Saturday, April 18, 2026
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कलियुग में नाम संकीर्तन के अलावा जीव के उद्धार का अन्य कोई भी उपाय नहीं है:-देवी चित्रलेखा जी

By LALIT SHARMA , in RELIGIOUS , at February 27, 2024 Tags: , , , ,

BOL PANIPAT : सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस में आज देवी चित्रलेखा जी ने बताया की बीते 4 दिन की कथा श्रवण करने की थी जिसे धारण करना था। परंतु अब 3 दिन की कथा  को महसूस करना है देखना है और भाव के साथ मिल कर भगवान की लीलाओं में शामिल होना है।  देवी जी ने सर्वप्रथम बताया की कैसे भगवान का दर्शन करने के लिए सारी सृष्टि नन्द भवन की ओर प्रस्थान करने लगी।  समस्त ग्राम वासी, देवता, गंधर्व, आदि आदि भगवान के बाल स्वरुप का दर्शन करने पधारे।  और माता यशोदा ने नंद महल के सारे भंडार खोल दिए नंद बाबा ने झोली भर भर बधाइयाँ लुटाई। आज सबकी इच्छा पूरी हो रही है कुबेर ने भण्डार खोल दिया है और लोग ऐसे बधाइयाँ लूटा रहे है जैसे गोविन्द के उन्ही की घर जन्म लिया हो।
फिर भगवान् की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया के बिना भाव के भक्ति संभव नहीं । भाव होने से भगवान् खुद भक्त को समर्पित हो जाते है  जीव को भगवान के साथ किसी किसी रिश्ते से जुड़ना पड़ता है चाहे भगवान् को वह अपना पिता स्वीकार करे मित्र या फिर प्रियतम। प्रसंगों में देवी जी ने कंश मामा द्वारा भेजी गयी पूतना, शकटासुर, बकासुर आदि आदि राक्षसों के वध की कथा सुनाई और यमला अर्जुन नाम के दो शापित वृक्षों को भगवान की बाल लीला द्वारा मुक्त कराने की कथा सुनाई। आगे भगवान की लीला में माखन चोरी का प्रसंग बताया की कैसे भगवान ने माखन के साथ गोपियों का मन चुराया और गोपियों के चीर हरण कर के उन्हें पवित्र जल श्रोतों में न स्नान करने की शिक्षा दी। पश्चात भगवान की 7 वर्ष की उम्र में की गयी गोवर्धन लीला का श्रवण कराया की कैसे भगवान ने इंद्रदेव का घमंड चूर किया और इष्ट श्रद्धा का पाठ वृजवाषियों को पढाया। भगवान ने गिरिराज पर्वत उठाकर इंद्र द्वारा की गयी मूसलाधार बारिश से वृजवाषियों को शरण दी। कथा के मध्य गाए गए भजनों पर भक्तों ने झूम झूम कर नृत्य किया। और मनोहर झांकियों के द्वारा कथा का दर्शन पान कराया गया। आज के मुख्य अतिथि महेंद्र मुंजाल जी, रमेश जिंदल जी, अंजू भाटिया  धर्मपत्नी सांसद संजय भाटिया , राजीव जैन , रमेश जांगड़ा, श्रीनिवास वत्स, संजय सिंह, अंकित गोयल,  सुभाष कंसल, बबलु राणा,  कपिल गोयल, मनोज जैन, गोपाल रोहिल्ला, राम निवास जी, लोकेश शर्मा, सुभाष कौशिक, निमाई मास्टर, हरीश चुघ  और संस्था के सभी पदाधिकारी कथा में मुख्य रूप  से मौजूद रहे

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