Friday, April 17, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के सहयोग से  हिंदी दिवस समारोह का भव्य आयोजन.

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at September 14, 2024 Tags: , , , ,

‘हिंदी दिवस का है आह्वान, करें सौ प्रतिशत मतदान’: प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा (सरंक्षक, अखिल भारतीय साहित्य परिषद्)

हिंदी हमारी राष्ट्रीयता एवं अस्तित्त्व का मूल आधार : प्रदीप शर्मा, अध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद्

BOL PANIPAT, 14 सितम्बर, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के सहयोग से हिंदी दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया. इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता और अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के अध्यक्ष प्रदीप शर्मा तथा सरंक्षक, अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, डॉ. अनुपम अरोड़ा रहे. कार्यक्रम में सांस्कृतिक गतिविधियों की प्रभारी डॉ संगीता गुप्ता, डॉ. संतोष कुमारी, डॉ. कविता, डॉ. जुगमती, प्रो सचिन, प्रो किरण मलिक, प्रो सुमन, प्रो ममता आदि ने शिरकत की. 14 सितम्बर 1949 को constituent assembly  द्वारा हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया था इसलिए प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है. हिंदी दिवस का महत्व भारत में भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रति गहरी भावना और समर्पण का प्रतीक है. हिंदी दिवस भारत की एकता और एकजुटता का प्रतीक है. हिंदी भाषा भारत की विविधता को एक साथ लाने में मदद करती है और भारतीय संगठन को एक बनाने का काम करती है. हिंदी भाषा भारतीय समाज में एकता और एकजुटता की संजीवनी है और देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लोगों को एक साथ लाती है. कार्यक्रम में प्रो सचिन, डॉ जुगमती, प्रो ममता, प्रो शिवरानी और डॉ संतोष कुमारी ने अपने स्वरचित कवितओं का पाठ किया. मंच संचालन प्रो कविता ने किया.

प्रो जगमती ने कहा कि अन्य भाषा को मैंने किताबो में रखा हिंदी को सब जगह अपने भावो में रखा.

 प्रो मीतू सैनी ने गाया “वतन की शान है हिंदी वतन की आन है हिंदी”

 प्रो सचिन ने हिंदी दिवस की सबको बधाईयां दी

इस अवसर पर हिंदी दिवस भाषण प्रतियोगिता और कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमे लगभग 75 प्रतिभागियों ने भाग लिया जिसके परिणाम इस प्रकार है  

हिंदी दिवस भाषण प्रतियोगिता परिणाम

1.     प्रथम    –     सौरव, एम.कॉम. प्रथम

2.     द्वितीय   –     खुशबु, बी.कॉम. द्वितीय

3.     तृतीय    –     सिम्पी, बी.ए. तृतीय

आंचल, एम.ए. प्रथम राजनितिक विज्ञान

कविता पाठ प्रतियोगिता परिणाम

1.     प्रथम    –     पंकज, बी.कॉम. द्वितीय

2.     द्वितीय   –     मोहित, बी.ए. द्वितीय

3.     तृतीय    –     खुशबु गुप्ता, बी.कॉम. ओनर्स द्वितीय

सानिया, बी.ए. प्रथम

प्रदीप शर्मा वरिष्ठ अधिवक्ता और अध्यक्ष अखिल भारतीय साहित्य परिषद् ने  हिंदी की अविरल धारा को हमेशा आगे बढ़ाने के लिए सभी का आह्वान किया. उन्होंने खा की ये विडम्बना ही है कि न्यायालयों में अधिवक्ता जब अग्रेजी में मुकदमे की पैरवी करते है तो उनके मुवक्किल को एक अक्षर भी समझ नही आता की उनके भाग्य का निर्णय होते समय आखिर बोला क्या जा रहा है. उन्होंने हिंदी भाषा के उद्भव और विकास पर भी विस्तार से प्रकाश डाला. हिंदी भाषा के प्रयोग से न सिर्फ हमारा उच्चारण शुद्ध होता है बल्कि हिंदी हमारे रग-रग में समाहित होकर हमारी संस्कृति को भी संजोती है. आज हिंदी जनमानस की भाषा बन गई है. हिंदी अब सर्वव्यापक है बस इसको लेकर हमें अपनी सोच बदलनी होगी. वर्तमान में सरकारी कार्यालयों में भी हिंदी का प्रयोग बढ़ा है.

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने अपने वक्तव्य में कहा कि मानविक एवं कला के विषय ही एक मात्र विषय है जो समाज के भले और इंसानियत के भाव को संजोते और आगे बढाते है. भाषा इंसान को इन्सान से जोड़कर इंसानियत का पैगाम देती है. हिंदी मात्र एक भाषा नहीं अपितु राष्ट्रीय संस्कृति की प्रतीक, ध्वजवाहक एवं संरक्षक है. तकनीक के इस युग में पाश्चात्य प्रभाव से विदेशी भाषाओं का विशेष तौर पर अंग्रेजी का प्रचलन यद्यपि बढ़ा है. परंतु भारत राष्ट्र एवं इसके नागरिकों में युवा पीढ़ी में राष्ट्रीय मुद्दों व संस्कृति का विनाश न हो इस दृष्टिकोण से हिंदी के महत्व को हमें पूर्णतया समझना और अपनाना है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित में सभी को निरंतर प्रयास करने चाहिए ताकि हिंदी भारतीय युवा में लोकप्रिय रहे और हमारे युवा जितना हिंदी से जुड़ पाएंगे उतने ही जिम्मेदार व समर्पित नागरिक बन पाएंगे. किसी दूसरी भाषा पर दोष मढ़ने की आदत से हमें बचना होगा. अगर हिंदी को उसका उचित स्थान हम दिला नहीं पाए है तो इसके लिए सिर्फ हम जिम्मेदार है कोई और नहीं. उन्होंने कहा कि प्रत्येक हिंदी प्रेमी का एक कर्तव्य है कि राष्ट्र एकीकृत हो, लोकतंत्र सुदृढ़ हो व प्रत्येक नागरिक की सशक्त लोकतंत्र के निर्माण अपेक्षित भूमिका हो. उन्होंने सभी युवाओं को स्लोगन दिया: हिंदी दिवस का है आहवान करें सौ प्रतिशत मतदान.

  डॉ जुगमती ने अपनी स्वरचित कविता पेश कर सभी को भाव विभोर कर दिया–

           हिंदी में अक्षर साफ़ सभी, बिंदी की भी जगह बड़ी,

कोई अक्षर खामोश नहीं, अनदेखा जो कर पाओ कभी,

छोटे-बड़े का भेद नहीं, आधे अक्षर से खेद नहीं,

आधा भी जाता नहीं व्यर्थ, मिलकर देता पूर्ण अर्थ.

अंग्रेजी की प्राध्यापिका एवम हिंदी लेखिका डॉ संतोष कुमारी ने कहा कि हम हिंदी को सिर्फ पड़ते या बोलते नही बल्कि जीते है. हम स्वप्न आज भी अपनी मत्री भाषा हिंदी में ही देखते है. उन्हें व सभी हिंदी शिक्षकों को हिंदी का शिक्षक होने पर गर्व है क्योंकि हिंदी मात्र सफलता ही नहीं संस्कार की भाषा है. उन्होंने बल दिया कि प्रत्येक व्यक्ति चाहे उसका कोई भी रोजगार या व्यवसाय क्यों न हो उसे कुछ न कुछ हिंदी साहित्य का अध्ययन करते रहना चाहिए. यह व्यक्तित्व में पूर्णता व स्थिरता के लिए नितांत आवश्यक है.

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