Tuesday, April 28, 2026
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आई बी महाविद्यालय में संस्कृत विभाग की ओर से अनुवाद कार्यशाला का आयोजन किया गया

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL Uncategorized , at March 24, 2025 Tags: , , , , ,

BOL PANIPAT : आई बी महाविद्यालय में संस्कृत विभाग की ओर से अनुवाद कार्यशाला का आयोजन किया गया ।इस कार्यशाला में स्नातक कक्षाओं के विद्यार्थियों ने भाग लिया।कार्यशाला की संयोजिका व प्रशिक्षिका संस्कृत विभाग की प्राध्यापिका सोनिया वर्मा रही । प्राचार्या डॉ शशिप्रभा मलिक ने कहा कि विश्व की सभ्यताओं और संस्कृतियों के विकास में अनुवाद की विशेष भूमिका रही है।यूनान मिश्र चीन आदि की प्राचीन सभ्यताओं से भारत का घनिष्ठ संबंध रहा है और इस संबंध में अनुवाद की विशेष महत्ता रही है। बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार समूचे एशिया में अनुवाद की जीवंत परंपरा का परिणाम है। विश्व भर में गीता तथा उपनिषद के ज्ञान का अनुवाद अपने ढंग से किया जाता रहा है। पंचतंत्र के लघु संग्रहों का अनुवाद अरबी तथा अन्य यूरोपीय भाषाओं में हुआ है। वास्तव में अनुवाद एक सांस्कृतिक सेतु का काम करता है। विश्व की विभिन्न संस्कृतियों को जानने व समझने में इसकी निश्चित रूप से भूमिका सिद्ध हो। विश्व की सांस्कृतिक एकता में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। आज की भारतीय संस्कृति जिसे हम सामासिक संस्कृति कहते हैं उसके निर्माण में हजारों वर्षों के विभिन्न धर्मों, मतों एवं विश्वासों की साधना छिपी हुई है। इन सभी मतों एवं विश्वासों को आत्मसात कर जिस भारतीय संस्कृति का निर्माण हुआ है उसके पीछे अनुवाद की महत्त्वपूर्ण भूमिका असंदिग्ध है। अनुवाद एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा विभिन्न राष्ट्रों की सांस्कृतिक निधियां आज हमारे सामने हैं। अनुवाद के माध्यम से ही हम एक दूसरे की सांस्कृतिक विरासत के भागीदार बनें हैं।अवसर पर उप प्राचार्या डॉ किरण मदान व संस्कृत विभागाध्यक्षा डॉ अंजलि भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि साहित्य के अनुवाद का इतिहास काफी प्राचीन है।अनुवाद ने ना केवल विभिन्न साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है बल्कि भाषा के विकास में भी इसके योगदान को नकारा नहीं जा सकता।विश्व के विभिन्न साहित्य के बीच जो परस्पर आदान-प्रदान हुआ वह अधिकांशतः अनुवाद के माध्यम से ही हुआ है।इसके माध्यम से अन्य भाषाओं के साहित्य का अध्ययन करने से जिन नई व्यक्ति संवेदनाएं , विचारधाराओं ,  जीवन अनुभूतियों और साहित्य शैलियों का परिचय मिलता है वह हमारे जीवन के साथ-साथ हमारी चिंतन शक्ति और साहित्य सृजन को भी प्रभावित करती हैं। साथ ही उन्होंने सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी व इसी प्रकार कार्यशालाओं में भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया।

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