विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी के मामले में एक महिला गिरफ्तार
BOL PANIPAT , 23 अक्तूबर। थाना प्रबंधक इंसराना इंस्पेक्टर हरिराम ने बतलाया कि मुकदमा में पहले एक आरोपी अब्दुर रब को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। मुकदमा में अब्दुर रब व शाकिब के साथ वारदात में शामिल शारदा देवी पत्नी सुरेश वासी प्लाट नंबर डी वन ब्रहमपुरी फेस-टू नागलोई दिल्ली हाल निवासी आर ब्लाक गली नंबर 2, मकान नंबर 52 विकास नगर उत्तम नगर नई दिल्ली को मुम्बई से पुछताछ करके गिरफ्तार किया गया। जिसका राहदारी रिमांड लिया गया आरोपिया ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर विदेश भेजने के नाम पर लोगों से पैसे एठने और धोखाधड़ी करने के लिए अपने बैंक अकाउंट में पैसे मंगवाए थे और जिसके बदले अन्य आरोपी द्वारा कमीशन दिया जाता था। जिसको आज माननीय न्यायालय में पेश किया गया और बंद ज्यूडिशियल जेल करवाया गया।
थाना इसराना में सत्यवान पुत्र रामकिशन निवासी गांव नौल्था ने बतलाया था वह कस्बा घरौंडा में कार ठीक करने का काम करता है। यह है कि मेरा लड़का सचिन 12वीं कक्षा तक पढा हुआ है तथा आईटीआई फिटर ट्रेड से की हुई है, लेकिन वह बेरोजगार घूम रहा था। मेरे पास मेरा पड़ोसी लड़का कमल पुत्र सुनील आया और कहने लगा कि उसकी जानकारी में कुछ लोग जो बेरोजगारों को विदेश भेजने एवं वहा पर रोजगार दिलवाने का कार्य करते है। इसके बाद कमल मुझे दोषी नंबर 1 सतनाम उर्फ मालवा निवासी गांव मर्दान खेड़ा जिला जीन्द के पास ले गया। दोषी नंबर 1 ने बताया कि वह बच्चों को विदेश भेजकर उन्हें जाब दिलवाने का काम करता है। जो प्राथी का लड़का भी बेरोजगार घूम रहा था तो प्रार्थी ने उपरोक्त दोषी नंबर 1 को अपने लड़के के बारे में बताया तो दोषी नंबर 1 ने प्रार्थी को विश्वास दिलाया कि वे प्रार्थी के लड़के सचिन को जर्मनी भेज देगे और वहा पर जाब भी दिलवायेगे। इसके लिए 12 लाख रूपए लगेगे और हम तुम्हारे लड़के को 15-20 दिन में ही जर्मनी का वीजा देकर भेज देंगे। जो दोषी नंबर 1 ने कहा कि तुम्हें पहले कोई पैसे नहीं देने है लड़का जर्मनी पहुंचने के बाद पैसे दे देना। मैने दोषी नंबर 1 पर विश्वास करके उसे अपने लड़के के फोटो पढाई के कागजात व अन्य दस्तावेज दे दिए। इसके बाद दोषी नंबर 1 ने मेरे लड़के को रूस देश में भेज दिया और जैसे ही सचिन रूस पहुंचा तो दोषी नंबर 1 सतनाम तुंरत मुझसे पैसों की मांग करने लगा जो हमसे 3 लाख 50 हजार रूपए देने के लिए कहा। मैने 3 लाख 50 हजार रूपए हरि नगर पानीपत में वेद सिंह के घर पर कमल पुत्र सुनील, वेद सिंह व अनिल के सामने दोषी नंबर 1 सतनाम व उसके भांजे को दिए। उसने दोषी नंबर 1 सतनाम से कहा कि बात सीधा जर्मनी जाने की हुई थी और पैसे भी उसके बाद देने थे। दोषी नंबर 1 सतनाम ने कहा सीधा जर्मनी नहीं जा सकते इसके लिए अलग अलग देशों से होकर जाना पड़ेगा और ये पैसे रास्ते में खाना, टिकट आदी के खर्चें के है और ये पैसे तय रकम का ही हिस्सा है। इसके बाद सतनाम ने मेरे लड़के सचिन को पहले बैंकाक वहा से आई.के.टी जो रूस में है वहा पर भेजा। इस दौरान सारे खर्च की जिम्मेदारी जैसे होटल का रूम, खाना, टैक्सी आदी सतनाम को होना तय हुआ था। लेकिन यह सारा खर्च भी सचिन ने अपनी जेब से किया। हमने उसको 1 लाख रूपए अलग से पहले की दे रखे थे। दोषी नंबर 1 ने मुझे विश्वास दिलाया कि वे अब 10 दिन में रूस से मेरे लड़के सचिन को जर्मनी भेज देंगे। इसके बाद जब 10 दिन का समय बीत गया और मेरे लड़के सचिन को जर्मनी नहीं भेजा गया तो हमने दोषी नंबर 1 सतनाम के पास फोन किया तो उसने बहाने बनाने शुरू कर दिए और फिर फोन भी उठाने बंद कर दिए। इसके बाद हम तीन बार सतनाम से मिले और उससे प्रार्थना की कि वह आगे की फ्लाईट और उसका वीजा भी करवाए तब सतनाम ने कहा कि कुछ दिन रूक वह कुछ करेगा। इसके बाद उसने कहा कि वह पहले आई.के.टी से मास्को (दोनों रूस में है) तक का वीजा और फ्लाईट की टिकट का इंतजाम कर रहा है आगे की कार्यवाही भी जल्द पूरी की जाएगी। इसके बाद सतनाम ने हमसे बात करनी बंद कर दी और हर रोज नए बहाने बनाने लगा। मुझे अपने लड़के की जांन की चिंता काफी सताने लग गई थी क्योंकि सचिन ने बताया था कि वहां पर जो डोंकर लोग है उनमें से कुछ मानव तस्करी जैसे कार्य भी करते है। मैं बार-बार सतनाम से मिलकर अपने लड़के को आगे भेजने या फिर वापिस लाने के लिए प्राथना करता रहा, लेकिन उसने मेरी एक ना सुनी।
इसी दौरान श्याम लाल पुत्र महेंद्र सिंह निवासी गांव मुनक जिला करनाल मेरे पास घरौंडा दुकान पर आया और कहने लगा कि उसे सतनाम द्वारा किए गए धोखाधड़ी का पता चला है। क्योकि वह सतनाम को जानता है। उसने मुझझे कहा कि वह मेरे लड़के सचिन को जर्मनी भेजने में मेरी मदद करेगा। जब मैने उससे पूछा कि उससे उसे यह सारी जानकारी कहा से मिली तब उसने बताया कि उसका लड़का मुकेश मेरे लड़के सचिन को रास्ते में दिल्ली एयरपोर्ट व बैंकाक में मिला था। तब उन दोनों की आपस में जान पहचान हुई थी और उसके लड़के मुकेश ने ही सचिन के बारे में उसको बताया था। इसके साथ ही उसने मुझे यह भी बताया था कि उसका लड़का जर्मनी पहुंच चुका है, उसे रास्ते में कोई तकलीफ नहीं हुई। श्याम लाल की काफी पहुंच है वह पहले ही कई लड़को को विदेशों में भेजा जा चुका है। इसके बाद श्याम लाल के लड़के मुकेश ने मेरे लड़के सचिन को फोन काल किया और कहा कि वह जर्मनी पहुंच चुका है। वह भी उसके पिता श्याम लाल से अपने पिता सत्यवान को मिलने के लिए बोले ताकि उसका काम भी जल्द से जल्द हो सके।
मेरे लड़के सचिन व मुझे श्याम लाल पर विश्वास हो गया और में श्याम लाल के कहे अनुसार काम करने लगा। श्याम लाल ने कहा कि वह सचिन को सुरक्षित जर्मनी पहुंचा देगा और इसके लिए उसने 8 लाख रूपए मांगे और कहा कि सारा पैसा जर्मनी पहुंचने पर देना है। मैं घबराया हुआ था और चाहता था कि किसी तरह मेरा लड़का सचिन सुरक्षित जर्मनी पहुंच जाए और मैं पैसे देने के लिए राजी हो गया। 06-10-2023 को श्याम लाल ने सचिन को आई.के.टी से मास्को पहुचा दिया। वहा हवाई अड्डे के बाहर सचिन के पास एक नंबर से काल आया कि वह श्याम लाल के कहने पर उसे लेने आ रहा है। इसके बाद सचिन उसके साथ चला गया। वहा से सचिन को बेलारूस ले जाया गया। आई.के.टी से मास्को और मास्को से बेलारूस ले जाने के नाम पर श्याम लाल ने 2 लाख रूपए मांगे। उसने उसी दिन पैसे देने का दबाव बनाया और श्यामलाल के कहे अनुसार पहले 1 लाख रूपए फोन पे इसराना में मनी ट्रांसफर वाले से खाते में जमा करवाए और 1 लाख रूपए अपने पड़ोसी जानकार से यूपीआई द्वारा ट्रांसफर करवाये। इसके बाद सचिन को वहा से जर्मनी ले जाने की बात हुई तो श्यामलाल ने कहा कि अब केवल 1500 किलो मीटर का रास्ता रह गया है। बीच में सिर्फ पौलेंड देश की सीमाओं को पार करना है काम जल्दी हो जाएगा। बाकी पैसे देने का दबाव बनाया श्याम लाल बार बार कहता रहा कि जर्मनी के लिए गाड़ी तैयार है पैसा जल्दी दो ताकि सचिन को सुरक्षित वहा पहुंचाया जा सके। उसका लड़का पहले ही जर्मनी जा चुका है, चिंता की कोई जरूरत नहीं है, वहा पहुंचने पर सचिन को अच्छी जांब भी मिल जाएगी, यह भी उसकी गांरटी है। उसने विश्वास करके उसके कहे अनुसार 5 लाख 30 हजार रूपए 07-10-2023 को उसी खाते में आरटीजीएस करवाए। अगले दिन श्याम लाल ने कहा कि 1 लाख रूपए नकद भेजों। मैने कुछ लोगों से पैसे उधार लेकर तुरंत श्याम लाल के लड़के को अपनी दुकान पर बुलाकर दे दिए। इसके बाद बेलारूस में मेरे लड़के को जंगलों में रखा गया, लेकिन जर्मनी नहीं पहुंचाया। मैं इस बारे श्याम लाल से बात करता रहा वह कहता रहा कि अभी कुछ समय लगेगा और जल्द ही सचिन को जर्मनी पहुंचा दिया जाएगा। श्याम लाल ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया तो मै उससे मिला। इस बार वह कहने लगा कि अब उसके बस की बात नहीं है वह जो कुछ कर सकता था कर चुका है। इसके बाद मेरा लड़का कई महीनों तक बेलारूस में लावारिसों की तरह घूमता रहा, जहा पर रहने व खाने का लगभग 4 लाख रूपए मैने ही सचिन को दिए ओर आखिर में बड़ी मुश्किल से मेरा लड़का सचिन अपने वतन वापिस आ सका। इस प्रकार दोषीगण ने मेरे साथ धोखाधड़ी, विश्वासघात, हेराफेरी, जालसाजी, अमानत में ख्यानत की। मेरे बेटे की जान व माल के साथ खिलवाड़ किया। थाना इसराना में अभियोग अंकित कर आगामी कार्रवाई अमल में लाई गई थी।

Comments