Thursday, April 16, 2026
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स्वामी दयानन्द सरस्वती ने नवसम्वत 2080 की सभी संगत को शुभकामनाएं दी।

By LALIT SHARMA , in RELIGIOUS , at March 22, 2023 Tags: , , ,

BOL PANIPAT : श्री संत द्वारा हरि मन्दिर, निकट सेठी चौक, पानीपत के प्रांगण में नव विक्रमी सम्वत 2080 के उपलक्ष्य के अवसर पर परम पूज्य 1008 स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज (मुरथल वाले) की अध्यक्षता में संत समागम कार्यक्रम के समापन दिवस पर महाराज श्री ने प्रवचन करते हुए सबसे पहले नवसम्वत 2080 की सभी संगत को शुभकामनाएं दी। उन्होंने सम्वत के वर्षफल के बारे में बताता हुआ कहा कि सम्वत का नाम पिंगल है, सम्वत का राजा बुध और मंत्री शुक्र है। सम्वत का वास धोबी के घर और वाहन गीदड़ है। उन्होंने बताया कि जगह जगह विषम परिस्थितियां होंगी, नेताओं के बीच आपसी विवाद होगा। लेकिन जो प्रभु को स्वयं को समर्पित कर देता है उसके सब ग्रह अनुकूल कर देता है। एक व्यक्ति एक संत के पास गया और कहा कि मुझे कोई अच्छा मुहूर्त बताओ जिसमें मैं अपना काम शुरू करूं तो वह सफल हो जाए। संत ने कहा कि प्रभु की स्मृति ही ऐसा समय है जिसमें मुहूर्त की आवश्यकता नहीं है। परमात्मा का नाम लेते ही राहु, केतु, शनि आदि ग्रह अनुकूल हो जाते हैं। सत्संग सुनने से ग्रहों के सब दोष समाप्त हो जाते हैं। स्वामी जी ने आगे बताते हुए कहा कि जीवन में देने के साथ मांगना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी अच्छे कार्य के लिए धन देना पड़े तो देना चाहिए उसी तरह यदि धर्म और समाज हित कार्यों में हमें मांगना भी पड़े तो मांगना चाहिए। क्योंकि यह मांगना स्वार्थ के लिए नहीं अपितु समाजहित एवं धर्महित के लिए है। एक बार एक राजा को ज्योतिषियों ने बताया कि आपके राज्य में अकाल पड़ने वाला है। राजा ने इसका उपाय पूछा तो ज्योतिषयों ने कहा कि आपको मांगना पड़ेगा। राजा ने कहा कि मैं मांग नहीं सकता। तब इसका हल बताया गया कि आप सुबह सुबह महल से निकलेें और जो पहला व्यक्ति आपको मिले उससे मांग लेना। राजा को सुबह सबसे पहले एक भिखारी मिला राजा ने उससे मांगा तो भिखारी ने अपने मुट्ठी भर चावल से एक दाना दे दिया। जब भिखारी ने घर जाकर देखा तो उसके चावल में एक दाना सोने के चावल का था उसी प्रकार राजा ने जब वह एक दाना अपने अन्नकोष में रखवाया तो वहां रखे सभी दाने सोने के हो गए। इससे पूर्व मुख्य अतिथि सुरेन्द्र रेवड़ी, बृजेश पुनियानी और मनीष जुनेजा ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर प्रधान रमेश चुघ, हरनाम चुघ, अमरजीत सपड़ा, किशोर रामदेव, दर्शन रामदेव, पवन चुघ, उत्तम आहूजा, प्रवेश रेवड़ी, सुरेश चुघ, कर्म सिंह रामदेव, जगदीश जुनेजा, प्रेम जुनेजा, शाम सपड़ा, गोल्डी बांगा, सौरभ कत्याल, अमन रामदेव, हरनारायण जुनेजा, ओम प्रकाश खुराना, सोनू खुराना, मिक्की जुनेजा, अमर वधवा, भव्य चुघ, राघव चुघ, ईश्वर लाल रामदेव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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