आर्य कॉलेज में हुआ स्तन कैंसर विषय पर सेमीनार का आयोजन
BOL PANIPAT – सोमवार 14 अक्तूबर 2024 , आर्य पीजी कॉलेज के ओपी शिंगला सभागार में आर्य पीजी कॉलेज, इनरवील डिस्ट्रीक 308 जोन 10 क्लब व रोटरी रैनबो के संयुक्त तत्वावधान में स्तन कैंसर विषय पर सेमीनार का आयोजन करवाया गया। सेमीनार में मुख्य वक्ता के तौर पर मेदांता हस्पताल, गुडगांव से डॉ. कंचन कौर ने शिरकत की। इनरवील डिस्ट्रीक 308 जोन 10 क्लब व रोटरी रैनबो से डॉ. वंदना पाहुजा, नीरू बोगलानी, अंजु गैरा, सचिन गर्ग, मनमोहन अग्रवाल, पानीपत के प्रेम हस्पताल से डॉ. अभिनव मुतनेजा व आर्य कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता ने मुख्य वक्ता कंचन कौर का पुष्पगुच्छ दे कर स्वागत किया।
प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता ने बताया कैंसर एक बहुत ही खतरनाक बिमारी है लेकिन इस अगर समय रहते पहचान लिया जाए तो इसका इलाज संभव है। उन्होंने कहा कि आज सेमीनार छात्राओं को मध्य नजर रखते हुए आयोजित करवाया गया। उन्होंने बताया कि भारत की वर्तमान स्थति में महिलाओं में स्तन कैंसर संख्या सबसे अधिक पाई गई है जो देश के लिए अच्छे संकेत नहीं है।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर शिरकत कर रही डॉ. कंचन कौर ने अपने संबोधन में बताया कि स्तन कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसमें असामान्य स्तन कोशिकाएँ अनियंत्रित रूप से बढ़ती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। अगर इसे अनियंत्रित छोड़ दिया जाए, तो ट्यूमर पूरे शरीर में फैल सकता है और जानलेवा हो सकता है।
स्तन कैंसर की कोशिकाएँ दूध नलिकाओं और/या स्तन के दूध उत्पादक लोब्यूल्स के अंदर शुरू होती हैं। सबसे प्रारंभिक रूप (इन सीटू) जीवन के लिए ख़तरा नहीं है और इसका पता शुरुआती चरणों में लगाया जा सकता है। कैंसर की कोशिकाएँ आस-पास के स्तन ऊतक (आक्रमण) में फैल सकती हैं। इससे ट्यूमर बनते हैं जो गांठ या गाढ़ापन पैदा करते हैं।
आक्रामक कैंसर आस-पास के लिम्फ नोड्स या अन्य अंगों तक फैल सकता है (मेटास्टेसिस)। मेटास्टेसिस जीवन के लिए ख़तरा और घातक हो सकता है।
उपचार व्यक्ति, कैंसर के प्रकार और उसके फैलाव पर आधारित होता है। उपचार में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी और दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि महिला लिंग स्तन कैंसर का सबसे बड़ा जोखिम कारक है। लगभग 99% स्तन कैंसर महिलाओं में होता है और 0.5-1% स्तन कैंसर पुरुषों में होता है। पुरुषों में स्तन कैंसर के उपचार में महिलाओं के समान ही प्रबंधन के सिद्धांत अपनाए जाते हैं।
कुछ उपचार, जैसे सर्जरी और रेडिएशन, स्थानीय होते हैं , अर्थात वे शरीर के बाकी हिस्सों को प्रभावित किए बिना ट्यूमर का इलाज करते हैं।
स्तन कैंसर से पीड़ित अधिकांश महिलाओं को ट्यूमर को हटाने के लिए किसी न किसी प्रकार की सर्जरी करवानी पड़ती है। स्तन कैंसर के प्रकार और इसकी प्रगति के आधार पर, आपको सर्जरी से पहले या बाद में या कभी-कभी दोनों तरह के अन्य उपचार की भी आवश्यकता हो सकती है।
स्तन कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं को प्रणालीगत उपचार माना जाता है क्योंकि वे शरीर में लगभग कहीं भी कैंसर कोशिकाओं तक पहुँच सकती हैं। कुछ को मुंह से दिया जा सकता है, मांसपेशियों में इंजेक्ट किया जा सकता है या सीधे रक्तप्रवाह में डाला जा सकता है। स्तन कैंसर के प्रकार के आधार पर, विभिन्न प्रकार के दवा उपचार का उपयोग किया जा सकता है।
इस अवसर पर कॉलेज की उपाचार्या डॉ. अनुराधा सिंह, डॉ. मीनल तालस, प्राध्यापिका आस्था गुप्ता समेत इनरवील डिस्ट्रीक 308 जोन 10 क्लब व रोटरी रैनबो के सभी सदस्य मौजूद रहे।

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