Tuesday, October 6, 2026
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खेत में फसल अवशेष मिलाने से बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरा शक्ति, किसान पर्यावरण संरक्षण में निभाएं अग्रणी भूमिका: उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at October 6, 2026 Tags: , , , , ,

फसल अवशेष जलाने की बजाय मिट्टी में मिलाएं किसान, अगली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखें खेती

पेस्टिसाइड के संतुलित उपयोग और प्राकृतिक खेती को दें बढ़ावा, स्वस्थ समाज के लिए जरूरी है सुरक्षित खेती

सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर आधुनिक और टिकाऊ खेती की ओर बढ़ें किसान: अवतार शास्त्री

BOL PANIPAT , 6 अक्टूबर। फसल अवशेष प्रबंधन एवं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (तिलहन) के अंतर्गत मंगलवार को नई अनाज मंडी में जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि फसल अवशेषों को जलाने की बजाय खेत में ही उपयोग करें और मिट्टी में मिलाकर उसकी उर्वरा शक्ति बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि खेती को बंजर होने से बचाना और आने वाली पीढिय़ों के लिए उपजाऊ भूमि सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि किसान खेत में फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन कर न केवल पर्यावरण को प्रदूषण से बचा सकते हैं, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता को भी बनाए रख सकते हैं। पशुओं के चारे और ईंधन की व्यवस्था पर बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है, जबकि फसल अवशेषों का उचित उपयोग कर इन जरूरतों को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। उपायुक्त ने कहा कि खेत में फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से जैविक तत्व बढ़ते हैं और भूमि की उर्वरा शक्ति मजबूत होती है। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन को केवल सरकारी अभियान न समझें, बल्कि इसे अपनी खेती का स्थायी हिस्सा बनाएं।

  उपायुक्त ने कहा कि हमें स्वयं जागरूक होने के साथ-साथ दूसरे किसानों को भी फसल अवशेष न जलाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। यदि हम आज मिट्टी और पर्यावरण को सुरक्षित रखेंगे तो इसका लाभ हमारी अगली पीढ़ी को भी मिलेगा। उपायुक्त ने पेस्टिसाइड के अंधाधुंध प्रयोग से बचने का आह्वान करते हुए कहा कि खेती में जरूरत के अनुसार और विशेषज्ञों की सलाह से ही कृषि रसायनों का प्रयोग किया जाना चाहिए।  

    उपायुक्त डॉ हरीश ने कहा कि लगातार बढ़ती बीमारियों और बिगड़ते पर्यावरण को देखते हुए हमें अपनी कृषि पद्धतियों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। स्वस्थ मिट्टी, स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित खाद्य उत्पादन ही स्वस्थ समाज का आधार है। उपायुक्त ने कहा कि हरियाणा का किसान हमेशा प्रगतिशील रहा है और सरकार किसानों को आधुनिक, टिकाऊ एवं लाभकारी खेती के लिए हर संभव सहयोग उपलब्ध करा रही है। उन्होंने किसानों को विभागीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया और कहा कि वे किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए हर समय उपलब्ध हैं।

    कार्यक्रम में पहुंचने पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. बलवंत सहारण ने उपायुक्त का बुके देकर स्वागत किया। इसके बाद उपायुक्त ने मंडी परिसर में विभाग की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों पर किसानों को दी जा रही जानकारी और प्रदर्शित कृषि तकनीकों की सराहना की।  

प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्राकृतिक खेती, गन्ना किसान जागरूकता, उद्यान विभाग तथा हरियाणा बीज विकास निगम सहित विभिन्न विभागों एवं संस्थानों की ओर से स्टॉल लगाए गए थे। किसानों ने इन स्टॉलों पर पहुंचकर विशेषज्ञों से आधुनिक कृषि तकनीकों एवं सरकार की योजनाओं की जानकारी प्राप्त की।

उपनिदेशक डॉ. बलवंत सहारण ने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन समय की सबसे बड़ी कृषि आवश्यकता है। किसानों को फसल अवशेष जलाने की बजाय आधुनिक मशीनरी और वैज्ञानिक तकनीकों की सहायता से उनका खेत में ही प्रबंधन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभाग किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए लगातार जागरूक कर रहा है और सरकार की योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए विभागीय अधिकारी गांव-गांव तक जानकारी पहुंचा रहे हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेष न जलाने का संकल्प लें और पर्यावरण संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

    मार्केट कमेटी चेयरमैन अवतार शास्त्री ने कहा कि सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ खेती को आधुनिक और टिकाऊ बनाने के लिए अनेक योजनाएं चला रही है। किसानों को इन योजनाओं की जानकारी लेकर पात्रतानुसार उनका लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान जागरूक होकर नई कृषि तकनीकों को अपनाएंगे तो खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने किसानों से फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने तथा पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देने का आह्वान किया।

    इस दौरान विभाग की ओर से प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें पुरुष एवं महिला किसानों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में कृषि से संबंधित प्रश्न पूछकर किसानों के ज्ञान को परखा गया। विभिन्न कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों, सरकारी योजनाओं तथा फसल अवशेष प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी। कृषि विभाग के एसडीओ देवेंद्र कुमार ने धन्यवाद करते हुए कहा कि विभाग फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए पूरी तरह सजग है। उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास रहेगा कि फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में लगातार कमी लाते हुए पानीपत जिला प्रदेश में अग्रणी स्थान प्राप्त करे। इस मौके पर डीडीए डॉ बलवंत सहारण, डीएचओ संदीप, कृषि सहायक अभियंता सुधीर, डॉ. राधेश्याम, डॉ राजीव,डॉ. मेघराज पंवार, एसडीओ डॉ. राजेश भारद्वाज, डॉ. माणिक, डॉ. सुमित संधू सहित कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, किसान और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

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