Sunday, April 19, 2026
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एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया।

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at February 11, 2022 Tags: , , , , , ,

BOL PANIPAT : आईबी महाविद्यालय, पानीपत और दयाल सिंह महाविद्यालय, करनाल के जैव-प्रौद्योगिकी विभागों ने संयुक्त रूप से एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया। वेबीनार का मुख्य विषय बायो-टेक्नोलॉजी एंड ह्यूमन वेलफेयर था। दो सत्रों में आयोजित इस वेबीनार में दोनों महाविद्यालयों के प्राध्यापकों के साथ लगभग 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

प्रथम सत्र की शुरुआत दयाल सिंह कॉलेज की प्राचार्या डॉ. आशिमा गाखड़ ने स्वागत भाषण से की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वैक्सीन प्रोडक्शन, फार्मा उद्योग और कृषि क्षेत्र में जैव-प्रौद्योगिकी का अभूतपूर्व योगदान है। कोरोना महामारी में जिस तरह से हमारे जीव और चिकित्सा वैज्ञानिकों ने काम किया वह जैव-प्रौद्योगिकी के बिना शायद सम्भव न हो पाता। इस सत्र में मुख्य वक्ता महर्षि मार्कण्डेश्वर विश्वविद्यालय, मुलाना के जैव प्रौद्योगिकी विभाग से डॉ. पूजा शर्मा ने प्रतिभागियों को एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर व्याख्यान दिया।

उन्होंने नाइट्रोजन फिक्सेशन के विभिन्न पहलुओं से प्रतिभागियों को अवगत कराते हुए कृषि क्षेत्र में इस प्राकृतिक प्रक्रिया के मूल्यवर्धन की संभावनाओं को रुचिपूर्ण तरीके से बताया। डॉ. श्वेता यादव ने सत्र के संचालन का कार्य दक्षता से किया। अपराह्न सत्र के मुख्य वक्ता महर्षि मार्कण्डेश्वर विश्वविद्यालय, मुलाना के जैव-प्रौद्योगिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार शर्मा रहे। सत्र का शुभारंभ आई.बी. महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय गर्ग ने किया।

उन्होंने सत्र में प्रस्तुत होने वाले महत्त्वपूर्ण विषय के बारे में कहा कि स्तन कैंसर जैसे गम्भीर रोग से बचाव में समय का बड़ा महत्त्व है, अगर समय रहते इस रोग के बारे में हम सचेत हो जाते हैं तो इस रोग से काफी बचाव हो सकता है, जैव प्रौद्योगिकी इस विषय में अत्यंत सहायक हो सकती है। डॉ. अनिल शर्मा ने अपने व्याख्यान में सरल भाषा में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके द्वारा स्तन कैंसर पर किये गए शोध के कुछ महत्त्वपूर्ण आयाम प्रस्तुत किए।

उन्होंने बताया कि जैव प्रौद्योगिकी की मदद से समय रहते इस रोग को न सिर्फ हम डायग्नोज़ कर सकते हैं अपितु इससे इसके उपचार की सम्भावना भी बढ़ जाती है। आई.बी. महाविद्यालय से डॉ. निधान सिंह और प्रो. पवन कुमार ने भी जैव प्रौद्योगिकी और इसके महत्व को रेखांकित किया।

अंतिम सत्र का संचालन प्रो.भावना मलिक ने किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. अदिति श्रीया बाली और प्रो. अंजूश्री ने मुख्य वक्ताओं और प्रतिभागियों का धन्यवाद किया।

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