कानून की किताब से साहित्य के मंच तक: पानीपत के अधिवक्ता निखिल चुघ Indian Literature Award 2026 से सम्मानित
BOL PANIPAT । अधिवक्ता, लेखक एवं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य निखिल चुघ को साहित्य एवं कानूनी जागरूकता के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए Indian Literature Award 2026 – Literature, Haryana State से सम्मानित किया गया है। उनकी लेखनी के माध्यम से कानून को सरल भाषा में आम नागरिकों तक पहुंचाने के प्रयास को इस सम्मान के जरिए पहचान मिली है।
निखिल चुघ को यह सम्मान उनकी पुस्तक “Legal Rights Every Citizen Must Know: FIR, Bail and Police Procedure Under India’s New Criminal Laws (BNSS 2023)” के लिए प्रदान किया गया है। उनकी यह पुस्तक कानूनी विषयों को कठिन कानूनी भाषा के बजाय सरल, व्यावहारिक और आम नागरिक के लिए समझने योग्य तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास है।
एक अधिवक्ता के रूप में न्यायालय में कानून को समझने और लागू करने के अनुभव को उन्होंने अपनी लेखनी से समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया है। FIR, गिरफ्तारी, जमानत, पुलिस प्रक्रिया और नागरिकों के कानूनी अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों को पुस्तक के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना उनके साहित्यिक कार्य का प्रमुख हिस्सा है।
निखिल चुघ का कहना है कि उनकी लेखन यात्रा का उद्देश्य केवल पुस्तक लिखना नहीं, बल्कि कानून को लोगों तक पहुंचाना है। उनका मानना है कि जिस नागरिक को अपने अधिकारों और कानून की जानकारी है, वह अपने साथ होने वाली किसी भी कानूनी परिस्थिति का अधिक समझदारी से सामना कर सकता है।
उनका Mission है—कानून को सरल भाषा में आम नागरिक तक पहुंचाना और कानूनी जागरूकता को समाज के प्रत्येक वर्ग तक ले जाना। वहीं उनका Vision एक ऐसे जागरूक समाज का निर्माण करना है जहां कानून केवल अदालतों, वकीलों और कानूनी पुस्तकों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक नागरिक के लिए समझने योग्य और सुलभ हो।
निखिल चुघ ने कहा कि Indian Literature Award 2026 उनके लिए केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि कानून और साहित्य के माध्यम से समाज के लिए कुछ सार्थक करने की जिम्मेदारी को और मजबूत करने वाला अवसर है। उनका प्रयास आगे भी कानूनी लेखन, नागरिक जागरूकता और शिक्षा के माध्यम से कानून को सरल और जन-सुलभ बनाने की दिशा में जारी रहेगा।
कानून के पेशे से साहित्य तक का यह सफर पानीपत के युवा अधिवक्ता निखिल चुघ के उस प्रयास को दर्शाता है, जिसमें न्याय की समझ को अदालत से निकालकर समाज के हर नागरिक तक पहुंचाने का लक्ष्य दिखाई देता है।

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