Friday, October 16, 2026
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हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष तृप्ति श्योराण ने सीसीआईएस में सीसीटीवी को लेकर वैधानिक परामर्श जारी किया

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at October 16, 2026 Tags: , , , , ,

BOL PANIPAT : 16 अक्टूबर। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष तृप्ति श्योराण ने सीसीआईएस में सीसीटीवी को लेकर वैधानिक परामर्श जारी किया है। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रदेश के सभी बाल देखभाल संस्थानों (चाइल्ड केयर इंस्टिटयूट – सीसीआईएस) में रह रहे बच्चों की निजता, गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु एक महत्वपूर्ण वैधानिक परामर्श (स्टेटटरी एडवाइजरी ) जारी की है। यह एडवाइजरी सीपीसीआर अधिनियम, 2005 की धारा 13(1) (ए) के अंतर्गत आयोग की अध्यक्षा द्वारा जारी की गई है। आयोग ने अपने दौरों के दौरान पाया कि कई संस्थानों में सीसीटीवी सिस्टम को व्यक्तिगत मोबाइल फोन, लैपटॉप से जोड़ा गया है, जिससे लाइव फुटेज कहीं से भी देखी, डाउनलोड और वायरल की जा सकती है। यह बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने बताया कि संस्थागत नियंत्रण और अधिकृत पहुँच, सीसीटीवी सिस्टम, उसकी फुटेज और पासवर्ड पर केवल संस्थान के प्रभारी का नियंत्रण रहेगा। पहुँच केवल अधिकृत कर्मचारियों को ही दी जाएगी। सांझा पासवर्ड से सिस्टम चलाना मना है।

उन्होंने बताया कि निजी डिवाइस से जोडऩे पर पूर्ण प्रतिबंध, सीसीटीवी को निजी मोबाइल, लैपटॉप से जोडऩा सख्त मना है। रिमोट  एक्सेस बाय-डिफॉल्ट बंद रहेगा। कॉपी और प्रसार पर रोक रहेगी तथा कोई भी व्यक्ति सीसीटीवी मॉनिटर की फोटो, स्क्रीन रिकॉर्डिंग, फुटेज को डाउनलोड, कॉपी या व्हाट्सप्प, सोशल मीडिया, ईमेल से प्रसारित नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि सुरक्षित स्टोरेज के तहत डिवीआर, एनवीआराम को सुरक्षित स्थान पर रखा जाए, पासवर्ड समय-समय पर बदले जाएं और एक्सेस लॉग की जांच की जाए। किसी घटना से संबंधित फुटेज को कानूनी प्रक्रिया तक सुरक्षित रखा जाए। बच्चों की निजता का सम्मान: शौचालय, स्नानघर, कपड़े बदलने वाले स्थानों के अंदर कैमरा लगाना पूर्णत: वर्जित है। यह किशोर न्याय मॉडल नियम, 2016 के नियम 67(12) का अनिवार्य प्रावधान है।

जिम्मेदारी और कार्रवाई: प्रत्येक सीसीआई को अधिकृत यूजर्स का रिकॉर्ड और फुटेज निकालने का रजिस्टर रखना होगा, जिसमें दिनांक, उद्देश्य और प्राप्तकर्ता का उल्लेख हो। किसी भी अनधिकृत पहुँच की सूचना तुरंत सक्षम प्राधिकारी को देनी होगी।

आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग, सभी उपायुक्तों और जिला बाल संरक्षण अधिकारियों को 15 दिन में अनुपालना रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध उचित प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

अनुपालना सुनिश्चित करने हेतु निर्देश:

महिला एवं बाल विकास विभाग, हरियाणा को परामर्श दिया जाता है कि वह अपने अधीन सभी संबंधित जिला अधिकारियों और सभी बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआईएस) को इस एडवाइजरी में निर्धारित सुरक्षा उपायों को लागू करने हेतु लिखित निर्देश जारी करे। सक्षम राज्य और जिला अधिकारी निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित करेंगे कि सीसीटीवी सिस्टम से कौन से डिवाइस जुड़े हैं, लाइव फीड और रिकॉर्डेड फुटेज तक पहुँच रखने वाले व्यक्तियों की पहचान और प्राधिकरण क्या है, एक्सेस क्रेडेंशियल्स की सुरक्षा, रिमोट-एक्सेस सेटिंग्स,रिकॉर्डिंग की सुरक्षा और संरक्षण,और विशेष रूप से बालिकाओं वाले सीसीआईएस के लिए लागू विशेष सुरक्षा उपायों का पालन हो रहा है या नहीं। किसी भी कमी को तुरंत दूर किया जाए और गैर-अनुपालन के लिए जिम्मेदारी नियमानुसार तय की जाए।

आयोग ने जोर देकर कहा है कि सुरक्षा के उद्देश्य से सीसीटीवी कैमरों की स्थापना के साथ-साथ फुटेज के उपयोग, भंडारण और प्रकटीकरण को नियंत्रित करने वाले प्रभावी सुरक्षा उपायों का होना अनिवार्य है। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सीसीटीवी निगरानी केवल संस्थागत सुरक्षा और बाल संरक्षण का उपाय बनी रहे और बच्चों की गतिविधियों या उनके ठिकाने को अनधिकृत व्यक्तियों के सामने उजागर न करे। विभाग को परामर्श दिया जाता है कि वह यह सुनिश्चित करे कि ये सुरक्षा उपाय सभी संबंधित सीसीआईएस में सूचित, कार्यान्वित और निगरानी किए जाएं, जिसमें अनुपालन के लिए उचित जवाबदेही तय हो। यह एडवाइजरी बच्चों के सर्वोत्तम हित में और उनकी निजता, गरिमा और सुरक्षा की रक्षा के लिए जारी की गई है।

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