Friday, April 17, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस बेटियों की हिस्सेदारी और सशक्तिकरण भाव के साथ मनाया गया.

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at October 11, 2023 Tags: , , , ,

बालिका दिवस बालिकाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के प्रति जागरूक बनाता है: डॉ संगीता गुप्ता

एनएसएस स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों ने निकाली महिला जागरूकता रैली

BOL PANIPAT , 11 अक्टूबर.

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की एनएसएस ईकाइयों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस 2023 बेटियों की हिस्सेदारी और सशक्तिकरण के भाव के साथ मनाया गया. इस अवसर पर विमर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमे प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा के साथ, कॉलेज में सांस्कृतिक गतिविधियों की प्रभारी डॉ संगीता गुप्ता, एनएसएस अधिकारी डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी और डॉ सुशीला बेनीवाल, प्रो जुगमती, प्रो कविता  ने हिस्सा लिया एवं स्वयंसेवकों व छात्र-छात्राओं को संबोधित किया और एक स्वर में कहा कि बालिका दिवस बालिकाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के प्रति जागरूक करता है. एनएसएस स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों ने महिला जागरूकता रैली निकाल कर समाज को महिलाओं के अधिकारों हेतू जागरूक किया.

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने के उद्देश्य को सबके साथ साझा करते हुए कहा कि दुनिया भर की बेटियों को सहायता और अवसर प्रदान करना ही इस दिन का सार है. आज प्रत्येक देश में बेटियों की लगभग हर क्षेत्र में हिस्सेदारी है परन्तु एक समय ऐसा भी था जब लोग बेटियों को बोझ मानते थे. कुछ देशों में तो आज भी हालात ऐसे ही है. भारत में भी देश की आजादी के बाद से भारत सरकार ने बेटियों को देश में पहले पायदान पर लाने के लिए कई योजनाएं शुरू की और कानून बनाएं. इस खास दिन को मनाने की मुख्य वजह बेटियों को सशक्त बनाने के लिए जागरूकता पैदा करना है. वर्तमान सरकार द्वारा लोकसभा की कुल सीटों में 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को देना भी एक ऐतिहासिक कदम और मील का पत्थर साबित होगा.

डॉ संगीता गुप्ता ने बताया कि भारत में हर वर्ष 11 अक्टूबर अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है और इसका उद्देश्य बालिकाओं को उनके अधिकारों के बारे में ख़ास तौर पर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में जागरूक करना है. अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस भारत की लड़कियों को भी सहायता और अवसर प्रदान करता है. कन्या भ्रूण हत्या और लैंगिक असमानता से लेकर यौन शोषण तक सभी मुद्दों पर बालिकाओं और लोगों को जागरूक करना इसका प्रमुख उद्देश्य है. लड़कियों को विभिन्न असमानताओं और लैंगिक भेदभाव का आज भी सामना करना पड़ता है और ऐसे में बेटियों को जागरूक करने के लिए हर वर्ष इस दिन को मनाया जाना बेहद महत्वपूर्ण है ताकि लड़कियां अपने अधिकारों को जाने और उनका सदुपयोग करे. बालिका दिवस मनाने का उद्देश्य समाज में लड़कियों के साथ लैंगिक भेदभाव के बारे में लोगों को जागरूक करना और लड़कियों के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव लाना भी है.

डॉ संतोष कुमारी ने एक गीत को उद्धृत करते हुए कहा कि आज की नारी ‘कोमल है कमजोर नहीं, शक्ति का नाम ही नारी है, जग को जीवन देने वाली, मौत भी तुझसे हारी है’. उन्होनें कहा कि भारत सरकार ने बालिकाओं की स्थिति में सुधार और भेदभाव को खत्म करने के लिए कई अभियान चलाए हैं जिसमे सेव द गर्ल चाइल्ड, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, लड़कियों के लिए मुफ्त या रियायती शिक्षा, कॉलेजों, विश्वविधालयों और अब तो संसद में भी महिलाओं के लिए आरक्षण आदि शामिल है. आज देश की बेटियां हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं. पहले जहां बेटियों के पैदा होने पर उन्हें बाल विवाह जैसी कुप्रथा में झोंक दिया जाता था वहीं आज बेटी होने पर लोग गर्व का अनुभव करते हैं. देश की आजादी के बाद से भारत सरकार ने बेटियों और बेटों में भेदभाव को खत्म करने के लिए कई योजनाएं चलाई है. बेटियों को देश में पहले पायदान पर लाने के लिए कई कानून लागू किए गए है जिनका उदेश्य मुख्य रूप से बालिकाओं के प्रति लोगों को जागरूक करना है. देश को अपनी बेटियों पर पहले भी नाज था और आगे भी रहेगा.

डॉ सुशीला बेनीवाल ने कहा कि सरकार समेत राज्य सरकारों ने भी अपने-अपने प्रदेशों में बेटियों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाये हैं. अंतर्राष्टीय बालिका दिवस को मनाने का अर्थ महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है ताकि देश की बालिकाए अपने अधिकारों के प्रति अच्छे से जागरूक बन सके.

प्रो जुगमती ने कहा कि आज हमें बेटियों के साथ-साथ समाज को भी लैंगिग भेदभाव के प्रति जागरूक करना है. इस वर्ष का नोबेल शांति पुरस्‍कार ईरान की मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्‍मदी को महिलाओं के दमन के खिलाफ संघर्ष करने के लिए मिला है जो विश्व की सारी महिलाओं का सम्मान है. जेल में रहकर भी इस महिला ने मानवाधिकारों के जो कुछ किया है वह बेमिसाल है. हमारे देश की बेटियाँ भी खूब तरक्की करे यही उनकी कामना है.  

इस अवसर पर स्टाफ सदस्यों में डॉ मुकेश पुनिया. प्रो किरण मलिक, दीपक मित्तल, चिराग सिंगला आदि भी विमर्श का हिस्सा बने.

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