मिलेट्स केवल एक अनाज नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कुंजी : उपायुक्त डॉ विरेंदर कुमार दहिया
-अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष: सेहत की ओर लौटने का सुनहरा अवसर
-मिलेट्स हैं सुपर फूड, हर थाली में हो शामिल
-बदलती जीवनशैली में मोटा अनाज ही बनेगा स्वास्थ्य का आधार
-कुपोषण से मधुमेह तक बचाव का प्राकृतिक उपाय
BOL PANIPAT, 3 मार्च । उपायुक्त डॉ. विरेंदर कुमार दहिया ने कहा कि वर्तमान वर्ष को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के रूप में मनाया जाना हम सभी के लिए गर्व और जागरूकता का विषय है।
उपायुक्त डॉ दहिया ने बताया कि मोटा अनाज अर्थात मिलेट्स हमारे पारंपरिक आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, लेकिन समय के साथ आधुनिक खानपान की ओर झुकाव के कारण हमने इन्हें अपनी थाली से दूर कर दिया। अब समय आ गया है कि हम पुनः अपने स्वास्थ्य की नींव को मजबूत करने के लिए इन पौष्टिक अनाजों को अपनाएं।
उपायुक्त डॉ. दहिया ने कहा कि मोटे अनाज सभी प्रकार के आवश्यक पोषक तत्वों का प्रचुर भंडार होते हैं। इनमें फाइबर, प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन जैसे तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाते हैं।
डॉ दहिया ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और हृदय रोग जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिनसे बचाव के लिए मिलेट्स का नियमित सेवन अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने कहा कि मिलेट्स को ‘सुपर फूड’ की श्रेणी में इसलिए रखा गया है क्योंकि ये ग्लूटेन-फ्री होते हैं और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में सहायक हैं। मोटा अनाज रक्त में शर्करा के स्तर को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है, जिससे मधुमेह के रोगियों को विशेष लाभ मिलता है। इसके अतिरिक्त, यह लंबे समय तक पेट भरा रखने का एहसास कराता है, जिससे अनावश्यक भोजन की आदत पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
उपायुक्त डॉ. दहिया ने बताया कि हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्य में मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देना न केवल स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है। कम पानी में तैयार होने वाली ये फसलें पर्यावरण के अनुकूल हैं और जल संरक्षण में भी योगदान देती हैं।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मोटे अनाज की खेती को प्राथमिकता दें और आम नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक आहार में बाजरा, ज्वार और रागी जैसे अनाजों को शामिल करें।
उपायुक्त ने कहा कि विद्यालयों, आंगनवाड़ी केंद्रों और सरकारी कार्यक्रमों में भी मिलेट्स को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, ताकि बच्चों और महिलाओं को संतुलित पोषण मिल सके।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है कि हम पारंपरिक और पौष्टिक आहार को अपनाएं तथा फास्ट फूड की संस्कृति से दूरी बनाएं।
उपायुक्त डॉ. विरेंदर कुमार दहिया ने कहा कि यदि प्रत्येक परिवार अपनी थाली में मोटे अनाज को स्थान देगा, तो निश्चित रूप से एक स्वस्थ और सशक्त समाज का निर्माण संभव होगा। मिलेट्स केवल एक अनाज नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कुंजी हैं।

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