस्त 2026
गोस्वामी तुलसीदास जयंती 19 अगस्त 2026
रक्षाबन्धन 28 अगस्त 2026
श्री कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितम्बर 2026
श्री राधाष्टमी 19 सितम्बर 2026
श्राद्ध पक्ष 26 सितम्बर से 10 अक्टूबर 2026
श्री दुर्गाष्टमी 19 अक्टूबर 2026
दशहरा 20 अक्टूबर 2026
श्री भगवान वाल्मीकि जयंती 26 अक्टूबर 2026
श्री हनुमान जयंती (उ.भारत) 7 नवम्बर 2026
दीपावली 8 नवम्बर 2026
भैया दूज 11 नवम्बर 2026
गोपाष्टमी 17 नवम्बर 2026
श्री गुरुनानक देव जयंती 24 नवम्बर 2026
श्री गीता जयंती 20 दिसम्बर 2026
लोहड़ी 13 जनवरी 2027
मकर संक्रांति 14 जनवरी 2027
श्री गुरु गोबिंद सिंह जयंती 15 जनवरी 2027
बसंत पंचमी 11 फरवरी 2027
महाशिवरात्रि 6 मार्च 2027
होली. 22 मार्च 2027

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