महिला अनुसंधान अधिकारियों को महिला विरुद्ध अपराध और पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों की जानकारी दी
BOL PANIPAT, 17 अप्रैल : पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल भा.पु.से. के आदेशानुसार और पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह भा.पु.से. के मार्गदर्शन में महिला अनुसंधान अधिकारियों को तीन नए कानूनों तथा महिला विरुद्ध अपराध और पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों की जानकारी देने के लिए शुक्रवार को जिला सचिवालय स्थित पुलिस विभाग के सभागार में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया।
डीएसपी महिला विरूद्ध अपराध नवीन संधू ने कार्यक्रम की अध्यक्षात की। उप जिला न्यायवादी अश्वनी ओहल्याण व सहायक जिला न्यायवादी सतेंद्र कुमार और सहायक जिला न्यायवादी रमन चौधरी ने सेमिनार में अनुसंधान अधिकारियों को उक्त प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी। सेमिनार में अनुसंधान अधिकारियों ने भी सक्रिय रूप से भाग लेते हुए अपने अनुभव साझा किए और जटिल मामलों में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की। कानूनी विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी देकर इनका समाधान किया।
उप जिला न्यायवादी अश्वनी ओहल्याण ने महिला उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, दुष्कर्म, छेड़छाड़ एवं साइबर अपराधों जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन अपराधों की जांच करते समय प्रत्येक साक्ष्य का वैधानिक तरीके से संकलन एवं संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, जिससे न्यायालय में मामलों की सशक्त पैरवी की जा सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महिला एवं बाल अपराधों के मामलों में त्वरित, निष्पक्ष एवं साक्ष्य आधारित जांच अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी महिला अनुसंधान अधिकारियों को बताया कि कानून के प्रति सजग रहते हुए पीड़ितों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार अपनाएं।
सहायक जिला न्यायवादी रमन चौधरी ने पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत बालकों के संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। इसमें बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों की रिपोर्टिंग, पीड़ित का बयान दर्ज करने की प्रक्रिया, मेडिकल परीक्षण, चार्जशीट तैयार करने तथा न्यायिक प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने इस बात पर विशेष रूप से जोर दिया कि बाल पीड़ितों के साथ संवेदनशील एवं मानवीय व्यवहार अपनाना चाहिए, ताकि वे बिना भय के अपनी बात रख सकें।
सहायक जिला न्यायवादी सतेंद्र कुमार ने पॉक्सो एक्ट व महिला संबंधित अपराधों में अनुसंधान के बारे में विभिन्न बिन्दुओं पर ध्यान रखने वाली जानकारी दी। अनुसंधान अधिकारियों को बताया कि पॉक्सो एक्ट के मामलो में पीड़िता के 183 बीएनएस के बयान अनिवार्य रूप से करवाए जाएं। पीड़ित पक्ष की काउंसिलिंग भी अनिवार्य रूप से करायें। पीड़िता की पहचान भी गोपनीय रखी जाये इत्यादी की जानकारी दी।
सेमिनार में संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता, महिला थाना प्रभारी इंस्पेक्टर रेखा और थाना चौकी से आई महिला अनुसंधान अधिकारी मौजूद रही।

Comments