Monday, June 15, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की वन एवं शिक्षा विभाग के सौजन्य से विश्व आद्र्भूमि दिवस पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार के आयोजन में सहभागिता

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at February 2, 2023 Tags: , , , ,

संजय विस्वाल आईएएस एवं वन मंडल अधिकारी लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश) ने किया विषय प्रवर्तन

कार्बन अवशोषण और भू जल स्तर में वृद्धि में वेटलैंड्स की अहम भूमिका: संजय विस्वाल आईएएस

आर्द्रभूमि का नष्ट होना मतलब पारिस्थितिकी तंत्र एवं जैव विविधता का नष्ट होना है: जीडी मिश्र वन मंडल अधिकारी

BOL PANIPAT, 02 फरवरी, विश्व आद्र्भूमि दिवस पर वन एवं शिक्षा विभाग के सहयोग एवं तत्वाधान में एक दिवसीय सेमीनार का ऑनलाइन और ऑफलाइन मिश्रित मोड में आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता सीएसआरआई के निदेशक डॉ प्रबोध चन्द्र शर्मा ने की. विषय प्रवर्तन संजय विस्वाल आईएएस एवं वन मंडल अधिकारी लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश) ने किया. कार्यक्रम की प्रस्तावना वन मंडल अधिकारी जीडी मिश्र ने रखी. सेमीनार के मुख्य वक्ता शिवपाल वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी रहे. मुख्य अतिथि जेपीएल श्रीवास्तव पूर्व महानिदेशक वन भारत सरकार ने सेमीनार का विधिवत उदघाटन किया. सेमीनार का विषय ‘आइये आद्र्भूमि को मिलकर सँवारे’ रहा जिसमे कॉलेज के बीएससी और एमएससी के छात्र-छात्राओं ने ऑनलाइन और ऑफलाइन हिस्सा लिया. सम्पूर्ण सेमीनार का संचालन राजीव रंजन सीपीआरओ पंचकुला ने किया. प्रत्येक वर्ष  2 फरवरी को वेटलैंड डे यानी आर्द्रभूमि दिवस के रूप में मनाया जाता है. वेटलैंड्स जमीन का वह हिस्सा होता है जहां पानी और भूमि आपस में मिलते है. यह हमारे पारिस्थतिकी तंत्र के लिए अत्यंत जरूरी है. वेटलैंड पानी को प्रदुषण मुक्त बनाए रखने का काम करती है. वेटलैंड्स जंतु ही नहीं बल्कि पौधों के लिए भी एक समृद्ध तंत्र है जहां कई उपयोगी वनस्पतियां और औषधीय पौधे प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं जिनका इस्तेमाल कई आवश्यक चीज़ों के निर्माण में किया जाता है. आज इंसान ने अपने लालच के वशीभूत होकर और आधुनिकता एवं विकास के नाम पर वेटलैंड का सत्यानाश कर दिया है और इसी कारण से अब हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड इत्यादि जगहों पर प्रकृति इंसान से नाराज़ नज़र आती है. सेमीनार में आजमपुर, लखीमपुर खीरी, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) इत्यादि से वरिष्ठ पत्रकारों, प्राध्यापकों, वन अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया. 

संजय विस्वाल आईएएस एवं वन मंडल अधिकारी लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश) ने कहा कि वेटलैंड यानी नमभूमि या आद्रभूमि जमीन का वह हिस्सा है जहां पानी और भूमि आपस में मिलते हैं. आर्द्रभूमि की मिट्टी किसी झील, नदी, तालाब के किनारे का वह हिस्सा है जहां बहुत ज्यादा मात्रा में नमी पाई जाती है और यह कई मायनों में फायदेमंद होती है. हर वर्ष 2 फरवरी को वर्ल्ड वेटलैंड डे मनाए जाने का उद्देश्य उन आर्द्र क्षेत्रों पर प्रकाश डालना है जो आज विलुप्त होने की कगार पर हैं. उन्होनें कहा कि नदियों, झीलों, तालाबों आदि की खराब होती स्थ‍िति को देखते हुए 2 फरवरी 1971 में ईरान के रामसर में वेटलैंड कन्वेंशन को अपनाया गया और फिर 1975 में इस कन्वेंशन को लागू किया गया. पहली बार वर्ल्ड वेटलैंड डे 2 फरवरी 1997 में मनाया गया जिसपर भारत ने 1 फरवरी 1982 में इस संधि पर हस्ताक्षर किए. कार्बन अवशोषण और भू जल स्तर में वृद्धि जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में वेटलैंड्स का अहम योगदान हैं. हरियाणा और उत्तर प्रदेश में इसीलिए अब आद्र्भूमि संरक्ष्ण पर अधिक जोर दिया जा रहा है.

जीडी मिश्र वन मंडल अधिकारी ने कहा कि रामसर स्थल ऐसे वेटलैंड्स हैं जिन्हें अंतरराष्ट्रीय महत्व प्राप्त हैं और इन्हें यूनेस्कों की रामसर कन्वेंशन के तहत लिस्ट किया जाता है. भारत में ओडिशा की चिल्का झील इसका सबसे पहला रामसर स्थल है. 2021 में भारत की 4 और आद्रभूमियों को रामसर स्थल की सूची मे शामिल किया गया. आज विश्व में कुल 2400 से अधिक स्थलों को रामसर स्थल के रुप में मान्यता प्राप्त हैं. आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ये कई जलीय जीव, जंतुओं का आवास होते हैं. इतना ही नहीं ये प्रवासी पक्षियों के रहने के भी अनुकूल होते हैं और इनके लुप्त होने से पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ी चीज़ों को भारी नुकसान हो सकता है. इसलिए आद्र्भूमि का संरक्षण बहुत जरूरी है. मैंग्रोव्स, एस्टुरीज, खारे पानी की दलदली भूमि, लैगून, दलदली भूमि, झीलें, जलयुक्त दलदली वन भूमि, नदियाँ, मछली के तालाब, नमक और धान के खेत इत्यादि आद्र्भूमि के ही भिन्न रूप है. 

राजीव रंजन सीपीआरओ पंचकुला ने कहा कि धरती पर सिर्फ हमारा ही अधिकार नहीं है अपितु इसके विभिन्न भागों में विद्यमान करोड़ों प्रजातियों का भी इस पर उतना ही अधिकार है जितना कि इंसान का. नदियों, झीलों, समुद्रों, जंगलों और पहाड़ों में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पादपों एवं जीवों को देखकर हम रोमांचित हो उठते हैं. दरअसल आर्द्रभूमि एक विशिष्ट प्रकार का पारिस्थितिकीय तंत्र है जहाँ जैव-विविधताओं की प्रचुरता पाई जाती है. आज के आधुनिक जीवन में मानव को सबसे बड़ा खतरा जलवायु परिवर्तन से है और ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि हम अपनी जैव-विविधता का सरंक्षण करें. इंसान ने सबसे अधिक आद्र्भूमि का सत्यानाश किया है. हरियाणा में कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत आदि जिलों में विकास और लालच वश इंसान ने वेटलैंड का सबसे अधिक नाश किया. परन्तु इंसान को अब समझ आने लगा है कि प्रकृति के बिना उसका कोई अस्तित्व ही नहीं है. गुरुग्राम की आधुनिकता अब इंसान को सताने लगी है और इसी उद्देश्य से हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार अब आद्र्भूम के संरक्षण में अधिक सक्रियता दिखा रही है.

डॉ अनुपम अरोड़ा प्राचार्य ने कहा कि दुनिया की तमाम बड़ी सभ्यताएँ जलीय स्रोतों के निकट ही बसती आई हैं और आज भी वेटलैंड्स विश्व में भोजन प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. वेटलैंड्स के नज़दीक रहने वाले लोगों की जीविका बहुत हद तक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन पर निर्भर है. वेटलैंडस की वैज्ञानिक जानकारी योजनाकारों को इसके आर्थिक महत्व और लाभ समझाने में मदद करती है. जहाँ तक जागरूकता का प्रश्न है तो आम जनता को भी इन वेटलैंड्स के संरक्षण के प्रति जागरूक बनाए जाने की ज़रूरत है और इस दृष्टि से वेटलैंड्स के सरंक्षण जैसे संवेदनशील मामले में केंद्र, राज्य सरकार और सामाजिक संस्थाओं की सहभागिता महत्वपूर्ण है. परन्तु हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वेटलैंड के सरंक्षण से किसी भी प्रकार का समझौता न हो.

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