Friday, April 17, 2026
Newspaper and Magzine


कला विभिन्न संस्कृतियों/समुदायों और विषयों के बीच एक सेतु का काम करती है: डॉ अनुपम अरोड़ा

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at April 15, 2024 Tags: , , , ,

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्व कला दिवस रचनात्मकता के भाव के साथ मनाया गया

दीवारों पर कलाकृतियों के उकेरने के साथ कला व्याख्यान का हुआ आयोजन

BOL PANIPAT , 15 अप्रैल. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्व कला दिवस को रचनात्मकता के भाव के साथ मनाया गया जिसमें कॉलेज के कला, वाणिज्य और विज्ञान के 250 छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया । विदित रहे कि विश्व कला दिवस दुनिया भर की विभिन्न कला अभिव्यक्तियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य करता है और हमें इस बात कि   याद दिलाता है कि कला हर विषय में समाहित है और बिना इसके कोई भी विषय पूर्ण नहीं है । आज के दिन दुनिया भर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिनमें कला प्रदर्शनियां, कार्यशालाएं, व्याख्यान और सम्मेलन शामिल होते हैं । ये कार्यक्रम लोगों को कला के बारे में ज्यादा जानने और कलाकारों के साथ जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं । इसी कड़ी में कॉलेज प्रांगण में विभिन्न दीवारों पर प्रेरणाप्रद सुन्दर कलाकृतियाँ उकेरी गई और कला पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया जिसे प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने दिया । उनके साथ विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों जिनमें डॉ संगीता गुप्ता, प्रो अन्नू आहूजा, प्रो राकेश सिंगला, डॉ नवीन गोयल, डॉ एसके वर्मा, प्रो तन्नु वैद, प्रो इन्दु पूनिया आदि ने हिस्सा लिया । इस बार की विश्व कला दिवस का थीम ‘अभिव्यक्ति का उद्यान: कला के माध्यम से समुदाय का संवर्धन’ है ।

डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि विश्व कला दिवस जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में कला के महत्त्व को स्थापित करती है चाहे वह खुद कला का क्षेत्र हो, या वाणिज्य का या फिर विज्ञान का । गुरु रविन्द्र नाथ टैगोर द्वारा स्थापित शांति निकेतन इस बात का जीता-जागता सबूत है कि ज्ञान के सम्प्रेषण और इसे ग्रहण करने की क्षमता कला के माध्यम से कई गुणा बढ़ जाती है । कला के विभिन्न स्वरूपों के माध्यम से न सिर्फ ज्ञान रुचिकर बनता है बल्कि इसे सीखना और भी अधिक आसान हो जाता है । ‘सत्यम, शिवम् सुन्दरम’ की अवधारणा कला की ही सर्वोत्तम अभिव्यक्ति है । उन्होनें कहा कि 15 अप्रैल को विश्व कला दिवस मनाने की तिथि लियोनार्डो दा विंची के जन्मदिन के सम्मान में चुनी गई थी । आज भी दा विंची को इतिहास के महानतम कलाकारों में से एक माना जाता है जिन्होंने चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला, विज्ञान और इंजीनियरिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान दिया था । यह दिवस कला और रचनात्मकता के महत्व को रेखांकित करता है । कला विभिन्न संस्कृतियों और समुदायों के बीच एक सेतु का काम करती है जिससे एक दूसरे को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है । यह अवसर लोगों को उनके व्यस्त जीवन के बीच रुकने और अपने आस-पास की सुंदरता की सराहना करने के लिए एक सौम्य संकेत के रूप में कार्य करता है जो अक्सर व्यस्त कार्यक्रम के कारण उपेक्षित रहता है । समय की कमी को देखते हुए कई लोगों को नियमित रूप से कला दीर्घाओं में जाना चुनौतीपूर्ण लगता है । इसलिए यह वार्षिक उत्सव दुनिया की सुंदरता का अनुभव करने के सरल आनंद में शामिल होने के लिए एक समय पर अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है । इसके अलावा विश्व कला दिवस ज्ञान साझा करने, जिज्ञासा जगाने और व्यक्तियों के बीच आकर्षक बातचीत को बढ़ावा देने के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है ।

डॉ एसके वर्मा ने कहा कि पहली बार विश्‍व कला दिवस को मनाने की शुरुआत 15 अप्रैल 2012 को हुई थी जिसे 2015 में आधिकारिक उत्सव के रूप में लॉस एंजिल्स में मनाया गया । बाद में साल 2019 में यूनेस्को के एक सामान्य सम्मेलन में विश्‍व कला दिवस को मनाने की घोषणा की गई ।  विश्व कला दिवस कला और रचनात्मकता के महत्व को रेखांकित करता है । भारत में भी विश्व कला दिवस को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है । देश भर के कई कला संस्थानों और संग्रहालयों द्वारा कला प्रदर्शनियां, कार्यशालाएं और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं । इन कार्यक्रमों का उद्देश्य कला और रचनात्मकता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को कला की सराहना करने के लिए प्रोत्साहित करना है ।

डॉ संगीता गुप्ता ने कहा कि विश्व कला दिवस रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देता है और संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करता है । इसके माध्यम से हम आत्म-अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित और सामुदायिक बंधन को मजबूत कर सकते हैं ।  शिक्षा और सीखने को प्रेरित करना, आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देना और मानसिक और भावनात्मक भलाई को बढ़ावा देना इसके अन्य कई आयाम है ।

Comments