Friday, April 17, 2026
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शिष्य ही वास्तव में गुरू के ज्ञान को आत्मसात करके अधिकारी बनते हैं : स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज

By LALIT SHARMA , in RELIGIOUS , at March 18, 2023 Tags: , , ,

BOL PANIPAT : श्री संत द्वारा हरि मन्दिर, निकट सेठी चौक, पानीपत के प्रांगण में नव विक्रमी सम्वत 2080 के उपलक्ष्य के अवसर पर परम पूज्य 1008 स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज (मुरथल वाले) की अध्यक्षता में सप्ताह भर चलने वाले संत समागम कार्यक्रम के चौथे दिन महाराज श्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि एक बार बाबा नानक से किसी ने पूछा कि उनके कितने शिष्य हैं तो बाबा नानक ने कहा मेरे केवल 2 शिष्य हैं। बाबा नानक ने कहा कि उनकी संगत में अनुयायी तो बहुत हैं लेकिन शिष्य सिर्फ 2 हैं अनुयायी केवल सत्संग सुनकर जय जयकार कर सकते हैं लेकिन शिष्य ही वास्तव में गुरू के ज्ञान को आत्मसात करके अधिकारी बनते हैं। महाराज श्री ने एक कथा सुनाते हुए कहा कि एक बार एक शिष्य और गुरू की मृत्यु होती है, शिष्य तो मरने के बाद स्वर्ग में जाता है लेकिन गुरू मरने के बाद नरक में जाता है। यह जानकर शिष्य बहुत दुखी होता है और इसका कारण जानना चाहता हैं। वह स्वर्ग के पहरेदारों से नरक में अपने गुरू से मिलने जाने को कहता है। तब पहरेदार उसे नरक में ले जाते हैं। वहां गुरू से मिलकर शिष्य बहुत दुखी होता है और गुरू को नरक में पड़े होने का कारण पूछता है तो गुरू कहते हैं कि तुमने धरती पर जो स्वर्ग नरक की व्याख्या सुनी है वह स्वर्ग नरक उसे कहीं आगे हैं। जहां अच्छे लोग होंगे तो वो नरक को भी स्वर्ग बना देंगे और जहां अच्छे लोग नहीं होंगे वो स्वर्ग को भी नरक बना देंगे।

इससे पूर्व प्रसिद्ध भजन गायक वेद कमल ने ‘‘दिल मेरा तैनूं सतगुरू रोज ही बुलावे, पता नहीं तू केहड़ी गल्लों दरस न दिखावें’’ और बहन सीमा ने ‘‘मेरे दाता जी, चरणां विच जोड़ लओ गरीबां नूं’’ भजन गाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

इस अवसर पर प्रधान रमेश चुघ, हरनाम चुघ, अमरजीत सपड़ा, किशोर रामदेव, दर्शन रामदेव, उत्तम आहूजा, कर्म सिंह रामदेव, शाम सपड़ा, गोल्डी बांगा, अमर वधवा, सुरेन्द्र जुनेजा, भव्य चुघ, ओमी चुघ, मोहन रामदेव, राघव चुघ, अमन रामदेव, शक्ति सिंह रेवड़ी, ईश्वर लाल रामदेव, जगदीश जुनेजा, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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