पानीपत के कशिश सलूजा ने करतार सिंह सराभा को आमेजन प्राइम के ‘द रिवोल्यूशनरीज’ में किया जीवंत।
BOL PANIPAT : पानीपत के कशिश सलूजा ने 19 साल के शहीद करतार सिंह सराभा को आमेजन प्राइम के ‘द रिवोल्यूशनरीज’ में किया जीवंत। इस सीरीज का निर्देशन मशहूर निर्देशक निक्खिल आडवाणी ने किया तथा कशिश के साथ भुवन बाम, रोहित सराफ़, प्रतिभा रांटा, एवं गुरफ़्तेह पीरज़ादा जैसे प्रतिभावान कलाकारों ने भी मुख्य भूमिका निभायी।
पानीपत शहर के रहने वाले अभिनेता कशिश ने 19 वर्षीय शहीद कर्तार सिंह सराभा का किरदार निभाकर अपनी अभिनय यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया है। कशिश ने इस भूमिका को निभाने के लिए केवल अभिनय ही नहीं किया, बल्कि किरदार को गहराई से समझकर उसे जीने का प्रयास किया।
कशिश ने अपनी स्कूली शिक्षा DPS Panipat City से और कॉलेज की पढ़ाई St. Xavier’s College, Mumbai से पूरी की। बचपन से ही उन्हें मंच, अभिनय, डिबेट और पब्लिक स्पीकिंग में विशेष रुचि थी। स्कूल के दिनों से मंच पर प्रस्तुति देने का उनका शौक धीरे-धीरे उनके जुनून में बदलता गया और इसी सफर ने उन्हें आज २४०+ देशों में लोगों के घर-घर तक पहुँचा दिया।
कर्तार सिंह सराभा की भूमिका के लिए कशिश ने विशेष तैयारी की। वे सराभा गाँव गए, कर्तार सिंह सराभा के घर का दौरा किया और उस स्थान के वातावरण तथा उनके जीवन को करीब से महसूस करने का प्रयास किया। गांव के कुछ लोगों से मुलाकात की और उनके बारे में और गहराई से जाना । चूंकि उन्हें एक युवा पंजाबी किरदार निभाना था, उन्होंने अपना वज़न भी कम किया और बॉडी लैंग्वेज, लुक तथा भावनात्मक अभिव्यक्ति पर मेहनत की।
इसके साथ साथ कशिश ने लगभग 2–3 महीने पंजाबी भाषा और लहजा सीखने में लगाए। उनके दादा-दादी और उनकी माँ उनके पंजाबी लैंग्वेज कोचेस रहे ताकि उनकी भाषा और संवाद अदायगी स्वाभाविक लगे।
कर्तार सिंह सराभा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन युवा क्रांतिकारियों में से थे, जिन्होंने बेहद कम उम्र में देश की आज़ादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनके साहस, देशप्रेम और बलिदान ने शहीद-ए-आज़म भगत सिंह को भी प्रेरित किया। इस सम्मानिय इंसान को पर्दे पर प्रस्तुत करने के लिए कशिश की यह तैयारी उनकी अभिनय के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
बचपन के मंच से बड़े पर्दे तक कशिश का सफर इस बात की खूबसूरत मिसाल है कि एक शौक जब जुनून बन जाता है, तो वह इंसान को अपनी मंज़िल तक पहुँचाने की राह खुद बना लेता है।
‘द रिवोल्यूशनरीज’ के अतिरिक्त आप कशिश को ‘वॉर २’, ‘हाफ़ लव, हाफ़ अरेंजड’ तथा विभिन्न मशहूर विज्ञापनों में भी देख सक्रिय हैं।
“इस किरदार के लिए चुने जाने की ख़बर मुझे अस्पताल के बिस्तर पर मिली थी।”
“मुझे लगता है कि यह किरदार मिलना किसी दैवीय संयोग से कम नहीं था। मेरे दादा-दादी के माता-पिता में से एक-एक का नाम करतार था, और इसी किरदार के लिए मेरे दादा-दादी मेरे भाषा प्रशिक्षक भी बने।”
“मेरे सह कलाकार मुझसे कहीं ज़्यादा तजुर्बेवान तथा मशहूर थे परंतु फिर भी उन्होंने मुझे अपनी कला की प्रतिभा दिखाने का पूर्ण सहयोग दिया।”
“३० से अधिक वर्षों का अनुभव रखने के बावजूद, फ़िल्मों को ले कर निक्खिल सर की उत्सुकता एवं जिज्ञासा ने मुझे बेहद प्रेरित किया”

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