Thursday, October 8, 2026
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सुपर सीडर खरीदकर मदन लाल ने अपनाया पराली प्रबंधन का आधुनिक तरीका

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at October 8, 2026 Tags: , , , ,

पराली जलाने की बजाय मिट्टी में मिलाकर बढ़ाएं उपजाऊ शक्ति

किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बने आसन्न कलां के मदन लाल

BOL PANIPAT , 8 अक्टूबर। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से चलाई जा रही फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) योजना किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से किसान आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग कर पराली प्रबंधन का बेहतर विकल्प अपना रहे हैं। इसी कड़ी में जिले के गांव आसन्न कलां निवासी किसान मदन लाल ने सरकारी योजना का लाभ उठाकर पराली प्रबंधन की दिशा में सराहनीय पहल की है।

मदन लाल ने बताया कि उन्होंने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत सरकार की ओर से दी गई 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ लेकर सुपरसीडर खरीदा है। इस आधुनिक कृषि यंत्र की मदद से उन्हें पराली प्रबंधन का उचित तरीका अपनाने में सहायता मिली है। साथ ही, सरकारी आर्थिक सहायता से आधुनिक कृषि तकनीक को अपनाना भी आसान हुआ है।

उन्होंने बताया कि धान की पराली को खेतों में जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है और वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके विपरीत, सुपरसीडर की सहायता से पराली को खेत में ही मिट्टी में मिलाया जा सकता है। इससे फसल अवशेष अगली फसल के लिए जैविक पदार्थ के रूप में उपयोगी बनते हैं और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है। इस प्रकार किसान पराली जलाने से बचते हुए पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

मदन लाल ने सरकार की इस योजना के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों को पराली जलाने की परंपरा छोडक़र आधुनिक कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना चाहिए। उन्होंने अपने किसान भाइयों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को आग लगाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करें और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की सीआरएम योजना का लाभ उठाएं।

उन्होंने कहा कि पराली का सही प्रबंधन किसान, खेत और पर्यावरण—तीनों के हित में है। किसानों की जागरूकता और आधुनिक तकनीक का उपयोग ही स्वच्छ वातावरण तथा टिकाऊ खेती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। मदन लाल की यह पहल अन्य किसानों को भी पराली न जलाने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाने के लिए प्रेरित करती है।

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