राम मंदिर में दर्शन के दौरान पानीपत के अधिवक्ता निखिल चुघ ने उठाया चढ़ावे की सुरक्षा का मुद्दा, बोले- आस्था के साथ पारदर्शिता भी जरूरी
BOL PANIPAT : अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन करने पहुंचे पानीपत के युवा अधिवक्ता एवं लेखक निखिल चुघ ने हाल ही में सामने आए मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। रामलला के दर्शन के बाद उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े स्थान पर सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही का स्तर भी उतना ही मजबूत होना चाहिए।
राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और अन्य चढ़ावे की कथित हेराफेरी को लेकर जांच चल रही है। मामले में अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी की खबर सामने आई है। जांच में चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को भी जांच के दायरे में लिया गया है।
निखिल चुघ ने रामलला के दर्शन के बाद कहा कि “राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां आने वाला व्यक्ति केवल अपना धन या चढ़ावा नहीं देता, वह अपनी श्रद्धा और विश्वास भी समर्पित करता है। इसलिए उस चढ़ावे की सुरक्षा और उसके प्रबंधन में सर्वोच्च स्तर की पारदर्शिता होनी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर और आसपास का विकसित स्वरूप देखकर प्रभावित हुए, लेकिन उनके अनुसार मंदिर के भव्य और सुव्यवस्थित क्षेत्र के साथ आसपास के इलाकों का भी समान रूप से विकास जरूरी है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सड़क, स्वच्छता, यातायात, पार्किंग और स्थानीय नागरिकों की सुविधाओं पर भी लगातार ध्यान दिया जाना चाहिए।
एक अधिवक्ता के तौर पर मामले को देखते हुए निखिल चुघ ने कहा कि आरोप और दोषसिद्धि में अंतर होता है तथा किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने का आधार केवल निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामले में जांच एजेंसियों को तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
हाल ही में पहली SIT की अंतिम रिपोर्ट में पूर्व ट्रस्ट पदाधिकारियों चंपत राय और अनिल मिश्रा को आपराधिक भूमिका से क्लीन चिट दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई है, जबकि मामले में दूसरी SIT की जांच जारी बताई गई है।
निखिल चुघ ने कहा, “रामलला के दर्शन मेरे लिए आस्था का विषय हैं, लेकिन एक नागरिक और अधिवक्ता के रूप में यह कहना भी जरूरी है कि जहां करोड़ों लोगों की श्रद्धा जुड़ी हो, वहां व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च होनी चाहिए।”
निखिल चुघ ने अपने जन्मदिन (23 August 1999) के अवसर पर अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन किए। उन्होंने कहा कि जन्मदिन पर रामलला के दरबार में पहुंचना उनके लिए विशेष अनुभव रहा और इस यात्रा ने उन्हें आस्था के साथ-साथ मंदिर व्यवस्था, सुरक्षा और आसपास के विकास को करीब से देखने का अवसर भी दिया।
उन्होंने कहा कि “राम मंदिर की भव्यता देखकर गर्व होता है, लेकिन मंदिर के आसपास के क्षेत्रों का समग्र विकास और श्रद्धालुओं के विश्वास की पूरी सुरक्षा ही अयोध्या के विकास को और अधिक सार्थक बनाएगी।”

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