भूजल प्रबंधन को लेकर और कार्य करना सुनिश्चित करें अधिकारी: उपायुक्त डॉ. वीरेन्द्र कुमार दहिया
-शिमला मौलाना में किया गया एक्सपेरिमेंट
-उपायुक्त ने अधिकारियों को जो कार्य हुआ है उसे अपलोड करने के निर्देश दिए
-अनेक स्थानों पर अमृतसरोवर से किया जा रहा वाटर रिचार्ज
-भू-जल संकट का स्थायी समाधान पर हुई चर्चा
BOL PANIPAT , 10 फरवरी। भू-जल स्तर के सुधार और जल संकट को देखते हुए जल संरक्षण की दिशा में प्रशासन ठोस कदम उठा रहा है। प्रशासन द्वारा ग्राउंड वाटर क्वालिटी को चेक कराने का कार्य करने की भी योजना क्रियान्वित करने पर विचार किया जा रहा है। मंगलवार को राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण (नाक्विम) एवं जल शक्ति जन भागीदारी (जेजेएसबी 2.0) ने जिला सचिवालय सभागार सभागार में उपायुक्त डॉ. वीरेन्द्र कुमार दहिया की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक में उपायुक्त डॉ. दहिया ने कहा कि हमारा लक्ष्य ग्राउंड वाटर को इम्प्रूव करना है। यमुना क्षेत्र के अंतर्गत जो ब्लॉक है वहां भू-जल पर कार्य किए जाने की आवश्यकता है। यहां पर राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण और जल शक्ति जन भागीदारी के तहत एक प्रयोग प्रशासन द्वारा किए जाने पर विचार किया गया।
उपायुक्त ने कहा कि राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण और जल शक्ति जन भागीदारी जैसे वैज्ञानिक एवं सहभागिता आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से ही हम भू-जल संकट का स्थायी समाधान कर सकते हैं। सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें और जल संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप दें।
उपायुक्त डॉ. दहिया ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल संरक्षण से जुड़े प्रस्ताव शीघ्र तैयार कर उन्हें धरातल पर लागू किया जाए तथा किसानों और आम नागरिकों को जल बचत के प्रति निरंतर जागरूक किया जाए। समीक्षा बैठक में सिंचाई विभाग, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग सहित सभी विभागों के विभागाध्यक्षों ने भाग लिया व सुझाव दिए। इस दौरान श्री विद्यानंद नेगी, वैज्ञानिक ‘डी’, आयुष केशरवानी, वैज्ञानिक ‘बी’, कुलदीप गोपाल भर्तरिया एवं जल शक्ति जन भागीदारी योजना के तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण के निष्कर्षों, जिला भू-जल पुनर्भरण योजना तथा भास्कराचार्य अनुप्रयुक्त भू-सूचना विज्ञान संस्थान (बिसैग) द्वारा तैयार ग्राम-स्तरीय भू-जल पुनर्भरण योजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई।
विशेषज्ञों ने केंद्रीय भू-जल बोर्ड के पोर्टल पर उपलब्ध भू-जल संसाधन मूल्यांकन, भू-जल स्तर एवं जल गुणवत्ता से संबंधित आंकड़ों तक पहुंच और उनके उपयोग की प्रक्रिया का प्रदर्शन भी किया। बैठक के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि जिले के कई खंड अतिदोहित की श्रेणी में आते हैं, जहां भू-जल दोहन की अवस्था में सुधार हेतु प्रभावी पुनर्भरण हस्तक्षेपों की आवश्यकता है।
बैठक में जिला नोडल अधिकारी, जल शक्ति जन भागीदारी से आग्रह किया गया कि अतिदोहित खंडों के लिए वैज्ञानिक आधार पर भू-जल संरक्षण एवं पुनर्भरण से संबंधित परियोजनाएं प्रस्तावित की जाएं। इसके साथ ही यह भी सुझाव दिया गया कि निर्धारित समय-सीमा में लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रस्तावित कार्यों के क्रियान्वयन हेतु महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना वर्तमान में जी राम जी एवं अन्य समन्वय आधारित योजनाओं की निधियों का उपयोग किया जाए। उपायुक्त डॉ वीरेन्द्र कुमार दहिया ने इस मौके पर विभाग की पुस्तक का भी विमोचन किया। इस मौके पर सीईओ डॉ किरण, जन स्वास्थ्य विभाग से कार्यकारी अभियंता करण बहल,एसडीओ कृषि विभाग देवेंद्र कुहाड़ के अलावा विभिन्न विभागों से अधिकारी मौजूद रहे।

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