हरियाणा के कण-कण में समाया है श्री गुरु तेग बहादुर जी का दिव्य ज्ञान:संदीप
श्री गुरु तेग बहादुर जी ने हरियाणा के 8 जिलों में रखे अपने चरण, प्रदेश में लगभग 26 गुरुद्वारों से मिल रहा है युवा पीढ़ी को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का ज्ञान, श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाश पर्व प्रबंधन कमेटी के चेयरमैन एवं खेल मंत्री संदीप सिंह परमपरा अनुसार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को लेकर पहुंचे समागम स्थल में, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की अरदास के साथ शुरू हुआ प्रकाश पर्व
BOL PANIPAT : 24 अप्रैल। हरियाणा के कण-कण में श्री गुरु तेग बहादुर जी की वाणी का दिव्य ज्ञान समाया हुआ है। इस दिव्य ज्ञान को देने के लिए हिन्द की चादर श्री गुरु तेग बहादुर जी ने स्वयं अपने चरण डालकर हरियाणा की धरा को पावन और पवित्र करने का काम किया। इस प्रदेश के 8 से ज्यादा जिलों में श्री गुरु तेग बहादुर जी पहुंचे और संगतों को अपनी वाणी का प्रसाद दिया। अहम पहलू यह है कि प्रदेश के 8 जिलों में जहां-जहां श्री गुरु तेग बहादुर जी के चरण पड़े वहां पर उन-उन जिलों में लगभग 26 गुरुद्वारा साहिब से युवा पीढ़ी को संस्कृति और संस्कारों का ज्ञान मिल रहा है। इस पावन धरा पर श्री गुरु तेग बहादुर जी के आदर्शों, सिद्धांतों, मानवीय मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए हरियाणा सरकार ने पानीपत की धरा पर श्री गुरु तेग बहादुर जी का 400वां प्रकाशोत्सव बडे हर्षोल्लास के साथ मनाया है।
श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400 वें प्रकाश पर्व प्रबंधन कमेटी के चेयरमैन एवं हरियाणा के खेल मंत्री संदीप सिंह पानीपत समागम स्थल पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इससे पहले हरियाणा के खेल मंत्री संदीप सिंह, सांसद एवं आयोजन समिति के संयोजक संजय भाटिया, पानीपत के विधायक महिपाल ढांडा, विधायक प्रमोद विज, पूर्व चेयरमैन हरपाल सिंह चीका पहली पातशाही गुरुद्वारा साहिब में पहुंचे। यहां पर सभी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को माथा टेका और समागम स्थल पर ले जाने के लिए अरदास की। इसके बाद श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी पालकी में विराजमान होकर पंच प्यारों की अगुवाई में और भव्य नगर र्कीतन के बीच श्री गुरु तेग बहादुर जी के 400वें प्रकाशोत्सव समागम स्थल पर पहुंचे। यहां समागम स्थल प्रवेश द्वार से खेल मंत्री संदीप सिंह श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को परम्परा अनुसार मुख्य मंच पर लेकर आए। यहां पर अरदास करने के बाद परंपरा अनुसार प्रकाश पर्व का शुभारंभ हुआ।
खेल मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि देश में हरियाणा ही एक मात्र ऐसा प्रदेश है जहां मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रयासों से सरकार ने समाज के साथ मिलकर एक बहुत बडे स्तर पर प्रकाश पर्व का आयोजन किया है। इस प्रकाश पर्व का आयोजन करने का मुख्य उद्देश्य यह है कि युवा पीढ़ी श्री श्री गुरु तेग बहादुर जी की वाणी और जीवन से प्रेरणा ले सके। उन्होंने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी की प्रकाश यात्राएं 1661 से 1675 तक रही, इस दौरान श्री गुरु तेग बहादुर जी अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, करनाल, रोहतक, जींद,कैथल, सोनीपत आदि जिलों में पहुंचे। इन सभी जिलों में जहां-जहां श्री गुरु तेग बहादुर जी ने चरण रखें उन-उन जगहों पर लगभग 26 गुरुद्वारा साहिब आज भी श्री गुरु तेग बहादुर जी के आदर्शों पर चलने का संदेश दे रहे है।
उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने जून 1656 ईस्वी में करतारपुर साहिब से पहली धर्म प्रचार यात्रा सातवें गुरु हर राय साहब जी के हुक्म के साथ शुरू की। गुरु तेग बहादुर साहिब जी हरियाणा के अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर एवं करनाल आदि इलाकों से धर्म प्रचार का कार्य करते हुए पटना साहिब पहुंचे। पटना साहिब से वापसी करते हुए 21 मार्च 1664 ईस्वी को दिल्ली से हरियाणा के रोहतक, जींद, अंबाला होते हुए बाबा बकाला नगर, अमृतसर पहुंचे। गुरु पदवी पर रहते हुए अप्रैल 1665 ईस्वी में गुरु तेग बहादुर साहिब साबो की तलवंडी से कैथल, कुरुक्षेत्र, अंबाला से धर्म प्रचार करते हुए कीरतपुर साहिब पहुंचे। अगस्त 1665 ईस्वी में आनंदपुर साहिब से हरियाणा के कैथल, जींद व धमतान साहिब कई दिन धर्म प्रचार का कार्य किया और पटना, आसाम, बंगाल तक प्रचार प्रसार किया। आसाम से वापसी पर नवंबर 1670 ईस्वी में दिल्ली पहुंचे और हरियाणा के सोनीपत, रोहतक, जींद के रास्ते से आनंदपुर साहिब पहुंचे। 11 नवंबर 1675 को गुरु तेग बहादुर साहिब की शहीदी कोतवाली चांदनी चौक दिल्ली में हुई वहां से भाई जैता जी पवित्र शीश लेकर दिल्ली से बागपत हरियाणा के तरावड़ी, पिहोवा, अंबाला के रास्ते आनंदपुर साहिब पहुंचे। 1. जून 1656 कीरतपुर साहिब से हरियाणा प्रदेश के रास्ते पटना साहिब, मार्च 1664 पटना साहिब से दिल्ली, दिल्ली से हरियाणा प्रदेश के रास्ते बकाला में, पंजाब पहुंचे, अप्रैल 1665 बकाला नगर से साबो की तलवंडी से हरियाणा प्रदेश के धमतान साहिब के रास्ते कीरतपुर साहिब पहुंचे, नवम्बर 1665 आनंदपुर साहिब से हरियाणा प्रदेश के धमतान साहिब, दिल्ली, पटना साहिब, आसाम एवं बंगाल पहुंचे, नवंबर 1670 पटना साहिब से दिल्ली, दिल्ली से हरियाणा प्रदेश के रोहतक के रास्ते आनंदपुर साहिब पहुंचे। भाई जैता जी के द्वारा शीश यात्रा दिल्ली से बागपत हरियाणा के तरावड़ी, कुरुक्षेत्र, अंबाला के रास्ते आनंदपुर साहिब पहुंचे, नवंबर 1675 ईस्वी में शीश यात्रा दिल्ली से बागपत हरियाणा प्रदेश के तरावड़ी, कुरुक्षेत्र, अंबाला के रास्ते आनंदपुर साहिब पहुंची।
उन्होंने कहा कि भाई जैता जी के द्वारा नवंबर 1675 ईस्वी को श्री गुरु तेग बहादुर जी के शीश की यात्रा दिल्ली से बागपत हरियाणा प्रदेश के तरावड़ी, कुरुक्षेत्र, अंबाला के रास्ते आनंदपुर साहिब पहुंची। भाई जैता जी ने जिन जिन स्थानों पर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी का शीश रखा वहां पर गुरु तेग बहादुर जी की याद में गुरुद्वारा साहिब सुशोभित हैं। भाई जैता जी जब आनंदपुर साहिब श्री गुरु तेग बहादुर साहिब का शीश लेकर पहुंचे तो वहां पर श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने भाई जैता जी को अपने गले से लगाते हुए रंगरेटे गुरु के बेटे का खिताब दिया। भाई जैता जी की इस बहादुरी के परिणाम स्वरूप श्री गुरु गोबिंद सिंह साहिब जी ने रंगरेटा कौम को जिसे मजहबी सिक्ख कौम भी कहा जाता है श्री दरबार साहिब अमृतसर में रंगरेटों का बुँगा बनाने का प्रस्ताव पारित किया। श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के शीश को भाई जैता जी ने जिन जिन स्थानों पर रखा वह सभी स्थान वर्तमान हरियाणा प्रांत में ही आते हैं।

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