जाने-माने प्रोफेसर कवि एवं लेखक एस के शर्मा का निधन
BOL PANIPAT : पानीपत के जाने-माने प्रोफेसर, कवि एवं लेखक एस के शर्मा का निधन हो गया. वह एसडी पीजी कॉलेज में अंग्रेजी के विभागाध्यक्ष थे. उन्होंने 51 वर्ष से भी अधिक समय तक इस महाविद्यालय में अध्यापन के अतिरिक्त शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की सेवाएं दी. इसीलिए उन्हें ‘टीचरज-टीचर’, ‘इंग्लिश गुरु’ के उपनामों से भी जाना जाता है.
आज प्रोफेसर शर्मा द्वारा पढ़ाई गए विद्यार्थी समाज के प्रत्येक क्षेत्र में कार्यरत हैं और बहुत से अध्यापन क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं. उन्होंने तीन-तीन पीढ़ियों को शिक्षित किया है. वह लेखक भी थे. उन्होंने 8 पुस्तकों के साथ-साथ कई काव्य संग्रह, लघु कथाएं एवं निबंध भी लिखे. वह एक अच्छे अनुवादक भी थे. उनके द्वारा गुरु रबिन्द्र नाथ टैगोर रचित ‘गीतांजलि’ का हिंदी में किया गया अनुवाद अद्वितीय और अत्यंत ह्रदय-स्पर्शी है. प्रकृति प्रेम और ईश्वर के प्रति निष्ठा और मानवतावादी मूल्यों के प्रति समर्पण भाव से सम्पन्न ‘गीतांजलि’ के हर एक भाव को शर्मा ने ह्रदय से महसूस किया. उन्होंने अंग्रेजी की कई रचनाओं एवं कविताओं का हिंदी अनुवाद भी किया जिनमे जॉन कीट्स, विलियम वर्ड्सवर्थ, एलिजाबेथ जेनिंग्स, विलियम शेक्सपियर, कोलरिज, फ्रॉस्ट,गेब्रियल ओकारा, ड्रेटन, हैरिक, कार्ल्स सैंडबर्ग, मार्लो, डब्लूबी येट्स, मैथ्यू अर्नाल्ड जैसे कितने ही महान कवियों की कृतिया शामिल है जो उनकी पुस्तक ‘अभी तो दूर जाना है’ में प्रकाशित हुए. भावों की सटीकता एवं शब्दों के सही चुनाव के साथ अनुवाद करना उनकी लेखनी की प्रमुख विशेषता रही. ‘भोग हुआ सच’, ‘मेरे भीतर की हलचल’ जैसी पुस्तकों में उन्होनें अपने जीवन के खट्टे-मीठे अनुभवों और जीवन दर्शन को भावनात्मक तरीके से व्यक्त किया है. उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य पढ़ना, पढ़ाना और लिखना था और अपने अंतिम पलों में भी वे इनसे जुड़े रहे.
शिक्षा को लेकर उनके ह्रदय में कितना जूनून और जज्बा था इसका अनुमान हम इस बात से भी लगा सकते है की कोरोना काल में भी वह ऑनलाइन लेक्चर देते रहें. अपने जीवन काल में उन्होंने जो कीर्तिमान और मापदंड स्थापित किए वे अद्वितीय, अकल्पनीय एवं अविश्वसनीय है. अत्यंत व्यस्त रहते हुए भी उन्होंने अपने परिवार और पारिवारिक दायित्वों का पूरा ध्यान रखा, जिसके फलस्वरूप आज उनका बेटा एवं दोनों बेटियां हर प्रकार से संपन्न और खुशहाल है. उनके निधन से शिक्षा एवं साहित्य जगत में जो क्षति हुई है, उसे पूरा करना अत्यंत कठिन है.

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