आर्य कॉलेज के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में पॉडकास्ट दिवस पर विशेष व्याख्यान आयोजित
– आरजे दिव्या ने दिए मल्टी-स्किल्स अपनाने पर जोर
BOL PANIPAT : मंगलवार 29 सितंबर 2026 : आर्य कॉलेज के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आज कॉलेज परिसर में ‘पॉडकास्ट दिवस’ की पूर्व संध्या के अवसर पर एक भव्य विस्तार व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध रेडियो जॉकी (आरजे) दिव्या रहीं, जिन्होंने बतौर मुख्य वक्ता शिरकत कर विद्यार्थियों को ब्रॉडकास्टिंग और पॉडकास्टिंग की बारीकियों से रूबरू कराया। कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज प्राचार्य प्रो. (डॉ.) जगदीश गुप्ता ने मुख्य वक्ता आरजे दिव्या का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत कर की।
इस अवसर पर कॉलेज प्राचार्य प्रो. (डॉ.) जगदीश गुप्ता ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि आधुनिक युग में तकनीक और मीडिया का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे में हमारे विद्यार्थियों के लिए यह आवश्यक है कि वे पारंपरिक पत्रकारिता के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के नए आयामों जैसे पॉडकास्ट और वॉयस मीडिया से जुड़ें। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के व्याख्यान विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ाते हैं और उन्हें उद्योग-जगत की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं।
मुख्य वक्ता आरजे दिव्या ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के मीडिया जगत में केवल एक कौशल (स्किल) के सहारे सफलता हासिल करना कठिन है। वर्तमान दौर मल्टी-स्किल्स (बहु-कौशल) सीखने की सख्त मांग करता है। उन्होंने छात्रों को अपनी आवाज की गुणवत्ता, पटकथा लेखन (स्क्रिप्ट राइटिंग), और डिजिटल टूल्स में पारंगत होने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पॉडकास्ट ने आज अभिव्यक्ति का एक नया और सशक्त माध्यम दिया है, जहाँ युवा अपनी रचनात्मकता के बल पर अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।
इस दौरान आरजे दिव्या ने अपने वक्तव्य को बेहद रोचक बनाया और विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने छात्रों द्वारा पूछे गए विभिन्न सवालों के जवाब बहुत ही शानदार और व्यावहारिक तरीके से दिए, जिससे युवाओं में भारी उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम के दौरान पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि हर वर्ष 30 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय पॉडकास्ट दिवस मनाया जाता है। उन्होंने इस वर्ष के पॉडकास्ट दिवस की थीम ‘सेलिब्रेटिंग कन्वर्सेशन’ (संवाद का जश्न) पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक प्रभावी संवाद समाज को जोड़ने और विचारों के आदान-प्रदान का सबसे बड़ा माध्यम बनता है।
कार्यक्रम के अंत में विभाग के प्राध्यापकगण—संदीप, शिवांक रावल, गजल पांचाल और सोनू समेत अन्य मौजूद रहे, जिन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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