स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में पुलिस ने प्रदर्शनी लगाकर तीन नए आपराधिक कानूनों की जानकारी दी.
BOL PANIPAT : 16 अगस्त 2024, देशभर में लागू हुए तीन नए आपराधिक कानूनों की प्रत्येक नागरिक तक जानकारी पहुंचाने के लिए जिला स्तरीय स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में जिला पुलिस ने प्रवेश द्वारा पर प्रदर्शनी लगाकर नए कानूनों से अवगत कराया और तीनों नए कानूनों की जानकारी से अंकित पंपलेट वितरित किये। कार्यक्रम में यह मुख्य रूप से आकर्षण का केंद्र रहा।
1 जूलाई 2024 से भारतीय दंड संहिता के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), दंड प्रक्रिया संहिता के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और इंडियन एविडेंस एक्ट के स्थान पर अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) प्रभाव में आ चुके हैं।
इनके प्रभाव में आने से अब हत्या के मामले में 302 आईपीसी की जगह 103 बीएनएस, हत्या के प्रयास के लिए धारा 307 आईपीसी की जगह 109 बीएनएस, धमकी देना धारा 506 आईपीसी की जगह 351 बीएनएस, किसी से ठगी करना धारा 420 आईपीसी की जगह धारा 318 बीएनएस, चोरी करना 379 आईपीसी की जगह 303 बीएनएस, घर के अंदर घूसकर चोरी धारा 380 आईपीसी की जगह अब धारा 305 बीएनएस ने ले लिया है।
पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत ने नए कानून व उसमें हुए बदलाव की जानकारी देते हुए बताया कि नए कानूनों में दिए गए प्रावधानों में प्रत्येक कार्रवाई के लिए निश्चित समय सीमा निधारित की गई। पुलिस को शिकायत मिलने के 3 दिन के अंदर एफआईआर दर्ज करनी होगी। जिन केसों में 3 से 7 साल सजा का प्रावधान है उन केसों में थाना प्रभारी, उप पुलिस अधीक्षक अथवा उससे वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति लेकर एफआईआर दर्ज करने से पहले 14 दिन के भीतर प्रारंभिक जांच कर सकते है। प्रारंभिक जांच के बाद एफआईआर दर्ज करनी होगी। एफआईआर दर्ज करने के बाद पीड़ित को मुकदमें की प्रगति बारे एसएमएस या अन्य इलेक्ट्रोनिक्स माध्यमों द्वारा 90 दिनों के अंदर अंदर जानकारी प्रदान की जाएगी।
नए कानून में समयबद्ध न्याय के लिए माननीय न्यायालय व पुलिस के लिए सीमाएं भी निर्धारित की गई
ट्रायल कोर्ट को हर फैसला अधिक से अधिक तीन साल में देना होगा। महिला विरूद्व अपराध से संबंधित मामलों में 60 दिन के अंदर अंदर जांच पूरी कर माननीय न्यायालय में चालान पेश करना होगा। दोषी द्वारा चालान की प्रति प्राप्त करने उपरांत 60 दिन के अंदर अंदर माननीय न्यायालय में चार्जशीट करना अनिवार्य होगा। नये कानून के अनुसार इलेक्ट्रोनिक्स माध्यम/वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही रिकार्ड की जा सकेगी। मुकदमें में बहस/दलीलें पूर्ण होनें उपरांत माननीय न्यायालय द्वारा 30 दिन में फैसला देना अनिवार्य होगा व जिससे अधिकतम 45 दिनों की अवधि तक बढ़ाया जा सकता है। अन्य संगीन मामलों में 90 दिन में जांच पूरी कर चालान पेश करना होगा।
नए कानून के तहत पुलिस संगीन मामलों में अब 60 दिन के अंदर दोबारा से रिमांड ले सकती है। संगीन मामलों में पुलिस अब आरोपियों को हथकड़ी लगाकर भी माननीय न्यायालय में पेश सकती हैं। नए कानून में छोटे अपराध जिनमें 3 वर्ष से कम की सजा है, उनमें आरोपित यदि 60 वर्ष से अधिक आयु का है तो उसकी गिरफ्तारी के लिए उप पुलिस अधीक्षक या उससे वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति लेना अनिवार्य है। गंभीर अपराध की सूचना पर घटनास्थल पर बिना विचार करे शून्य एफआइआर दर्ज होगी।
पुलिस की कार्रवाई में जवाबदेगी और पारदर्शिता को महत्व दिया गया है। तलाशी और जब्ती के दौरान वीडियोग्राफी को अनिवार्य कर दिया गया है।
पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत ने बताया कि दुष्कर्म व पाक्सो एक्ट के मामलों में जांच 2 माह के भीतर पूरी करनी होगी। नए कानून के तहत पीड़ित को 90 दिन के भीतर अपने मामले की प्रगति पर नियमित रूप से जानकारी पाने का अधिकार होगा।
संगठित अपराध पर विशेष प्रावधान
नए कानून में संगठित अपराध पर विशेष प्रावधान है। संगठित गैंग, सिंडिकेट चलाने वाले गिरोह के आरोपियों द्वारा अपराध कर काली कमाई से अर्जित की संपत्ति को अटेच करने के प्रावधान बारे विशेष रूप से दिया गया। अब जांच अधिकारी पुलिस अधीक्षक के माध्यम से माननीय न्यायालय में अपील कर आरोपियों की इस प्रकार से अर्जित की संपत्ति अटेच करवा सकेगा

Comments