एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में हुआ वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर सामूहिक गायन का आयोजन
–प्राचार्य, स्टाफ सदस्यों और विद्यार्थियों ने वन्दे मातरम् के सम्पूर्ण 6 अंतरों का किया ह्रदय से गायन
–वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर पीएम मोदी ने किया दिल्ली में स्मरणोत्सव का उद्घाटन: स्टाफ और सदस्यों ने देखा कार्यक्रम को लाइव
–वंदे मातरम भारतवासियों के हृदय में जोश और एकता का संचार करता है: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT , 07 नवम्बर, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में भारत के राष्ट्र गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर सामूहिक गायन का आयोजन किया गया जिसमें प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, स्टाफ सदस्यों और विद्यार्थियों ने वन्दे मातरम् के सम्पूर्ण 6 अंतरों का ह्रदय से गायन किया । विदित रहे कि भारत सरकार ने देश के सभी हिस्सों में सार्वजनिक स्थानों पर प्रात: 9:50 बजे वंदे मातरम का सामूहिक गायन का निर्णय लिया था ताकि देश के नागरिक अपने वीर शहीदों को याद करें और देश भक्ति के जज्बे को खुद में संजो सके । वंदे मातरम के गौरवशाली 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाने का उद्देश्य ऐसे आह्वान को पैदा करना है जो हमारी पीढ़ियों को प्रेरित कर सके और पूरे देश में देशभक्ति की अटूट भावना को जगाये । इस गीत की रचना बंकिमचंद्र चटर्जी (चटोपाध्याय) ने 1875 में 7 नवंबर को अक्षय नवमी के शुभ अवसर पर की थी और यह गीत चटर्जी के उपन्यास ‘आनंदमठ’ में पहली बार नज़र आया था । इस गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने पर 7 नवम्बर के दिन पीएम नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में स्मरणोत्सव का उद्घाटन किया जो कि देश पूरे एक वर्ष तक मनायेगा । प्रधानमंत्री ने इस मौके पर स्मृति डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि वन्दे मातरम् गीत भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एक महत्वपूर्ण नारा बन गया था जिसे बाद में इसे भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया । संस्कृत में वंदे मातरम का अर्थ है ‘मैं माँ की आराधना करता हूँ’ । वंदे मातरम गीत की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी । इस गीत को 1896 में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार गाया था । उस समय यह गीत केवल स्वर नहीं था बल्कि यह ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक आवाज थी । 1905 के बंग आंदोलन से लेकर स्वतंत्रता संग्राम के प्रत्येक चरण में वंदे मातरम ने भारतवासियों के हृदय में जोश और एकता का संचार किया था । लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस जैसे महान क्रांतिकारियों ने इस गीत को अपनी प्रेरणा का मंत्र बनाया । स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने 1950 में वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया । यह गीत भारत की आत्मा है और हमारी मातृभूमि की वंदना है ।
इसके बाद प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने स्टाफ सदस्यों और छात्र-छात्राओं के साथ सम्पूर्ण 6 अंतरों वाले राष्ट्र गीत को मीठे स्वर में गाया । भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पण और ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ ।

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