Friday, April 17, 2026
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बहाने बनाने वालों की नहीं बल्कि बहानों को मारने वालों की होती है जीत: राजीव रतन आई.ए.एस. कमिश्नर करनाल मंडल 

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at August 21, 2024 Tags: , , , , ,

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में राज्य स्तरीय सात दिवसीय ‘पानीपत महोत्सव तृतीय पुस्तक मेला’ का पांचवां दिन 

BOL PANIPAT, 21 अगस्त, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में राज्य स्तरीय सात दिवसीय ‘पानीपत महोत्सव – तृतीय पुस्तक मेला’ जो हरियाणा पुलिस की पहल, जिला प्रशासन के सानिध्य और नगर निगम पानीपत, जिला परिवहन विभाग पानीपत, महिला बाल विकास पानीपत, पंचायत विभाग पानीपत, राजभाषा अनुभाग इंडियन आयल पानीपत, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग हरियाणा और आयुष विभाग के सहयोग से आयोजित है, के पांचवें दिन बतौर मुख्य अतिथि राजीव रतन आई.ए.एस. कमिश्नर करनाल मंडल ने शिरकत की । बतौर विशिष्ट अतिथि एलएन जिंदल जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरियाणा और  मुकेश भारद्वाज सम्पादक जनसत्ता ने कार्यक्रम में शिरकत की । उनके साथ डॉ दिनेश कुमार राज्य एन.एस.एस. अधिकारी, निशा पंचकूला मीडिया सेल, डॉ अजय गर्ग प्राचार्य आई.बी.कॉलेज पानीपत ने कार्यक्रम की शोभा बढाई । मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, डॉ संगीता गुप्ता, डॉ संतोष कुमारी और डॉ राकेश गर्ग ने शाल, पौधा रोपित गमले और पुस्तकें भेंट करके किया । पांचवें दिन का थीम ‘भारतीय भाषाओं में अंतर्संबंध – राजभाषा हिंदी के क्षितिज का विस्तार’ रहा । कार्यक्रम में व्यवस्था और अनुशासन की जिम्मेदारी राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने संभाली । उधर जारी पुस्तक मेले में देशभर से आये 40 से अधिक प्रकाशकों ने हज़ारों की संख्या में अपनी पुस्तकों को प्रदर्शित किया जिसे लेकर छात्र-छात्राओं, प्राध्यापकों और आगुन्तकों में उत्साह नज़र आया । पुस्तक मेला प्रतिदिन सुबह 10 बजे से सांय 7 बजे तक जारी रहेगा जिसमे पानीपत के प्रत्येक नागरिक का पधारने पर स्वागत है । पिछले चार दिन में अब तक 8 लाख रुपये से अधिक की पुस्तकें बिक चुकी है ।

राजीव रतन आई.ए.एस. कमिश्नर करनाल मंडल ने उपस्थित छात्र-छात्राओं के साथ जिवंत संवाद किया । उन्होनें कहा कि व्यक्तित्व में परिपक्वता पुस्तकों को पढने से आती है । उन्हें विद्यार्थियों से पुस्तकों को चुनकर पढने आ आग्रह किया । फ़ालतू पुस्तकें पढने की बजाये अपने पाठ्यक्रम की पुस्तकें ही अगर हम पढ़ ले तो यह हमारे भविष्य के लिए बेहतर होगा । सबसे पहले हमें अपनी आजीविका को सुनिश्चित करना चाहिए । उज्जवल भविष्य के लिए उन्होनें महत्वाकांक्षा, क्षमता, उद्देश्य और लक्ष्य को पाने जैसे फार्मूले को विद्यार्थियों के साथ साझा किया । हमें अपनी क्षमताओं को अच्छे से आंकना चाहिए और फिर उसी कार्य को अपनाना चाहिए जिसे हम कर पाए । जीवन में स्थिति के अनुसार फैसले लेने वाला व्यक्ति अधिक कामयाब होता है । हमें परिश्रम और नवीनतम ज्ञान से खुद को सैदेव जोड़कर रखना चाहिए । बहाने बनाने वालों की  नहीं बल्कि बहानों को मारने वालों की जीत होती है । हमें सबसे पहले खुद का भविष्य बनाना चाहिए, तभी इस देश का भविष्य बनेगा । अपने जीवन में घटी घटनाओं को उन्होनें विद्यार्थियों के साथ बांटकर उनके हौंसला बढाया ।

मुकेश भारद्वाज सम्पादक जनसत्ता ने सर्वप्रथम गुलज़ार कृत कविता को सबके सामने पढ़ा:-

किताबें झाँकती हैं बंद अलमारी के शीशों से 
बड़ी हसरत से तकती हैं 
महीनों अब मुलाक़ातें नहीं होतीं 
जो शामें उन की सोहबत में कटा करती थीं, अब अक्सर 
गुज़र जाती हैं कंप्यूटर के पर्दों पर 
बड़ी बेचैन रहती हैं किताबें 
उन्हें अब नींद में चलने की आदत हो गई है 

वो सारा इल्म तो मिलता रहेगा आइंदा भी 
मगर वो जो किताबों में मिला करते थे सूखे फूल और 
महके हुए रुकए 
किताबें माँगने गिरने उठाने के बहाने रिश्ते बनते थे 
उन का क्या होगा 
वो जाने अब नहीं होंगे !

उन्होनें कहा कि अखबार घर में शाम तक का मेहमान होता है, फिर रद्दी बन जाता है परन्तु किताबें नई-नवेली दुल्हन की तरह हमेशा के लिए घर में सज-बस जाती है । पुस्तकें हमेशा के लिए हमारे जीवन में उतर जाती है । कोई पुस्तक अच्छी है या नहीं इसका फैसला सिर्फ और सिर्फ पाठक कर सकता है । आज के समय में युवा दुनिया भर में कायापलट कर रहे है और इसके पीछे पुस्तकों का ही आधार है । अच्छा वक्ता वही व्यक्ति बनता है जो अपन अधिक समय पुस्तकें पढने में बिताता है । यदि हम एक बार भी पुस्तक मेले में चले जाए तो उन्हें भरोसा है कि कम से कम एक पुस्तक हमारे साथ चल पड़ेगी । पुस्तक का पढ़ा सैदेव याद रहता है ।

डॉ दिनेश कुमार राज्य एन.एस.एस. अधिकारी ने राजीव रतन के एन.एस.एस. के विकास के लिए उठाये गए क़दमों और फैसलों की भूरी-भूरी प्रसंशा की । हरियाणा एन.एस.एस. आज देश की सर्वोत्तम इकाइयों में से एक बन चुका है । राष्ट्रीय सेवा योजना को नए आयाम और विस्तार देने के पीछे राजीव रतन का विशेष योगदान है । उन्होनें पुस्तक और पानीपत महोत्सव के साथ कॉलेज एन.एस.एस. के जुड़ाव को एक दूरदर्शी कदम बताया । जल्द ही कॉलेज में राष्ट्रीय एकीकरण कैंप भी लगने जा रहा है जिसमें देशभर के एन.एस.एस. स्वयंसेवक हिस्सा लेंगे ।  डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि सूचना तकनीक के वर्चस्व ने आज कुछ ही भाषाओं का दबदबा बढ़ाया है जिसके नतीजे में तीसरी दुनिया की क्षेत्रीय भाषाएँ मरती जा रहीं हैं । बड़े पैमाने पर विस्थापन का दर्द झेल रहे हमारे गांवों की मौलिक बोलियाँ भी गुम हो रहीं हैं । यदि यह जारी रहा तो भविष्य में इसी तरह भाषाओं और बोलियों के खोने से मानव जीवन की महत्त्वपूर्ण कड़ियाँ विलुप्त हों जायेंगी । सुरीले गीत और धुनें, खेती की विधियाँ, चिड़ियों की बोली समझने की कला, देशज खगोल विज्ञान, पहेलियाँ और जीवनचर्या की तमाम वैज्ञानिक जानकारियां विलुप्त हो जाएँगी । अगर हम अपने अतीत में झांककर देखें तो इतिहास में जो भाषाएँ नष्ट हुईं उनके अवशेषों, जहाँ-तहां पड़े शिलालेखों को अभी तक कोई नहीं पढ़ सका । भविष्य में हिन्दी को बचाने और बढ़ाने के लिए सर्वप्रथम हमें उसकी उपभाषाओं, राज्यों की मातृभाषाओं एवं बोलियों को बचाना और बढ़ाना होगा । वास्तव में इनकी प्रगति में ही हिन्दी की प्रगति सन्निहित है ।   

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