प्रॉपर्टी आईडी या एनडीसी बनवाने वाले लोगों को सौगात
तत्काल समाधान : लोग पांच हजार रुपए फीस देकर महज दो दिन में अपनी प्रॉपर्टी आईडी और नो ड्यूज सर्टिफिकेट (NDC) प्राप्त कर सकते हैं।
BOL PANIPAT : हरियाणा शहरी निकाय विभाग ने अपने पोर्टल पर एक नया फीचर उपलब्ध कराया है जिसके चलते अब प्रॉपर्टी आईडी व नो ड्यूज सर्टिफिकेट मात्र 2 दिन में ही उपलब्ध हो जाएगा।
निकाय के पोर्टल पर इस सेवा को तत्काल सेवा का नाम दिया गया है। प्रॉपर्टी आईडी व एनडीसी को लेकर पानीपत नगर निगम में पिछले काफी दिनों से लोग परेशान हो रहे थे लोगों का कहना था कि रोजाना धक्के खा कर चले जाते हैं परंतु काम नहीं हो पा रहा था। ऐसी शिकायतें भी आ रही थी कि इन सब कामों को करवाने की एवज में दलाल सक्रिय हो रहे थे जिसकी वजह से पानीपत नगर निगम में भ्रष्टाचार व दलाली जैसे शब्द हर मीटिंग में उठाए जाते थे। आम लोगों के काम ना होने की वजह से जनप्रतिनिधियों को भी लोग कोस रहे थे। अब तत्काल सेवा पोर्टल पर उपलब्ध होने के बाद उम्मीद जगी है कि लोग तत्काल सेवा का उपयोग कर तुरंत प्रॉपर्टी आईडी व एनडीसी लेने का काम कर सकेंगे।
यहां शहर के लोग पांच हजार रुपए फीस देकर महज दो दिन में अपनी प्रॉपर्टी आईडी और नो ड्यूज सर्टिफिकेट (NDC) प्राप्त कर सकते हैं। खास बात यह है कि अगर दो कार्य दिवस में आवेदनकर्ता को उनकी प्रॉपर्टी आईडी या एन.डी.सी नहीं मिली तो निगम को उसकी फीस वापस करनी होगी।
इसके अलावा आवेदनकर्ता को एक हजार रुपए बतौर हर्जाना भी देना होगा। इसे लेकर सरकार ने निगम अधिकारियों और कर्मचारियों को सतर्क रहने और नियमानुसार काम करने की हिदायत भी दी है।
पोर्टल पर इस विकल्प के चालू होने से जहां शहरवासियों को सुविधा मिलेगी, वहीं निगम की आय भी बढे़गी। इसके अलावा जो दलाल और नेता एक ही दिन में प्रॉपर्टी आईडी या एनडीसी बनवाने का काम करते आ रहे हैं, उन पर भी नकेल कसी जाएगी। क्योंकि अगर एक या दो दिन में उनकी आईडी या एनडीसी बनती है तो इसका सीधा नुकसान निगम को प्रति फाइल पांच हजार रुपए का होगा।
इस शुल्क में शहरवासी संपत्ति में अपना नाम, संपत्ति का पता, मोबाइल नंबर बदलवा सकते हैं। इसके अलावा बकाया शुल्क को अपडेट कराया जा सकता है। संपत्ति के साइज को भी अपडेट कराया जा सकता है। संपत्ति की कैटेगरी को बदलने के लिए भी आवेदन किया जा सकता है।
अनाधिकृत से अधिकृत यानी वैध एरिया में शामिल करने के लिए भी अपील की जा सकती है। इसके अलावा किसी भी संपत्ति के लिए नई प्रॉपर्टी आईडी बनवाने के लिए भी आवेदन किया जा सकता है। यह आवेदन टैक्स मैनेजमेंट सिस्टम के पोर्टल पर ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा। यहीं से संबंधित फाइल पर ऑब्जेक्शन देकर इसका समाधान करने का विकल्प है।
उपरोक्त सभी प्रकार की आपत्तियां निगम के अधिकारियों को उनके स्तर के हिसाब से अलग-अलग दिखाई देंगी। इनमें मेकर, चेकर, एडमिन, सीएमसी और डीएमसी के स्तर के अधिकारियों को ही शामिल किया जाएगा। दो कार्यदिवस में इन आपत्तियों का अधिकारियों को समाधान करना होगा।
अगर फाइल रिजेक्ट की जाती है तो उसका उपयुक्त और सही जवाब भी देना होगा। दो दिन में समाधान न होने पर पांच हजार रुपये फीस, एक हजार रुपये हर्जाने समेत वापस करनी होगी। कुछ ही शर्तों में हर्जाना नहीं दिया जा सकेगा, जिसमें सर्वर डाउन या पोर्टल बंद रहने जैसे शर्तें होंगी। अधिकारियों को इसकी जागरूकता के लिए उपयुक्त प्रबंध भी करने होंगे।

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