पराली प्रबंधन में सतीश ने अपनाया आधुनिक तरीका, सुपर सीडर से खेत में ही किया फसल अवशेषों का प्रबंधन
सियाराम योजना के तहत सुपर सीडर मशीन लेकर किसानों को दिया संदेश
पराली जलाने की बजाय तकनीक अपनाएं, खेत की उर्वरता बचाएं
BOL PANIPAT , 7 अक्टूबर। पराली प्रबंधन को लेकर किसानों में जागरूकता बढ़ रही है और अब किसान फसल अवशेषों को आग लगाने की बजाय आधुनिक कृषि तकनीक का सहारा ले रहे हैं। गांव राजाखेड़ी निवासी किसान सतीश ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए सियाराम योजना के तहत सुपर सीडर मशीन ली है। इस मशीन के माध्यम से वे धान की पराली को खेत में ही प्रबंधित कर रहे हैं और पराली जलाने से होने वाले नुकसान से बचने का प्रयास कर रहे हैं।
सतीश का कहना है कि फसल अवशेषों को जलाना समस्या का समाधान नहीं है। इससे जहां वायु प्रदूषण बढ़ता है, वहीं खेत की मिट्टी को भी नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा धुएं से आसपास के वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बताया कि आधुनिक मशीनरी के इस्तेमाल से किसान पराली को खेत में ही उपयोगी तरीके से प्रबंधित कर सकते हैं।
उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि पराली में आग न लगाएं और सरकार की ओर से उपलब्ध करवाई जा रही कृषि मशीनरी एवं योजनाओं का लाभ उठाएं। सुपर सीडर जैसी मशीनें फसल अवशेष प्रबंधन में उपयोगी साबित हो रही हैं। इससे किसान पराली जलाने की समस्या से बचने के साथ-साथ खेती को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ा सकते हैं।
सतीश का यह प्रयास अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक है। उन्होंने दिखाया है कि इच्छाशक्ति और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से पराली को समस्या के बजाय खेती के लिए उपयोगी संसाधन बनाया जा सकता है। उनका संदेश साफ है—खेत में आग नहीं, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करें और पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें।

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